Premanand Maharaj: भगवान की भक्ति के साथ-साथ पैसा कमाना स्वार्थ है? आंखें खोल देगा प्रेमानंद महाराज का जवाब
Premanand Maharaj Ekantik Vartalaap: प्रेमानंद महाराज ने 21 अप्रैल के एकांतिक वार्तालाप में बताया है कि भगवान की भक्ति के साथ पैसों को कमाना स्वार्थ है या नहीं? यहां जानें प्रेमानंद महाराज ने इस पर क्या कहा है?

Ekantik Vartalaap 21 April: वृंदावन के जाने-माने संत प्रेमानंद महाराज आए दिन लोगों को भक्ति का सही रास्ता दिखाते हैं। अपने प्रवचन के दौरान वह लोगों को नाम जप करने के साथ-साथ हमेशा पॉजिटिव रहने की बात कहते हैं। साथ ही एकांतिक वार्तालाप के दौरान वह भक्तों के सवालों का जवाब देते हैं। 21 अप्रैल के एकांतित वार्तालाप में प्रेमानंद महाराज ने एक ऐसे सवाल का जवाब दिया है जो शायद हर किसी के मन में होगा। एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज से पूछा कि भगवान की भक्ति के साथ-साथ अगर पैसे कमाने के बारे में सोचूं तो क्या ऐसा करना मेरा स्वार्थ होगा? क्या ऐसा करना पाप के अंदर आता है? इस सवाल पर प्रेमानंद महाराज ने ऐसा जवाब दिया है जो किसी की भी आंखें खोल देगा। आइए जानते हैं कि आखिर प्रेमानंद महाराज ने इस सवाल के जवाब में क्या कहा है?
प्रेमानंद महाराज ने कही ये बात
प्रेमानंद महाराज ने कहा कि हम कह रहे हैं कि खूब स्वार्थी बनो और हमारी बात मान जाओ। चकाचक माल छानोगे और मरोगे तो भगवान के पास जाओगे। नाम जप लो। हमारी बात मान लो। जो जितना भजन करता है। उसी के आगे लौकिक और परलौकिक भगवान दोनों प्रकार के सुख प्रदान करते हैं। इतने कृपालु भगवान हैं उतना भरण-पोषण करते हैं। तो हमें लगता है कि रुपया चाहिए तो धन कमाओ लेकिन कैसे? राधा राधा राधा नाम जाप करो और फिर इस धन से लोक परलोक के सारे सुखों को खरीद लो।
प्रेमानंद महाराज ने कहा भजन करना है जरूरी
प्रेमानंद महाराज ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि अब भजन नहीं करोगे। पाप करोगे। चाहोगे सुख बेइमानी से अधर्म आचरण से तो भले रुपया मिले परिवार का नाश कर देगा और तुम्हारी बुद्धि भ्रष्ट कर देगा। तुम्हारे सुख-शांति को नष्ट कर देगा। धर्म से चलो और भजन करो फिर भगवान से कहो कि संपत्ति दो तो ध्रुव को अटल पदवी दी भगवान ने। प्रहलाद जी को एक कल्प का राज दिया। विभीषण को एक कल्प का राज दिया। जो चाहो भगवान से प्राप्त कर लो लेकिन भजन करना पड़ेगा।
जरूर मिलेगा अच्छे-बुरे कर्म का फल
प्रेमानंद महाराज ने कहा अब पियो शराब और पराए बहन-बेटियों की ओर गंदी दृष्टि रखो। मुर्गा-मछली खाओ। पूर्वजन्म के फलास्वरूप भले ही करोड़पति बन जाओ लेकिन अबकी नरक जाना पड़ेगा जैसे आचरण कर रहे हो और अगले जन्म में तुम भी सुअर, कुत्ता, गधा और मुर्गा बनोगे और ऐसे ही काटकर खाए जाओगे। शुभ और अशुभ कर्म का फल अवश्य भोगना पड़ेगा।
महाराज जी आगे कहते हैं कि अगर लोक और परलोक में चकाचक आनंद लेना चाहते हो तो हमारी बृजभाषा में नंद नंदन भजो। किशोरी जी को भजो। राम भजो। हरि भजो। तुम्हारा मंगल हो जाएगा। देख लो मंगल हो जाएगा। भजन करोगे तो तुम्हें सब मिलेगा। भजन नहीं करोगे और पाप कर्म करोगे भगवान को कोसोगे। ऐसे नहीं होता है। खूब नाम जप करो।




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