Krishna Janmashtami Timing tradition of cutting cucumber Pooja Janmashtami 2025 Muhurat जन्माष्टमी पर क्यों निभाई जाती है खीरा काटने की परंपरा, जानें पूजन का उत्तम मुहूर्त, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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जन्माष्टमी पर क्यों निभाई जाती है खीरा काटने की परंपरा, जानें पूजन का उत्तम मुहूर्त

Krishna Janmashtami Timing Muhurat: उदय कालीन तिथि के महत्व के आधार पर, कृष्ण जन्माष्टमी शनिवार को 16 अगस्त को मनायी जाएगी। जन्माष्टमी के मौके पर खीरा काटने की परंपरा निभाई जाती है। आइए जानते हैं क्यों-

Wed, 13 Aug 2025 10:32 PMShrishti Chaubey लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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जन्माष्टमी पर क्यों निभाई जाती है खीरा काटने की परंपरा, जानें पूजन का उत्तम मुहूर्त

Krishna Janmashtami Timing: श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत सभी के लिए विशेष है। इस बार रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि का संयोग एक साथ नहीं बन रहा है। द्वापर युग में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग में मध्य रात्रि के समय भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य हुआ था। इसी कारण हर साल इस दिन को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, 15 अगस्त को अष्टमी तिथि अल्प समय के लिए रहेगी। जबकि 16 अगस्त को यह सूर्योदय से पूरे दिन रहेगी। उदय कालीन तिथि के महत्व के आधार पर, जन्माष्टमी शनिवार, 16 अगस्त को मनायी जाएगी। इस दिन सुबह वृद्धि योग के बाद ध्रुव योग का संयोग रहेगा। शनिवार की सुबह से रविवार की भोर तक कृतिका नक्षत्र और उसके बाद रोहिणी नक्षत्र होगा।

जन्माष्टमी पर क्यों निभाई जाती है खीरा काटने की परंपरा

जन्माष्टमी के मौके पर खीरा काटना भगवान कृष्ण के जन्म का प्रतीक है। आधी रात को, जब भगवान कृष्ण का जन्म होता है, तब खीरा काटकर, उसके बीज निकालकर, उसे नाभि छेदन (नाल काटना) की प्रतीकात्मक क्रिया के रूप में मनाया जाता है। खीरे का डंठल गर्भनाल का प्रतीक माना जाता है और इसे काटकर, भगवान कृष्ण को माता देवकी के गर्भ से अलग करने की रस्म निभाई जाती है। इस रस्म के पीछे मान्यता है कि जिस प्रकार जन्म के समय बच्चे को मां से अलग करने के लिए गर्भनाल को काटा जाता है, उसी प्रकार खीरे को काटकर भगवान कृष्ण का जन्म मनाया जाता है।

जानें पूजन का उत्तम मुहूर्त

  1. जन्माष्टमी तिथि: 16 अगस्त, 2025
  2. अष्टमी तिथि: 15 अगस्त रात 11:49 बजे से 16 अगस्त रात 09:34 बजे तक
  3. पूजा मुहूर्त: 16 अगस्त की रात 12:04 बजे से 12:47 बजे तक
  4. रोहिणी नक्षत्र: 17 अगस्त को सुबह 04:38 बजे शुरू होगा
  5. व्रत पारण का समय: 17 अगस्त को सुबह 09:24 बजे के बाद

उपाय- घर में कान्हा की पुरानी मूर्ति हो, तो उनकी पूजा कर माखन-मिश्री का भोग लगाना शुभ माना जाता है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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