Kamada Ekadashi Vrat Katha in hindi read here lalit lalita Kamada Ekadashi Vrat Katha Kahani Kamada Ekadashi Vrat Katha in hindi: आज पढ़े कामदा एकादशी व्रत कथा, ललिता ने एकादशी व्रत पुण्य ललित को दिया, दूर हुआ पाप, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
More

Kamada Ekadashi Vrat Katha in hindi: आज पढ़े कामदा एकादशी व्रत कथा, ललिता ने एकादशी व्रत पुण्य ललित को दिया, दूर हुआ पाप

Kamada Ekadashi Vrat Katha Kahani: ऋषि ने कामदा एकादशी का व्रत का प्रताप बताया और ललिता से इस व्रत को करने को कहा। ललिता ने ऋषि के बताए अनुसार शुक्ल पक्ष की कामदा एकादशी का व्रत रखा

Sun, 29 March 2026 09:20 AMAnuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान
share
Kamada Ekadashi Vrat Katha in hindi: आज पढ़े कामदा एकादशी व्रत कथा, ललिता ने एकादशी व्रत पुण्य ललित को दिया, दूर हुआ पाप

चैत्र शुक्लपक्ष में कामदा एकादशी का व्रत किया जाता है। इसका महत्व भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठर को सुनाया था। चैत्र नवरात्रि के बाद यह एकादशी मनाई जाती है। इस साल एकादशी का व्रत 29 मार्च को रखा जाएगा। ऐसा कहा जाता है कि जो इस एकादशी का व्रत करता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। यह एकादशी बहुत पुण्यमयी है। पापरूपी ईंधनके लिये तो वह दावांनल ही है। कथा इस प्रकार है-

कामदा एकादशी व्रत कथा

इस एकादशी की पौराणिक कथाभगवान राम के पूर्वज राजा दिलीप ने भी गुरु वशिष्ठ से सुनी था। कथा के अनुसार प्राचीनकाल में पुंडरीक नाम का एक राजा राज्य करता था। वह भोंगीपुर नगर में रहता है। राजा प्रजा के लिए कोई काम नहीं करता था और किसी भी तरह प्रजा का ध्यान नहीं रखता था। हर वक्त भोग-विलास में डूबा रहता। उसके ही राज्य में एक पति-पत्नी रहते थे जिनका नाम ललित और ललिता था, दोनों आपस में सच्चा प्यार करते थे।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:कामदा एकादशी पर इतने बजे से रहेगा पूजा और व्रत पारण का मुहूर्त, जानें पारण विधि
ये भी पढ़ें:Kamada Ekadashi 2026: कामदा एकादशी पर करें ये उपाय, भगवान विष्णु होंगे प्रसन्न

ललित राजा के यहां संगीत सुनाता था, एक दिन राजा की सभा में ललित संगीत सुना रहा था कि तभी उसका ध्यान अपनी पत्नी की ओर चला गया और उसका स्वर बिगड़ गया। इसे देखकरराजा पुंडरीक का क्रोध सातवें आसमान पर पहुंच गया। राजा इतना क्रोधित हुआ कि उसने क्रोध में आकर ललित को राक्षस बनने का श्राप दे दिया। राजा के श्राप से ललित मांस खाने वाला राक्षस बन गया। अपने पति का हाल देख ललिता बहुत दुखी हुई। पति को ठीक करने के लिए हर किसी से उपाय पूछती रही। ललिता का पति भयंकर मुख वाला, विकराल आंखें और देखने मात्र से डरा देने वाला ग रहा था। ललिता अपने पतिकी विकराल आकृति देख मन-ही-मन बहुत चिन्तित हुई। भारी दुःख से कष्ट पाने लगी। वह रोती हुई घने जंगलों में पति के पीछे-पीछे घूमने लगी । वन में उसे एक सुन्दर आश्रम दिखा। ललिता शीघ्रताके साथ वहां गयी और मुनि को प्रणाम करके उनके सामने खड़ी हुई मुनि बड़े दयालु थे। उस दुःखिनी को देखकर वे इस प्रकार बोले-तुम कौन हो ? कहां से यहां आयी हो ? ललिता ने कहा- मेरा नाम ललिता है। मेरे स्वामी अपने पाप-दोष के कारण राक्षस हो गये हैं। उनकी यह अवस्था देखकर मुझे चैन नहीं है। इस समय मेरा जो कर्तव्य हो, वह बताइए। जिस पुण्यके द्वारा मेरे पति राक्षसभावसे छुटकारा पा जाए उसका उपदेश कीजिए।

ऋषि बोले, इस समय चैत्र मास के शुक्लपक्ष की कामदा नामक एकादशी तिथि है, जो सब पापों को हरने वाली है। इस ब्रत का जो पुण्य हो, उसे अपने स्वामी को दे डालो। पुण्य देनेपर क्षणभर में ही उसके शाप का दोष दूर हो जाएगा। मुनि का यह वचन सुनकर ललिता को बड़ा हर्ष हुआ। उसने एकादशी को उपवास करके द्वादशीके दिन उन ब्रह्मर्षि के समीप ही भगवान्‌ वासुदेव से अपने पति के उद्धार के लिये यह वचन कहा, मैंने जो यह कामदा एकादशीका ब्रत किया है, उसके पुण्यके प्रभाव से मेरे पतिका राक्षस-भाव दूर हो जाए।

वसिष्ठ जी बताया कि ललिता के इतना कहते ही ललित का पाप दूर हो गया। अब उसको अच्छा रूप मिल गया। उसका राक्षस रूप चला गया इसके बाद ललिता भी राक्षस यौनि से बाहर आ गई । वे दोनों पति-पत्नी कामदा के प्रभाव से पहले की अपेक्षा भी अधिक सुन्दर हो गए। सभी को एकादशी के ब्रत का पालन करना चाहिए। कामदा एकादशी ब्रह्महत्या आदि पापों और पिशाचत्व आदि दोषों का भी नाश करने वाली है। इसके पढ़ने ओर सुननेसे वाजपेय यज्ञका फल मिलता है।

जानें लेटेस्ट Dharm News, Aaj ka Rashifal और सटीक Panchang की जानकारी। अपनी डेली पूजा के लिए यहाँ पढ़ें Shiv Chalisa, Hanuman Chalisa और Bajrang Baanहिंदू कैलेंडर 2026 की शुभ तिथियों के साथ अपने हर दिन को खास बनाएं!