Gemstone: इन तारीखों पर जन्मे लोगों के लिए बेस्ट है पुखराज, पहनते समय ना करें ये गलती
किसी भी रत्न को धारण करने के लिए सिर्फ कुंडली देखने की जरूरत नही हैं। आप अपने मूलांक के आधार पर भी अपने लिए परफेक्ट रत्न को सेलेक्ट कर सकते हैं। आज जानिए कि पुखराज किस मूलांक के लोगों के लिए बेस्ट होता है?

रत्नशास्त्र की दुनिया में उन रत्नों का जिक्र है, जिनमें हमारी कुंडली के ग्रहों के प्रभाव को काफी हद तक कम करने की ताकत है। हीरा, मोती, पन्ना और पुखराज समेत कई ऐसे रत्न हैं, जिसे ज्योतिष जरूरत के हिसाब से पहनने की सलाह देते हैं। आम तौर पर लोग कुंडली दिखाकर ही अपने लिए रत्न बनवाते हैं। वहीं मूलांक के आधार पर भी रत्नों को धारण कर सकते हैं। आज बात करेंगे रत्नशास्त्र की दुनिया के कीमती रत्नों में से एक पुखराज की। पुखराज का संबंध बृहस्पति ग्रह यानी गुरु से जुड़ा हुआ है। इससे पहनने से करियर और विवाह संबंधी कई बाधाएं दूर होती हैं। तो चलिए जानते हैं कि आखिर किस तारीख पर जन्मे लोगों के लिए ये सूटेबल होता है।
इस मूलांक के लिए लकी है पुखराज
बता दें कि हर किसी की जन्म तारीख से जुड़ा हुआ एक मूलांक होता है। मूलांक हमारी जिंदगी की दिशा और भविष्य को किसी ना किसी रूप में जरूर प्रभावित करते हैं। बात करें पुखराज की तो ये मूलांक 3 वालों के लिए काफी लकी होता है। जिन लोगों का जन्म किसी भी महीने की 3, 12, 21 या फिर 30 तारीख को होता है, उनका मूलांक 3 होता है। मूलांक 3 वाले जातक वैसे तो काफी क्रिएटिव और एक्टिव रहते हैं लेकिन कई बाद अपने तनाव के चलते ये कई चीजों में मात खा जाते हैं। ऐसे में पुखराज की मदद से इनकी जिंदगी में स्थिरता आती है। साथ ही पुखराज की एनर्जी से इनकी क्रिएटिविटी और निखरती है और ये सही दिशा में क्लैरिटी के साथ सोच पाते हैं। हालांकि पुखराज को धारण करने का नियम है। इसे धारण करते वक्त कोई भी गलती नहीं करनी चाहिए।
पुखराज पहनने का नियम
किसी भी रत्न को धारण करने से पहले उसका शुद्धीकरण करना जरूरी है। कई बार लोग ऐसा ना करके ही इस रत्न को धारण कर लेते है जोकि सही नहीं है। वहीं इसे धारण करने के लिए एक विशेष दिन है। इस दिन ही पुखराज को धारण करना फलदायी माना जाता है। ऐसे में पुखराज को हमेशा गुरुवार के दिन ही पहनना चाहिए। साथ ही इसे हमेशा सोने में ही जड़वाना चाहिए। धारण करने से पहले इसे दूध और गंगाजल से शुद्ध कर लें। इसके बाद ॐ बृं बृहस्पतये नमः मंत्र का 108 बार जाप करें और इसे सच्ची श्रद्धा के साथ धारण कर लें।
डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए रत्नशास्त्र विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)




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