Navratri Day 5: नवरात्रि का पांचवा दिन कल, इस मुहूर्त में करें मां स्कंदमाता की पूजा, पढ़ें मंत्र, कवच, स्तुति व आरती
Chaitra Navratri Day 5 Navratri 5th day : चैत्र नवरात्रि के पांचवे दिन मां स्कंदमाता की उपासना की जाती है। मां दुर्गा का पांचवा स्वरूप हैं मां स्कंदमाता देवी। देवी स्कंदमाता शेर की सवारी करती हैं, जिनकी गोद में बालक कार्तिकेय विराजमान हैं।

Navratri Day 5 Chaitra Navratri 5th day, नवरात्रि का पांचवा दिन: 23 मार्च को चैत्र नवरात्रि का पांचवा दिन पड़ रहा है। चैत्र पक्ष के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन नवरात्रि का पांचवा दिन पड़ रहा है। नवरात्रि के पांचवे दिन स्कंदमाता की पूजा करने का विधान है। देवी स्कंदमाता को देवी पद्मासना के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्कंदमाता की पूजा करने से विद्या, मोक्ष और बल की प्राप्ति होती है। देवी स्कंदमाता शेर की सवारी करती हैं, जिनकी गोद में बालक कार्तिकेय विराजमान हैं। देवी स्कंदमाता को चतुर्भुज रूप में दर्शाया है, जो अपनी ऊपरी दोनों भुजाओं में कमल पुष्प धारण करती हैं। माता कमल के पुष्प पर विराजमान रहती हैं। माता अपने दाहिने हाथ में से एक में भगवान कार्तिकेय को लिये हुये हैं तथा दूसरे दाहिने हाथ को अभय मुद्रा में रखती हैं। आइए जानते हैं चैत्र नवरात्रि के पांचवे दिन का मुहूर्त, मंत्र, स्तुति, कवच, स्तोत्रम और आरती-
नवरात्रि का पांचवा दिन कल, इस मुहूर्त में करें मां स्कंदमाता की पूजा, पढ़ें मंत्र, कवच, स्तुति व आरती
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:47 बजे से सुबह 05:35 बजे तक
- प्रातः सन्ध्या: सुबह 05:11 बजे से सुबह 06:22 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:03 बजे से दोपहर 12:52 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:30 बजे से दोपहर 03:19 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:33 बजे से शाम 06:56 बजे तक
- सायाह्न सन्ध्या: शाम 06:34 से शाम 07:45 बजे
- अमृत काल: शाम 06:37 से शाम 08:05 बजे
- निशिता मुहूर्त: रात 12:04, मार्च 24 से रात 12:51, मार्च 24
- सर्वार्थ सिद्धि योग: 08:49 शाम से 06:21 सुबह, मार्च 24
- रवि योग: 08:49 शाम से 06:21 सुबह, मार्च 24
मां स्कंदमाता का मंत्र
ॐ देवी स्कन्दमात्रे नमः॥
श्री स्कंदमाता की स्तुति
या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
स्तोत्रम
नमामि स्कन्दमाता स्कन्दधारिणीम्।
समग्रतत्वसागरम् पारपारगहराम्॥
शिवाप्रभा समुज्वलां स्फुच्छशागशेखराम्।
ललाटरत्नभास्करां जगत्प्रदीप्ति भास्कराम्॥
महेन्द्रकश्यपार्चितां सनत्कुमार संस्तुताम्।
सुरासुरेन्द्रवन्दिता यथार्थनिर्मलाद्भुताम्॥
अतर्क्यरोचिरूविजां विकार दोषवर्जिताम्।
मुमुक्षुभिर्विचिन्तितां विशेषतत्वमुचिताम्॥
नानालङ्कार भूषिताम् मृगेन्द्रवाहनाग्रजाम्।
सुशुध्दतत्वतोषणां त्रिवेदमार भूषणाम्॥
सुधार्मिकौपकारिणी सुरेन्द्र वैरिघातिनीम्।
शुभां पुष्पमालिनीं सुवर्णकल्पशाखिनीम्
तमोऽन्धकारयामिनीं शिवस्वभावकामिनीम्।
सहस्रसूर्यराजिकां धनज्जयोग्रकारिकाम्॥
सुशुध्द काल कन्दला सुभृडवृन्दमज्जुलाम्।
प्रजायिनी प्रजावति नमामि मातरम् सतीम्॥
स्वकर्मकारणे गतिं हरिप्रयाच पार्वतीम्।
अनन्तशक्ति कान्तिदां यशोअर्थभुक्तिमुक्तिदाम्॥
पुनः पुनर्जगद्धितां नमाम्यहम् सुरार्चिताम्।
जयेश्वरि त्रिलोचने प्रसीद देवी पाहिमाम्॥
कवच
ऐं बीजालिंका देवी पदयुग्मधरापरा।
हृदयम् पातु सा देवी कार्तिकेययुता॥
श्री ह्रीं हुं ऐं देवी पर्वस्या पातु सर्वदा।
सर्वाङ्ग में सदा पातु स्कन्दमाता पुत्रप्रदा॥
वाणवाणामृते हुं फट् बीज समन्विता।
उत्तरस्या तथाग्ने च वारुणे नैॠतेअवतु॥
इन्द्राणी भैरवी चैवासिताङ्गी च संहारिणी।
सर्वदा पातु मां देवी चान्यान्यासु हि दिक्षु वै॥
मां स्कंदमाता की आरती
जय तेरी हो स्कन्द माता।
पांचवां नाम तुम्हारा आता॥
सबके मन की जानन हारी।
जग जननी सबकी महतारी॥
तेरी जोत जलाता रहूं मैं।
हरदम तुझे ध्याता रहूं मै॥
कई नामों से तुझे पुकारा।
मुझे एक है तेरा सहारा॥
कही पहाड़ों पर है डेरा।
कई शहरों में तेरा बसेरा॥
हर मन्दिर में तेरे नजारे।
गुण गाये तेरे भक्त प्यारे॥
भक्ति अपनी मुझे दिला दो।
शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो॥
इन्द्र आदि देवता मिल सारे।
करे पुकार तुम्हारे द्वारे॥
दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आये।
तू ही खण्ड हाथ उठाये॥
दासों को सदा बचाने आयी।
भक्त की आस पुजाने आयी॥
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




साइन इन