Premanand Maharaj Pravachan: मृत्यु के समय 3 चीजें जाती हैं साथ? प्रेमानंद महाराज ने बताया नाम जप का फायदा
Premanand Maharaj Latest Pravachan: वृंदावन के जाने-माने संत प्रेमानंद महाराज ने अपने हालिया प्रवचन के दौरान एक बार फिर से मृत्यु को लेकर बात की है। उन्होंने बताया है कि मृत्यु के समय में कौन सी 3 चीजें साथ जाती हैं?

Premanand Maharaj Talks About Death: वृंदावन के सुप्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज अपने प्रवचन के माध्यम से कई ऐसी बातें कहते हैं, जिससे कई लोग खुद को कनेक्ट कर पाते हैं। प्रवचन के दौरान एकांतित वार्तालाप के दौरान प्रेमानंद महाराज एक-एक करके हर किसी के सवालों के जवाब देते हैं। एक प्रवचन के दौरान इस श्रद्धालु ने उनसे मृत्यु से जुड़ा सवाल किया। सवाल था कि मृत्यु के समय हमसे यहां पर क्या छूटता है और हमारे साथ क्या वापस जाता है? इस सवाल का जवाब देते हुए प्रेमानंद महाराज ने बड़ी ही प्यारी बात कही है। उनके जवाब को जानने के लिए नीचे विस्तार से पढ़ें...
मृत्यु के बाद साथ जाती हैं ये 3 चीजें
वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज का कहना है कि भगवन नाम यदि लिया है। पुण्य किए हैं और पाप किए हैं। ये 3 चीजें साथ जाती हैं। किया हुआ तुम्हारा पुण्य, किया हुआ तुम्हारा पाप और किया हुआ तुम्हारा भजन ये सब तुम्हारे साथ जाएगा। जो आगे चलकर आपकी उन्नति और अवनति का कारण बनेगा। यदि आपने पाप किए हैं तो आगे जाकर आपकी दुगर्ति हो जाएगी। शरीर में नाना प्रकार के रोग हो जाएंगे। नाना प्रकार की विप्पतियों से ग्रसित हो जाओगे। अगर आपने पुण्य किए हैं तो आपको अच्छी लौकिक उन्नति प्राप्त होगी। यदि भजन किए हैं तो पारलौकिक उन्नति की प्राप्ति होगी। यही मृत्युलोक थोड़े ही है। ऊपर परलोक है नीचे लोक है, जहां विशुद्ध देह है। दिव्य सुविधाएं हैं। सहीं कोई रोग-शोक नहीं है। ऐसी लोकों की प्राप्ति होगी। अगर सही भजन कर लिया तो भगवान की प्राप्ति हो जाएगी। शेष और कुछ साथ नहीं जाता है।
नाम जप से मिलेगा लाभ
ये स्थूल शरीर है। ये यही छूट जाता है। सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर और आत्मा जहां जहां कर्म के अनुसार जाना होगा, वहां वहां वो जन्म लेगा और वैसे ही कर्म भोगेगा। इसीलिए अपने को कमाना है भगवन नाम। पाप नहीं कमाना है। पाप से बचो और खूब भगवन नाम जप करो। राधा राधा राधा राधा मन लगे ना लगे तो इस लोक में भी उन्नति होगी और परलोक में भी उन्नति होगी। जहां भी बैठोगे वहां आनंद ही आनंद रहेगा। यदि पाप नष्ट हो जाए और भजन रह जाए तब। अभी पाप है तो भजन करते हुए जलन होगी। जिस दिन पाप नष्ट हो जाएंगे, उस दिन हृदय आनंद से भर जाएगा।




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