Navratri: चैत्र नवरात्रि में ऐसे करें कलश स्थापना, जानें संपूर्ण विधि और मंत्र
Navratri me kalash sthapana kaise kare: इस साल नवरात्रि 19 मार्च से शुरू हो रही है। कलश स्थापना चैत्र नवरात्रि के पहले दिन विधि विधान के साथ किया जाता है। आइए जानते हैं चैत्र नवरात्रि के दौरान कलश स्थापना की सम्पूर्ण विधि और मंत्र-

Navratri me kalash sthapana kaise kare: हर साल चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा देवी की आराधना की जाती है। नवरात्रि का पावन पर्व बेहद ही उल्लास और उमंग के साथ मनाया जाता है। इस साल की नवरात्रि का त्योहार 19 मार्च से शुरू हो रहा है। इस साल ग्रहों की स्थिति और विशेष नक्षत्रों का मेल भक्तों के लिए विशेष फलदायक रहने वाला है। इस साल नवरात्रि के दौरान गुरु-पुष्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का अद्भुत संगम बन रहा है। कलश स्थापना चैत्र नवरात्रि के पहले दिन विधि विधान के साथ किया जाता है। आइए जानते हैं चैत्र नवरात्रि के दौरान कलश स्थापना की सम्पूर्ण विधि और मंत्र-
चैत्र नवरात्रि में कलश स्थापना करने से पहले क्या करना चाहिए?
नवरात्रि की पूजा शुरू करने से पहले भगवान श्री गणेश को नमन करें और उनका ध्यान करें। मान्यता है किसी भी शुभ कार्य या पूजा-पाठ की शुरुआत बिना भगवान गणेश जी का ध्यान किए नहीं होती है। ऐसे में नवरात्रि पूजन शुरू करने से पहले भगवान गणेश जी की पूजा करें। प्रभु का जलाभिषेक करें, चंदन और पुष्प अर्पित कर नमन करें।
चैत्र नवरात्रि में ऐसे करें कलश स्थापना, जानें संपूर्ण विधि और मंत्र
सबसे पहले पूजा स्थान की गंगाजल से शुद्धि करें। अब हल्दी से अष्टदल बना लें। कलश स्थापना के लिए मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालकर उसमें जौ के बीज बोएं। अब एक मिट्टी या तांबे के लोटे पर रोली से स्वास्तिक बनाएं। लोटे के ऊपरी हिस्से में मौली बांधें। अब इस लोटे में साफ पानी भरकर उसमें कुछ बूंदें गंगाजल की मिलाएं। अब इस कलश के पानी में सिक्का, हल्दी, सुपारी, अक्षत, पान, फूल और इलायची डालें। फिर पांच प्रकार के पत्ते रखें और कलश को ढक दें। इसके बाद लाल चुनरी में नारियल लपेट कलश के ऊपर रख दें।
कलश स्थापना के लिए क्या-क्या सामाग्री चाहिए?
कलश स्थापना के लिए मिट्टी का पात्र, जौ, मिट्टी, जल से भरा हुआ कलश, मौली, इलायची, लौंग, कपूर, रोली, साबुत सुपारी, साबुत चावल, सिक्के, अशोक या आम के पांच पत्ते, नारियल, चुनरी, सिंदूर, फल-फूल, फूलों की माला और शृंगार पिटारी भी चाहिए।
कलश स्थापना की पूजा के समय कौन सा मंत्र पढ़ना चाहिए?
ॐ कलशस्य मुखे विष्णुः कण्ठे रुद्रः समाश्रितः, मूले त्वस्य स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणाः स्मृताः
ॐ कलशस्य मुखे विष्णुः कण्ठे रुद्रः समाश्रितः,
मूले त्वस्य स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणाः स्मृताः।
कुक्षौ तु सागराः सर्वे सप्तद्वीपा वसुन्धरा,
ऋग्वेदोऽथ यजुर्वेदः सामवेदो ह्यथर्वणः।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




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