aaj ka vichar quote of the day acharya Chanakya ke Anmol vichar niti shlok Quote of the day: इन 4 चीजों को नहीं समझने वालों का जीवन है व्यर्थ, पढ़ें आचार्य चाणक्य के अमनोल विचार, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Quote of the day: इन 4 चीजों को नहीं समझने वालों का जीवन है व्यर्थ, पढ़ें आचार्य चाणक्य के अमनोल विचार

quote of the day: आचार्य चाणक्य की कुछ नीतियां हैं, जिनका पालन करने से आप अपने जीवन को महत्वपूर्ण बना सकते हैं। साथ ही ये नीतियां आपको भीड़ से हटकर एक नई पहचान दे सकती है। आज हम आपको चाणक्य के कुछ अनमोल विचार बता रहे हैं, जो आपके जीवन को एक नया दिशा दे सकती है। नीचे पढ़ें आज के विचार...

Sat, 14 March 2026 09:03 AMDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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Quote of the day: इन 4 चीजों को नहीं समझने वालों का जीवन है व्यर्थ, पढ़ें आचार्य चाणक्य के अमनोल विचार

Quote of the day: कहते हैं कि अगर व्यक्ति को सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो वो हर एक चीज आसानी से हासिल कर लेता है। साथ ही उसका जीवन भी सुखमय और कशल बीतता है। ऐसे ही आचार्य चाणक्य की कुछ नीतियां हैं, जिनका पालन करने से आप अपने जीवन को महत्वपूर्ण बना सकते हैं। साथ ही ये नीतियां आपको भीड़ से हटकर एक नई पहचान दे सकती है। आज हम आपको चाणक्य के कुछ अनमोल विचार बता रहे हैं, जो आपके जीवन को एक नया दिशा दे सकती है। नीचे पढ़ें आज के विचार...

इन 4 चीजों के बिना जीवन व्यर्थ

1. धर्मार्थकाममोक्षेषु यस्य नास्ति विनिर्णयः।
जन्मजन्मनि मर्त्यस्य मरणं तस्य केवलम्॥

आचार्य चाणक्य ने अपने इस श्लोक के माध्यम से बताया है कि जिस मनुष्य के जीवन में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की समझ नहीं होती, उसका जीवन व्यर्थ माना जाता है। ऐसा व्यक्ति बार-बार जन्म लेता है और हर जन्म में केवल जन्म और मृत्यु के चक्र में ही घूमता रहता है। यहां धर्म का मतलब है कि सही आचरण, कर्तव्य और नैतिक जीवन जीना। अर्थ का मतलब है कि ईमानदारी से धन और संसाधन अर्जित करना। काम का अर्थ है कि जीवन की उचित इच्छाओं और सुखों की पूर्ति करना। मोक्ष का मतलब है आत्मिक मुक्ति या जन्म-मृत्यु के चक्र से छुटकारा पाना।

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यहां आती हैं मां लक्ष्मी

2. मूर्खाः यत्र न पूज्यन्ते धान्यं यत्र सुसंचितम् ।
दाम्पत्योः कलहो नास्ति तत्र श्री स्वयमागता॥

इस श्लोक का अर्थ है कि जहां मूर्ख लोगों का सम्मान नहीं किया जाता है, जहां अन्न और धन का सही तरीके से संग्रह किया जाता है और जहां पति-पत्नी के बीच झगड़ा नहीं होत, वहां माता लक्ष्मी (सुख-समृद्धि) अपने आप आ जाती हैं।

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कैसा होना चाहिए पुत्र

3. एकेनापि सुपुत्रेण विद्यायुक्तेन साधुना।
आह्लादितं कुलं सर्वं यथा चन्द्रेण शर्वरी॥

इस श्लोक में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि एक गुणवान, विद्वान और सदाचारी पुत्र अकेला ही पूरे परिवार या कुल को उसी तरह खुश और गौरवान्वित कर देता है, जैसे एक चंद्रमा पूरी रात को उजाला और सुंदरता से भर देता है। यदि परिवार में एक ही संतान हो लेकिन वह शिक्षित, संस्कारी और अच्छे आचरण वाला हो, तो वह पूरे कुल का नाम रोशन कर सकता है। जैसे अंधेरी रात में एक चंद्रमा ही पूरे आकाश को प्रकाश से भर देता है, उसी तरह एक अच्छा और गुणवान पुत्र पूरे परिवार को सम्मान और खुशी देता है।

ऐसे व्यक्ति होते हैं सफल

4. अधीत्येदं यथाशास्त्रं नरो जानाति सत्तमः ।
धर्मोपदेशं विख्यातं कार्याऽकार्य शुभाऽशुभम् ।।

इसका अर्थ है कि जो व्यक्ति शास्त्रों के नियमों का निरंतर अभ्यास करके शिक्षा प्राप्त करता है उसे सही, गलत और शुभ कार्यों का ज्ञान हो जाता है। ऐसे व्यक्ति के पास सर्वोत्तम ज्ञान होता है। यानि ऐसे लोग जीवन में अपार सफलता प्राप्त करते हैं। साथ ही ऐसे लोग भ्रम की स्थिति से भी दूर रहते हैं।

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आत्म सुरक्षा के लिए त्याग दें ये चीजें

5.आपदर्थे धनं रक्षेद्दारान् रक्षेध्दनैरपि ।
नआत्मानं सततं रक्षेद्दारैरपि धनैरपि ।।

इस श्लोक के माध्यम से चाणक्य कहते हैं कि मनुष्य को आने वाली मुसीबतों से बचने के लिए धन की बचत करना चाहिए। उसे धन-सम्पदा त्यागकर भी पत्नी की सुरक्षा करनी चाहिए। लेकिन बात यदि आत्मा की सुरक्षा की आ जाए तो उसे धन और पत्नी दोनों को तुक्ष्य समझना चाहिए।

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