आज भौम प्रदोष व्रत पर शाम 06:54 बजे से शुरू होगा शिव पूजा मुहूर्त, जानें उपाय
Pradosh Time Bhaum Pradosh Vrat 2026: आज भौम प्रदोष व्रत के दिन उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र रात में 10:36 बजे तक रहेगा। भौम प्रदोष व्रत के दिन शाम में पूजा करने का विधान है। इस दिन विधि-विधान के साथ पूरे शिव परिवार की पूजा-उपासना की जाती है।

Pradosh Time Bhaum Pradosh Vrat 2026, भौम प्रदोष व्रत : आज वैशाख महीने का प्रदोष व्रत है। हर महीने प्रदोष का व्रत रखा जाता है। प्रदोष का व्रत भगवान शिव को समर्पित है। आज मंगलवार है। मंगलवार को पड़ने वाला प्रदोष का व्रत भौम प्रदोष व्रत कहलाता है। आज भौम प्रदोष व्रत के दिन उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र रात में 10:36 बजे तक रहेगा, जिसके बाद हस्त नक्षत्र लग जाएगा। भौम प्रदोष व्रत के दिन शाम में पूजा करने का विधान है। इस दिन विधि-विधान के साथ पूरे शिव परिवार की पूजा-उपासना की जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख महीने में शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 28 अप्रैल 2026 को शाम में 06 बजकर 52 मिनट पर शुरू हो जाएगी। इस तिथि का समापन 29 अप्रैल 2026 को शाम में 07 बजकर 51 मिनट पर होगा। आज के दिन संध्या के समय भौम प्रदोष व्रत की पूजा की जाएगी। ऐसे में आइए जानते हैं भौम प्रदोष व्रत पर पूजा करने के शुभ मुहूर्त, विधि और उपाय-
आज भौम प्रदोष व्रत पर शाम 06:54 बजे से शुरू होगा शिव पूजा मुहूर्त, जानें उपाय
हिंदू पंचांग के अनुसार, आज के दिन प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त शाम में 06:54 बजे से लेकर शाम में 09:04 बजे तक रहेगा, जिसकी अवधि 02 घंटे 10 मिनट्स तक रहेगी। आज के दिन त्रिपुष्कर योग सुबह में 05:43 मिनट से शाम में 06:51 बजे तक रहेगा। अमृत काल दोपहर में 03:01 बजे से शाम में 04:42 बजे तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम में 06:53 बजे से शाम में 07:15 बजे तक रहेगा।
भौम प्रदोष व्रत पर क्या उपाय करें?
भौम प्रदोष व्रत के दिन पूजा के समय शिव मंत्रों का जाप करें।
- रुद्र- ॐ रुद्राय नमः।, भक्तों के कष्ट से द्रवित होने वाले
- भूतपति- ॐ भूतपतये नमः।, जो पञ्चभूतों (अग्नि, वायु, जल, पृथ्वी, आकाश) के स्वामी हैं / जो भूतप्रेतों के स्वामी हैं।
- स्थाणु- ॐ स्थाणवे नमः।, जो अडिग एवं अटल हैं।
- अहिर्बुध्न्य- ॐ अहिर्बुध्न्याय नमः।, जो समस्त सृष्टि का आधार हैं / कुण्डलिनी धारण करने वाले
- दिगम्बर- ॐ दिगम्बराय नमः।, ब्रह्माण्ड को वस्त्र के रूप में धारण करने वाले
- अष्टमूर्ति- ॐ अष्टमूर्तये नमः।, आठ रूपों वाले
- अनेकात्मा- ॐ अनेकात्मने नमः।, अनेक रूप धारण करने वाले
- सात्त्विक- ॐ सात्त्विकाय नमः।, असीमित ऊर्जा के स्वामी
- शुद्धविग्रह- ॐ शुद्धविग्रहाय नमः।, जो पूर्ण रूप से शुद्ध एवं निर्मल हैं।
- शाश्वत- ॐ शाश्वताय नमः।-, जो अनन्त एवं अविनाशी हैं।
- खण्डपरशु- ॐ खण्डपरशवे नमः।, खण्डित परशु धारण करने वाले
- अज- ॐ अजाय नमः।, जो अजन्मा, असीमित एवं अजेय हैं।
- पाशविमोचन- ॐ पाशविमोचकाय नमः।, समस्त सांसरिक बन्धनों से मुक्त करने वाले
- मृड- ॐ मृडाय नमः।, सुख-सौभाग्य प्रदान करने वाले
- पशुपति- ॐ पशुपतये नमः।, समस्त पशुओं/जीवों के स्वामी
- देव- ॐ देवाय नमः।, जो सर्वशक्तिशाली सर्वव्यापी ईश्वर हैं।
- महादेव- ॐ महादेवाय नमः।, जो देवों के भी देव हैं।
- अव्यय- ॐ अव्ययाय नमः।, जो अपरिवर्तनीय हैं।
- हरि- ॐ हरये नमः।, समस्त पापों को हरने वाले
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




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