Krishna Janmashtami Date Time Pooja Muhurat What not to do on the day of Janmashtami 2025 Janmashtami 2025: जन्माष्टमी पूजा का उत्तम मुहूर्त कब से होगा शुरू, पूजा के समय न करें ये गलतियां, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Janmashtami 2025: जन्माष्टमी पूजा का उत्तम मुहूर्त कब से होगा शुरू, पूजा के समय न करें ये गलतियां

Krishna Janmashtami Date Time: इस साल 16 अगस्त के दिन श्रीकृष्ण का 5252वां जन्मोत्सव बड़े धूम-धाम के साथ मनाया जाएगा। गौर फरमाने वाली बात है कि इस बार अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं मिल पा रहा है।

Thu, 14 Aug 2025 06:52 PMShrishti Chaubey लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Janmashtami 2025: जन्माष्टमी पूजा का उत्तम मुहूर्त कब से होगा शुरू, पूजा के समय न करें ये गलतियां

Krishna Janmashtami Date: कृष्ण जन्माष्टमी को श्रीकृष्ण जयन्ती, गोकुलाष्टमी, श्री जयन्ती, अष्टमी रोहिणी और कृष्णाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। इस साल 16 अगस्त के दिन श्रीकृष्ण का 5252वां जन्मोत्सव बड़े धूम-धाम के साथ मनाया जाएगा। इस दिन कई शुभ योगों का संयोग बन रहा है। गौर फरमाने वाली बात है कि इस बार अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं मिल पा रहा है। शास्त्रों के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि व रोहिणी नक्षत्र के संयोग में मध्य रात्रि के समय भगवान श्रीकृष्ण का अवतरण हुआ था। ऐसे में आइए जानते हैं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पूजन के उत्तम मुहूर्त व पूजा के समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी रहेगा।

ज्योतिष शास्त्र व पंचांग के अनुसार, 16 अगस्त के दिन ज्वालामुखी योग, वृद्धि और घ्रुव योग का निर्माण हो रहा है। इस दिन भरणी नक्षत्र सुबह 6:06 तक रहेगा, जिसके बाद कृत्तिका नक्षत्र रहेगा। कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि शुक्रवार रात 11:49 से शुरु होगी। समापन शनिवार की रात 9:34 होगा। उदया तिथि के अनुसार, जन्माष्टमी 16 अगस्त को मनाएंगे।

ग्रहों की स्थिति शुभ: इस दिन चंद्रमा मेष राशि में 11:43 ए एम तक, फिर वृषभ राशि में रहेंगे। कर्क राशि में बुध और मंगल कन्या राशि में होने से 60 डिग्री का संयोग बन रहा है, इसे त्रिएकादश योग कहते हैं। लाभ दृष्टि योग का भी निर्माण हो रहा है। साथ ही सूर्य सिंह राशि में रहेंगे।

जन्माष्टमी पर पूजा का उत्तम मुहूर्त कब से होगा शुरू

जन्माष्टमी पर श्री कृष्ण पूजा निशीथ समय पर की जाती है। वैदिक समय गणना के अनुसार, निशीथ मध्यरात्रि का समय होता है। निशीत काल में भक्त लोग श्री बालकृष्ण की पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं।

  • श्री कृष्ण जन्म पूजन मुहूर्त: 16 अगस्त निशिता पूजा का समय- रात 12:04 से रात 12:45 तक उत्तम मुहूर्त रहेगा।
  • रोहणी नक्षत्र प्रारंभ: 17 अगस्त की सुबह 4:38 पर होगा।
  • अष्टमी तिथि प्रारम्भ: अगस्त 15, 2025 को 11:49 पी एम, अष्टमी तिथि समाप्त: अगस्त 16, 2025 को 09:34 पी एम
  • मध्यरात्रि का क्षण: 12:25 ए एम, अगस्त 17
  • चन्द्रोदय समय: 11:32 पी एम

पूजा के समय न करें ये गलतियां

  1. लड्डू गोपाल को भोग बिना तुलसी की पत्तियों के न लगाएं।
  2. राहुकाल के समय जन्माष्टमी व्रत का संकल्प लेने से बचें। व्रत संकल्प प्रातः काल के समय शुभ मुहूर्त या ब्रह्म मुहूर्त में लेना शुभ रहेगा।
  3. जन्माष्टमी के दिन भूलकर भी मास-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। इस खास मौके पर तामसिक भोजन का सेवन करने से कन्हा जी नाराज हो सकते हैं।
  4. जन्माष्टमी के व्रत के दौरान किसी भी प्रकार के अन्न का ग्रहण न करें।
  5. भोग बनाने में लहसुन या प्याज का इस्तेमाल न करें।
  6. धर्मिक मान्यताओं के अनुसार, जन्माष्टमी पूजा के समय काले रंग के कपड़े पहनने से बचें। भगवान कृष्ण की कृपा पाने के लिए इस दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ रहेगा।
  7. जन्माष्टमी का पारण सूर्योदय के पश्चात अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के समाप्त होने के बाद किया जाना चाहिये।
  8. जन्माष्टमी पर किसी का दिल न दुखाएं और वाद-विवाद से भी बचें। किसी का भी अपमान करने से बचें और न ही किसी का मजाक उड़ाएं।
  9. अगर अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में से कोई भी सूर्यास्त तक समाप्त नहीं होता, तब जन्माष्टमी का व्रत दिन के समय नहीं तोड़ा जा सकता। ऐसी स्थिति में व्रती को किसी एक के समाप्त होने के बाद ही व्रत तोड़ना चाहिये।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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