आज पौष पुत्रदा एकादशी पर इन 4 जगहों पर जलाएं दीपक, मां लक्ष्मी की कृपा से बढ़ेगी सुख-समृद्धि
Paush Putrada Ekadashi Ke Upay: इस साल मंगलवार के दिन 30 दिसंबर को पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इस दिन कुछ जगहों पर शाम के समय में दीपक जलाने से मां लक्ष्मी का आगमन होता है और धन-धान्य भी बना रहता है।

Paush Putrada Ekadashi Ke Upay: एकादशी के दिन पूजा-पाठ का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन शाम के समय सूर्यास्त होने के बाद कुछ खास जगहों पर दीपक जलाने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की असीम कृपा प्राप्त होती है। इस साल मंगलवार के दिन 30 दिसंबर को पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इस दिन कुछ जगहों पर शाम के समय में दीपक जलाने से मां लक्ष्मी का आगमन होता है और धन-धान्य भी बना रहता है।
30 दिसंबर को पौष पुत्रदा एकादशी पर इन 4 जगहों पर जलाएं दीपक, मां लक्ष्मी की कृपा से बढ़ेगी सुख-समृद्धि
1. तुलसी के पास: तुलसी का पौधा भगवान विष्णु का प्रिय पौधा है। पौष पुत्रदा एकादशी की शाम को तुलसी के पौधे के पास गाय के घी का दीपक जरूर जलाएं। इससे घर में सुख-समृद्धि आती है और वैवाहिक जीवन की परेशानियां दूर होती हैं।
2. घर के मुख्य द्वार पर: शाम को घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर या कम से कम दाहिनी ओर एक दीपक जलाएं। दीपक को सीधे जमीन पर न रखें, उसके नीचे थोड़े अक्षत या फूलों की पंखुड़ी रखें। ऐसा माना जाता है कि पौष पुत्रदा एकादशी पर मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से माता लक्ष्मी का घर में आगमन होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
3. मंदिर में: अपने घर के मंदिर में भगवान विष्णु या लड्डू गोपाल के सामने एक अखंड दीपक या घी का दीपक जलाएं। यह परिवार में शांति और भक्ति का माहौल बनाए रखता है।
4. पीपल के पेड़ के नीचे: यदि संभव हो, तो पास के किसी मंदिर या स्थान पर पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं। पीपल में भगवान विष्णु का वास माना जाता है। यहां दीपक जलाने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और आर्थिक तंगी दूर होती है।
न भूलें ये 2 बातें
घी या तेल: एकादशी पर मुख्य रूप से गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाना सबसे उत्तम है। यदि घी न हो, तो तिल के तेल का उपयोग किया जा सकता है।
दिशा: दीपक की लौ (ज्योति) यदि उत्तर या पूर्व दिशा की ओर हो, तो यह आयु और आरोग्य बढ़ाती है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




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