navratri mein havan kab aur kaise kiya jata hai know ashtami and navami 2025 hawan shubh muhurat Navratri Hawan: नवरात्रि में हवन कब और कैसे किया जाता है? जानें शुभ मुहूर्त भी, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Navratri Hawan: नवरात्रि में हवन कब और कैसे किया जाता है? जानें शुभ मुहूर्त भी

Navratri: नवरात्रि में हवन का विशेष महत्व है। मान्यता है कि नवरात्रि में हवन करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और उनकी कृपा से परिवार में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। जानें नवरात्रि में हवन कब और कैसे करना चाहिए।

Tue, 23 Sep 2025 10:27 AMSaumya Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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Navratri Hawan: नवरात्रि में हवन कब और कैसे किया जाता है? जानें शुभ मुहूर्त भी

Shardiya Navratri Hawan Vidhi and Shubh Muhurat: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का पर्व अत्यंत शुभ माना गया है। यह पर्व मां दुर्गा को समर्पित है। मान्यता है कि नवरात्रि में मां दुर्गा की विधिवत पूजा-पाठ व व्रत करने से उनकी असीम कृपा मिलती है। नवरात्रि में पूजा-पाठ के दौरान हवन का भी विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यूं तो नवरात्रि के हर दिन हवन किया जा सकता है लेकिन अष्टमी व नवमी तिथि को हवन विशेष लाभकारी माना गया है। जानें नवरात्रि कब करें और क्या है इसकी विधि।

नवरात्रि में हवन कब करें: हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त अष्टमी के दिन नवरात्रि व्रत का पारण करते हैं, वे अष्टमी को हवन कर सकते हैं। कुछ भक्त नवमी के दिन व्रत का पारण करते हैं, उन्हें नवमी के दिन हवन करना चाहिए। इस साल नवरात्रि की अष्टमी तिथइ 30 सितंबर और महानवमी 1 अक्टूबर को मनाई जाएगी। मान्यता है कि हवन व कन्या पूजन के बाद भी नवरात्रि व्रत के पूर्ण फल की प्राप्ति होती है।

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नवरात्रि हवन करने की विधि:

1. सबसे पहले हवन करने वाले स्थान को गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करना चाहिए। इसके बाद उस स्थान पर आटे से रंगोली बनानी चाहिए और इसके ऊपर हवन कुंड रखना चाहिए। हवन कुंड के चारों ओर कलावा बांधें और उसकी पूजा करें।

2. हवन करने से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। हाथ में जल, चावल और फूल लेकर अपनी मनोकामना के साथ हवन करने का संकल्प लें।

3. हवन कुंड में आम की लकड़ी रखें और कपूर की मदद से अग्नि प्रज्वलित करें। अब अग्नि में थोड़ा-सा गाय का घी डालकर इसे स्थिर करें।

4. अब सबसे पहले तीन बार आचमन करें यानी जल पिएं और फिर हाथ में जल लेकर शरीर और सामग्री पर छिड़ककर शुद्धि करें।

5. सबसे पहले गणेश जी का ध्यान करें और "ॐ गणेशाय नमः स्वाहा" मंत्र से आहुति देना चाहिए।

6. अब नवग्रहों और मां भगवती के मंत्रों जैसे "ॐ नवग्रहाय नमः स्वाहा", "ॐ दुर्गाय नमः स्वाहा", "ॐ महाकालिकाय नमः स्वाहा" का उच्चारण करते हुए आहुति दें।

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अष्टमी तिथि को हवन के शुभ मुहूर्त:

ब्रह्म मुहूर्त- 04:37 ए एम से 05:25 ए एम

अभिजित मुहूर्त- 11:47 ए एम से 12:35 पी एम

विजय मुहूर्त- 02:10 पी एम से 02:58 पी एम

नवमी तिथि को हवन के शुभ मुहूर्त:

ब्रह्म मुहूर्त- 04:37 ए एम से 05:26 ए एम

विजय मुहूर्त- 02:09 पी एम से 02:57 पी एम

रवि योग- 08:06 ए एम से 06:15 ए एम, अक्टूबर 02

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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