panchak 2026 16 to 20 march overlap chaitra navratri rules and remedies to avoid bad effects Panchak 2026: चैत्र नवरात्रि से पहले शुरू होगा पंचक, जानिए इस दौरान क्या करें क्या नहीं, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Panchak 2026: चैत्र नवरात्रि से पहले शुरू होगा पंचक, जानिए इस दौरान क्या करें क्या नहीं

ज्योतिष शास्त्र में पंचक को पांच नक्षत्रों धनिष्ठा अंतिम चरण, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती का संयोग माना जाता है। इस बार पंचक सोमवार से शुरू हो रहा है, इसलिए इसे राज पंचक कहा जाएगा।

Sat, 14 March 2026 11:44 AMNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
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Panchak 2026: चैत्र नवरात्रि से पहले शुरू होगा पंचक, जानिए इस दौरान क्या करें क्या नहीं

चैत्र नवरात्रि 2026 में 19 मार्च से शुरू हो रही है, लेकिन इससे पहले 16 मार्च शाम से पंचक काल लगने जा रहा है। द्रिक पंचांग के अनुसार यह पंचक 16 मार्च 2026, दिन - सोमवार करीब शाम 6 बजकर 15 मिनट से शुरू होकर 20 मार्च 2026, दिन - शुक्रवार को रात 2 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। खास बात यह है कि नवरात्रि के पहले दो दिन (19 और 20 मार्च) भी इसी पंचक में पड़ेंगे। ज्योतिष शास्त्र में पंचक को पांच नक्षत्रों धनिष्ठा अंतिम चरण, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती का संयोग माना जाता है। इस बार पंचक सोमवार से शुरू हो रहा है, इसलिए इसे राज पंचक कहा जाएगा, जो अन्य पंचकों (मृत्यु पंचक, अग्नि पंचक) की तुलना में कम कष्टदायक माना जाता है। फिर भी शास्त्रों में कुछ कार्यों से परहेज की सलाह दी जाती है। आइए विस्तार से समझते हैं।

पंचक काल की अवधि और राज पंचक का मतलब

पंचक तब लगता है जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि के अंतिम पांच नक्षत्रों से गुजरता है। यह अवधि कुल 5 दिन की होती है। इस बार 16 मार्च शाम से शुरू होने वाला पंचक 20 मार्च रात तक रहेगा। सोमवार से शुरू होने के कारण इसे राज पंचक कहते हैं। ज्योतिषियों के अनुसार, राज पंचक में शुभ कार्यों पर कम प्रतिबंध होता है। सरकारी काम, प्रशासनिक प्रक्रिया या संपत्ति से जुड़े मामलों में मध्यम फल मिल सकता है। हालांकि, सामान्य सावधानियां लागू रहती हैं। चूंकि नवरात्रि भी इसी काल में शुरू हो रही है, इसलिए श्रद्धालुओं को पंचक नियमों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

पंचक में वर्जित कार्य - इन 5 कामों से बचें

धार्मिक परंपराओं और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पंचक काल में कुछ कार्यों से परहेज करना चाहिए, क्योंकि इनका प्रभाव पांच गुना बढ़ सकता है। मुख्य वर्जित कार्य इस प्रकार हैं:

  1. नया निर्माण कार्य शुरू करना या घर की छत डालना।
  2. दक्षिण दिशा की यात्रा करना (यम दिशा होने के कारण)।
  3. लकड़ी, घास, फूस या सूखी सामग्री का संचय करना।
  4. नई चारपाई, पलंग या बेड बनवाना।
  5. शुभ या कीमती वस्तुओं की खरीदारी करना।

इन कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है ताकि जीवन में अनावश्यक बाधाएं न आएं।

पंचक दोष कम करने के सरल उपाय

यदि कोई जरूरी काम पंचक में करना ही पड़े तो शास्त्रों में कुछ उपाय बताए गए हैं। नियमित रूप से भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा करें। चूंकि चैत्र नवरात्रि भी इसी समय शुरू हो रही है, इसलिए मां दुर्गा की आराधना, दुर्गा सप्तशती का पाठ और घर में घी का दीपक जलाना सबसे प्रभावी उपाय है। रामायण या गीता का पाठ भी मानसिक शांति देता है। संयम रखें, सात्विक भोजन करें और दान-पुण्य बढ़ाएं।

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दान और संयम का विशेष महत्व

राज पंचक में दान को बहुत पुण्यदायी माना जाता है। जरूरतमंदों को अनाज, कपड़े, फल या अपनी क्षमता अनुसार धन दान करें। दान से पंचक का नकारात्मक प्रभाव कम होता है और पुण्य बढ़ता है। इस दौरान जीवनशैली में सादगी और संयम रखें। घर को साफ रखें, सकारात्मक सोच अपनाएं और जल्दबाजी में बड़े फैसले ना लें। धैर्य, श्रद्धा और सेवा भाव से व्यक्ति जीवन में संतुलन बनाए रख सकता है।

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नवरात्रि और पंचक का संयोग - विशेष सावधानियां

इस बार चैत्र नवरात्रि के पहले दो दिन पंचक में पड़ रहे हैं। इसलिए कलश स्थापना, घटस्थापना और पूजा करते समय पंचक नियमों का ध्यान रखें। वर्जित कार्यों से बचें और पूजा में मां दुर्गा की आराधना बढ़ाएं। मंत्र जाप, हवन और कन्या पूजन से पंचक का प्रभाव न्यूनतम हो जाता है। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना भी लाभकारी रहेगी।

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पंचक काल में सावधानी और श्रद्धा से कार्य करने पर जीवन में कोई बड़ी बाधा नहीं आती। चैत्र नवरात्रि के साथ यह अवधि आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उपायों का पालन करें तो मां दुर्गा और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहेगी।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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