सावन में नाग पंचमी कब? जानें डेट व महत्व
nag panchami 2025 date and time: इस साल नागपंचमी शिव योग में मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नागपंचमी पर व्रत रखकर रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय व जलाभिषेक करने पर शिव प्रसन्न होकर मनोवांछित फल प्रदान करते हैं।
सावन में नाग पंचमी कब? जानें डेट: हर साल श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस साल नागपंचमी शिव योग में मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, नागपंचमी का पर्व 29 जुलाई को मनाया जाएगा। नागपंचमी पर व्रत रखकर रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय व जलाभिषेक करने पर शिव प्रसन्न होकर मनोवांछित फल प्रदान करते हैं। श्रावण कृष्ण पक्ष 14 दिनों का है। त्रयोदशी तिथि क्षय का रहेगा। दूसरा शुक्ल पक्ष 16 दिनों का होगा। इसमें अष्टमी तिथि की वृद्धि हो रही है। 28 जुलाई को चंद्रमा पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में होंगे। सिंह राशि में चंद्रमा के होने से धन योग बनेगा। वृद्ध चतुर्थी का भी संयोग है। अंतिम सोमवार चार अगस्त को सर्वार्थ सिद्धि योग, ब्रह्म और इंद्र योग रहेगा। चंद्रमा अनुराधा नक्षत्र और चित्रा नक्षत्र से वृश्चिक राशि पर संचार करेंगे। सावन में सात सर्वार्थ सिद्धि और एक अमृत सिद्धि योग बन रहे हैं। सावन के समापन पर नौ अगस्त को बुद्धादित्य योग के साथ श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को होगा। इस मास के फलदायी होने से अनुष्ठान, नए कार्य, संकल्प, रजिस्ट्रेशन, संपत्ति क्रय-विक्रय और उद्योग स्थापना जैसे कार्य करना लाभकारी रहेंगे।
नाग पंचमी का महत्त्व: शास्त्रों के अनुसार पंचमी तिथि के देव सर्प यानी नाग देव है। इसलिए प्रत्येक माह की पंचमी तिथि को नाग देवता या सर्प दोष की पूजा की जाती है। श्रावण माह की प्रत्येक तिथि को श्रेष्ठ माना जाता है। इसी कारण से श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। नाग देवता सदा भगवान भोलेनाथ के गले में विद्यमान रहते हैं। दत्तात्रेय के 24वें गुरु नाग देवता ही हैं। नाग पंचमी के दिन इनकी पूजा विशेष रुप से की जाती है एवं प्रत्येक वर्ष पूर्ण श्रद्धा व विश्वास के साथ यह पवित्र पर्व मनाया जाता है | इस दिन नागों की सुरक्षा करने का भी संकल्प लिया जाता है।
नागों के पूजन की परम्परा हमारे यहां प्राचीन काल से चली आ रही है, जिसका प्रमाण इतिहास की सबसे प्राचीन सभ्यताों में भी मिलता है, जिसमें मोहनजोदडों, हडप्पा और सिंधु सभ्यता शामिल हैं। वहीं, इन प्राचीन सभ्यताओं के अलावा मिस्त्र की सभ्यता में भी नाग-नागिन की पूजा का जिक्र मिलता है। यहां आज भी नाग पूजा को मान्यता प्राप्त है। मिश्र में शेख हरेदी नामक पर्व मनाया जाता है, जो सर्प पूजा से जुडा हुआ पर्व है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




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