Navratri Day 6: On sixth day of Shardiya Navratri 6th Day 2025 Muhurta Maa Katyayani Pooja time pooja vidhi mantra Navratri 6th Day: नवरात्रि के छठे दिन इस मुहूर्त में करें मां कात्यायनी की पूजा, जानें मंत्र, कथा, भोग, आरती, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Navratri 6th Day: नवरात्रि के छठे दिन इस मुहूर्त में करें मां कात्यायनी की पूजा, जानें मंत्र, कथा, भोग, आरती

Navratri 6th Day, Maa Katyayani Pooja: नवरात्रि की षष्ठी तिथि के दिन मां कात्यायनी की पूजा करने का विधान है। मान्यता है कि अगर भक्त विधि-विधान से माता की पूजा करें तो उनके विवाह में आ रही अड़चनें खत्म हो जाती हैं।

Sat, 27 Sep 2025 02:07 PMShrishti Chaubey लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Navratri 6th Day: नवरात्रि के छठे दिन इस मुहूर्त में करें मां कात्यायनी की पूजा, जानें मंत्र, कथा, भोग, आरती

Navratri Day 6, Maa Katyayani Pooja: नवरात्रि की षष्ठी तिथि के दिन मां कात्यायनी की पूजा करने का विधान है। मां कात्यायनी की सवारी सिंह यानी शेर है। माता की चार भुजाएं हैं और उनके सिर पर हमेशा मुकुट सुशोभित रहता है। दो भुजाओं में कमल और तलवार धारण करती हैं। मां एक भुजा वर मुद्रा और दूसरी भुजा अभय मुद्रा में रहती है। मान्यता है कि अगर भक्त विधि-विधान से माता की पूजा करें तो उनके विवाह में आ रही अड़चनें खत्म हो जाती हैं।

इस मुहूर्त में करें मां कात्यायनी की पूजा

ब्रह्म मुहूर्त- 04:36 ए एम से 05:24 ए एम

अभिजित मुहूर्त- 11:48 ए एम से 12:35 पी एम

विजय मुहूर्त- 02:11 पी एम से 02:59 पी एम

गोधूलि मुहूर्त- 06:10 पी एम से 06:35 पी एम

अमृत काल- 06:05 पी एम से 07:53 पी एम

सर्वार्थ सिद्धि योग- 03:55 ए एम, सितम्बर 29 से 06:13 ए एम, सितम्बर 29

प्रिय भोग-मां कात्यायनी को शहद का भोग प्रिय है। ऐसे में पूजा के समय मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से भक्त का व्यक्तित्व निखरता है।

मां कात्यायनीमंत्र

ॐ देवी कात्यायन्यै नम:॥

मां कात्यायनी का प्रिय पुष्प व रंग: मां कात्यायनी को लाल रंग प्रिय है। इस दिन लाल रंग के गुड़हल या गुलाब केफूल मां भगवती को अर्पित करनाशुभ रहेगा। मान्यता है कि ऐसा करने से मां भगवती की कृपा बरसतीहै।

स्तुति मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

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कवच मंत्र

कात्यायनौमुख पातु कां स्वाहास्वरूपिणी।

ललाटे विजया पातु मालिनी नित्य सुन्दरी॥

कल्याणी हृदयम् पातु जया भगमालिनी॥

पूजा-विधि

1- सुबह स्नान और मंदिर साफ करें

2- दुर्गा माता का गंगाजल से अभिषेक करें।

3- मैया को अक्षत, लाल चंदन, चुनरी, सिंदूर, पीलेऔर लाल पुष्प अर्पित करें।

4- सभी देवी-देवताओं का जलाभिषेक कर फल, फूल और तिलक लगाएं।

5- प्रसाद के रूप में फल और मिठाई चढ़ाएं।

6- घर के मंदिर में धूपबत्ती और घी का दीपक जलाएं

7- दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ करें

8 - फिर पान के पत्ते पर कपूर और लौंग रख माता की आरती करें।

9 - अंत में क्षमा प्रार्थना करें।

मां कात्यायनीकी कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, ऋषि कात्यायन देवी मां के परम उपासक थे। एक दिन मां दुर्गा ने इनकी तपस्या से प्रसन्न होकर इनके घर पुत्री के रुप में जन्म लेने का वरदान दिया। ऋषि कात्यायन की पुत्री होने के कारण ही देवी मां को मां कात्यायनी कहा जाता है। मान्यता है कि मां कात्यायनी की उपासना से इंसान अपनी इंद्रियों को वश में कर सकता है। मां कात्यायनी ने ही महिषासुर का वध किया था। इसलिए ही मां कात्यायनी को महिषासुर मर्दनी भी कहा जाता है। इसके अलावा माता रानी को दानव और असुरों का विनाश करने वाली देवी कहते हैं।

मां कात्यायनी की आरती

जय-जय अम्बे जय कात्यायनी

जय जगमाता जग की महारानी

बैजनाथ स्थान तुम्हारा

वहा वरदाती नाम पुकारा

कई नाम है कई धाम है

यह स्थान भी तो सुखधाम है

हर मंदिर में ज्योत तुम्हारी

कही योगेश्वरी महिमा न्यारी

हर जगह उत्सव होते रहते

हर मंदिर में भगत हैं कहते

कत्यानी रक्षक काया की

ग्रंथि काटे मोह माया की

झूठे मोह से छुडाने वाली

अपना नाम जपाने वाली

बृहस्‍पतिवार को पूजा करिए

ध्यान कात्यायनी का धरिए

हर संकट को दूर करेगी

भंडारे भरपूर करेगी

जो भी मां को 'चमन' पुकारे

कात्यायनी सब कष्ट निवारे।।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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