2027 में शनि गोचर कुंभ राशि को शनि साढ़ेसाती से मिलेगा छुटकारा, वृषभ पर रहेगा शनि का पहरा, शनिदेव की कृपा कैसे मिलेगी?
2027 में शनि गोचर मेष राशि में होगा और कई बदलाव लाएगा। एक तरफ जहां कुंभ राशि को शनि साढ़ेसाती से छुटकारा मिलेगा, वहीं वृषभ पर रहेगा शनि का पहरा रहेगा, ऐसे में क्या दिक्कतें आएंगी और क्या समाधान हैं यहां पढ़ें

शनि देव को न्यायाधीश कहा जाता है। शनि 2027 में राशि परिवर्तन कर रहे हैं। शनि मेष राशि में जाएगें। शनि के राशि बदलने से शनि की साढ़ेसाती का पूरा समीकरण बदलेगा। साल 2027 में कुंभ राशि से शनि की साढ़ेसाती खत्म होगी और एक नई राशि पर शनि की साढ़ेसाती शुरू हो जाएगी। इससे कई राशियों के लिए बदलाव आएंगे, लेकिन जिस राशि पर शनि की साढ़ेसाती शुरू होगी, उसके इसके पहले, दूसरे और तीसरे चरण में प्रभाव झेलने होंगे। हर चरण ढ़ाई साल का होता है। यहां हम आपको बताएंगे कि किस राशि पर साल 2027 में शनि की साढ़ेसाती शुरू होगी और इसके विभिन्न चरणों में इस पर क्या प्रभाव होगें और इनको इसके लिए क्या उपाय करने चाहिए।
कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती साल 2027 में खत्म होगी
आपको बता दें कि शनि की साढ़ेसाती कुंभ राशि से साल 2027 में खत्म हो जाएगी। इस राशि के पर साढ़ेसाती का तीसरा चरण चल रहा है। ऐसा कहा जाता है कि इस राशि पर साढ़ेसाती के तीसरे चरण में खर्च अधिक हो जाता है और पैसा भी आता है, लेकिन आपका पैसा जल्द से जल्द खत्म भी हो जाता है। व्यक्ति की हेल्थ पर असर होता है। आपकी किसी से कहा सुनी हो सकती है। लेकिन अब 2027 में कुंभ राशि के लोगों को इससे राहत मिल जाएगी।
किस राशि पर शुरू होगी शनि की साढ़ेसाती
कुंभ के समाप्त होने के बाद शनि की साढ़ेसाती वृषभ राशि पर शुरू होगी। आपको बता दें कि इस राशि का स्वामी शुक्र है। आपको शनि की साढ़ेसाती का प्रथम चरण झेलना होगा। इस चरण में लोगों की आय की अपेक्षा व्यय की अधिकता रहती है। आपके पास पैसा कम होने लगता है। अचानक धनहानि भी हो सकती है। आपकी हेल्थ पर भी बुरा असर होता है। लोगों को मानसिक तनाव का भी सामना करना पड़ता है।
वृषभ राशि के लोग शनि की साढ़ेसाती के प्रथम चरण में क्या उपाय करें
अगर आपकी कुंडली के प्रथम चरण अर्थात् द्वादश भाव का शनि हो तो आपको इन उपायों को करना चाहिए।
- शिवलिंग पर दूध चढ़ायें
- सूखे नारियल बहते जल में प्रवाहित करें।
- घोड़े के नाल की रिंग उंगली में धारण करें।
- शराब का सेवन न करें।
- मांस मछली का सेवन न करें।
- दूध से भीगी मिट्टी का तिलक लगाएं
- बन्दर पालें।
- कुत्तों को मीठी रोटी खिलाएं, संतान को सुख होगा।
- वट वृक्ष (बरगद की जड़) में दूध डालें।




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