क्या आप पर कालसर्प योग का असर है, राहु की महादशा में अनिष्टकारी होता है कालसर्प योग, शांति कहां कराएं
अगर आपकी कुंडली में यह योग बन रहा है, तो परिवारके अन्य सदस्यों की कुंडली में भी यह योग देखनेको मिलेगा, राहु की महादशा में इस योग के अनिष्टकारी परिणाम मिलते हैं। यहां पढ़ें लक्षण, शांति कहां कराएं

कालसर्प का निर्धारण कुंडली में राहु और केतु की स्थिति और दूसरे ग्रहों को बलशाली होने की स्थिति को देखकर किया जाता है। कई बार यह अच्छा भी होता है और कई बार परेशान करने वाली भी होता है। इसके कई प्रकार होते हैं, लेकिन कालसर्प योग है, इसको लेकर आपको अच्छे से निर्धारण करवाना चाहिए। इसकी कई परिस्थितियां हैं, इसलिए बारीकी से देखना बहुत जरूरी है। आपको बता दें कि कालसर्प योग से डरने की भी जरूरत नहीं है। कालसर्प हमेशा कष्टकारक ही नहीं होता है, कई बार यह आपके लिए लाभकारी होता है। कई बार यह व्यक्तिको विश्वस्तरपर न केबल प्रसिद्ध बनाते हैं अपितु सम्पत्ति, वैभव, नाम, प्रसिद्धि देनेवाले भी बन जाते हैं। यहां हम आपको बताएंगे कि इसके कुछ लक्षण और कहां इसको शांत कराना चाहिए।
क्या है कालसर्प योग और क्या हैं इसके लक्षण
अगर आपकी कुंडली में यह योग बन रहा है, तो आपको यह समझना होगा कि परिवारके अन्य सदस्यों की कुंडली में भी यह योग देखनेको मिलेगा। क्योंकि यह ऋण है, जो हमें पूर्वजोंसे मिलता है एवं इससे परिवारके सभी सदस्य किसी-न-किसी रूप में प्रभावित होते हैं । एक तरह से इसे पितृदोषका नाम दिया जाता है। कालसर्पयोगसे जो जातक प्रभावित होते हैं, उन्हें अधिकतर सपने में सांप दिखायी देते हैं। आप बहुत मेहनत करते हैं, लेकिन आपको इसके बाद भी सफलता प्राप्त नहीं होती। मानसिक तौर पर तनाव रहता है, जिसके कारण सही फैसले नहीं ले पाते हैं। पारिवारिक जीवन कलहपूर्ण हो जाता है। शादी में देरी, संतान में देरी और शादी से तलाक की स्थिति भी बन जाती है।
कब सबसे ज्यादा दिक्कत देता है कालसर्प योग
कालसर्प योग के कारण आपको परेशानी कम होती है, लेकिन इन मामलों में आपको कालसर्प अधिक परेशान करेगा और आपके लिए अनिष्टकारी समय बन जाएगा। इसलिए अगर इनमें से कोईभी स्थिति है, तो आपको कालसर्प योग के बारे में पता करना होगा। इस समय शारीरिक, मानसिक, पारिवारिक, आर्थिक, सामाजिक, व्यावसायिक इत्यादि क्षेत्रमें कठिनाईका सामना करना पड़ता है।
1.राहु को महादशा
2.राहुकी प्रत्यन्तर दशामें
3. शनि, सूर्य तथा मंगलको अन्तर्दशा में
4. जीवनके मध्यकाल में
5.ग्रह-गोचरमें कुण्डलीमें जब-जब कालसर्पयोग बनता हो
कालसर्पयोग शान्ति के कुछ स्थान
त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग, नासिक
त्रिवेणीसंगम, इलाहाबाद
त्रियुगी नारायण मन्दिर, केदारनाथ
भूतेश्वर महादेवमन्दिर नीमतल्लाघाट, कलकत्ता
महाकालमन्दिर, उज्जैन




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