Holi 2026: होलिका की परिक्रमा कैसे करनी चाहिए? जानिए सही नियम और इसके फायदे
शास्त्रों और लोक परंपरा में होलिका की परिक्रमा का विशेष महत्व है। सही विधि से परिक्रमा करने से घर में कलह-क्लेश दूर होते हैं, ग्रह बाधाएं कम होती हैं और भाग्य मजबूत होता है। आइए जानते हैं होलिका परिक्रमा के सही नियम, संख्या और फायदे।

होलिका दहन हिंदू धर्म का एक प्रमुख और पवित्र अनुष्ठान है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। 2026 में होलिका दहन 2 मार्च की शाम को होगा। होलिका की अग्नि के चारों ओर परिक्रमा करना केवल एक रस्म नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शुद्धि, पितरों के आशीर्वाद और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति का शक्तिशाली माध्यम है। शास्त्रों और लोक परंपरा के अनुसार परिक्रमा की सही विधि, संख्या और भावना से इसे करना बहुत जरूरी है। आइए जानते हैं होलिका की परिक्रमा के सही नियम, विधि और इसके चमत्कारी फायदे।
होलिका परिक्रमा का धार्मिक महत्व
होलिका दहन की अग्नि भक्त प्रह्लाद की भक्ति और बुराई के अंत का प्रतीक है। इस अग्नि के चारों ओर परिक्रमा करने से व्यक्ति अपने जीवन की नकारात्मकता, डर, क्रोध और पापों को जलाकर भस्म कर देता है। परिक्रमा ईश्वर के प्रति समर्पण, आभार और क्षमा मांगने का माध्यम है। यह अनुष्ठान मन को शुद्ध करता है, पितरों का आशीर्वाद दिलाता है और परिवार में सुख-शांति स्थापित करता है। सही विधि से की गई परिक्रमा से घर में कलह-क्लेश दूर होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
परिक्रमा की सही संख्या और दिशा
शास्त्रों के अनुसार, होलिका की परिक्रमा हमेशा घड़ी की दिशा (दक्षिणावर्त) में करनी चाहिए। यह दिशा शुभ और ऊर्जा संतुलित करने वाली मानी जाती है। परिक्रमा की संख्या तीन या सात होनी चाहिए।
- तीन परिक्रमा: त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) के सम्मान में की जाती है।
- सात परिक्रमा: जीवन के सात चक्रों (सप्तचक्र) की शुद्धि के लिए की जाती है।
परिक्रमा करते समय मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें। परिक्रमा के दौरान शांत मन से भगवान का ध्यान करें और मन में प्रार्थना करें कि जीवन की नकारात्मकता दूर हो।
परिक्रमा के दौरान मंत्र
परिक्रमा करते समय निम्न सरल मंत्र का जाप करें:
ॐ होलिकायै नमः
या
अहकूटा भयत्रस्तैः ता त्वं होलि बालिशैः। अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम्॥
मंत्र का जाप 1, 3 या 5 माला (विषम संख्या) में करें। परिक्रमा के दौरान मन में ईश्वर के प्रति धन्यवाद का भाव रखें। उन सभी सुखों के लिए आभार व्यक्त करें जो आपको मिले हैं। अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगें। भावना सच्ची और शुद्ध होनी चाहिए। परिक्रमा करते समय किसी से बात न करें और मोबाइल या अन्य व्यस्तता से दूर रहें।
परिक्रमा के साथ दान और सेवा
परिक्रमा पूरी होने के बाद अपनी सामर्थ्य अनुसार दान करें। होलिका की अग्नि में नई फसल का अनाज, गेहूं की बालियां या गुड़ अर्पित करें। इससे धन-धान्य में वृद्धि होती है। गरीबों को मिठाई, फल या दान दें। दान से ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। परिक्रमा के बाद परिवार के साथ बैठकर होलिका की राख घर लाएं। राख का तिलक लगाने से नजर दोष और ग्रह पीड़ा दूर होती है।
होलिका का परिक्रमा करने के फायदे
विधि-विधान से की गई परिक्रमा से:
- घर में कलह-क्लेश और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
- पितरों का आशीर्वाद मिलता है, संपत्ति में वृद्धि होती है।
- मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
- ग्रह दोष और ऊपरी बाधा से मुक्ति मिलती है।
- परिवार में सुख-शांति, धन-धान्य और समृद्धि आती है।
होलिका दहन 2 मार्च 2026 को शाम को होगा। इस दिन परिक्रमा करें, मंत्र जपें और दान करें। इससे भगवान विष्णु की कृपा बनी रहेगी और जीवन में सुख-समृद्धि आएगी।




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