फाल्गुन पूर्णिमा पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, भगवान विष्णु के आशीर्वाद से पूरे होंगे सभी काम
फाल्गुन पूर्णिमा हिंदू वर्ष का अंतिम दिन माना जाता है। इस दिन लक्ष्मी-नारायण की पूजा करने से सुख, सौभाग्य और वंश वृद्धि होती है। निःसंतान दंपत्ति को संतान सुख मिलता है। यह तिथि समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी के प्रकट होने की भी है।

फाल्गुन पूर्णिमा हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ तिथि मानी जाती है। यह दिन होलिका दहन और होली का प्रतीक है, लेकिन धार्मिक दृष्टि से यह लक्ष्मी-नारायण पूजा और सत्यनारायण व्रत का भी प्रमुख दिन है। इस दिन व्रत रखने और कथा सुनने से सुख-समृद्धि, संतान प्राप्ति और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। भगवान विष्णु की कृपा से जीवन की हर बाधा दूर होती है। 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च को यानी आज है। आइए इस दिन की व्रत कथा और महत्व को विस्तार से जानते हैं।
फाल्गुन पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
फाल्गुन पूर्णिमा हिंदू वर्ष का अंतिम दिन माना जाता है। इस दिन लक्ष्मी-नारायण की पूजा करने से सुख, सौभाग्य और वंश वृद्धि होती है। निःसंतान दंपत्ति को संतान सुख मिलता है। यह तिथि समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी के प्रकट होने की भी है। इसलिए इसे सुख-समृद्धि देने वाली माना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों, खासकर गंगा में स्नान और दान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। व्रत रखने से जीवन की परेशानियां खत्म होती हैं और भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।
फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि और समय
वैदिक पंचांग के अनुसार, 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च को है। यह तिथि होलिका दहन के दिन पड़ रही है। होलिका दहन शाम को प्रदोष काल में होगा और 4 मार्च को धुलेंडी या रंगों वाली होली मनाई जाएगी। पूर्णिमा का व्रत रखने वाले सुबह स्नान कर पूजा शुरू करते हैं और शाम को कथा सुनते हैं। व्रत के दौरान सात्विक भोजन करें और रात में कथा सुनने के बाद फलाहार करें। इस दिन लक्ष्मी-नारायण और सत्यनारायण की पूजा विशेष फलदायी होती है।
फाल्गुन पूर्णिमा व्रत कथा - प्रह्लाद और होलिका की कहानी
प्राचीन काल में असुर राजा हिरण्यकश्यप था। वह स्वयं को भगवान मानता था और विष्णु भक्ति का विरोध करता था। उसका पुत्र प्रह्लाद बचपन से ही विष्णु भक्त था। हिरण्यकश्यप को यह बात असह्य थी। उसने प्रह्लाद को मारने के कई प्रयास किए – सांप से कटवाया, पहाड़ से फेंका, आग में डाला - लेकिन हर बार भगवान विष्णु ने प्रह्लाद की रक्षा की।
अंत में हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को बुलाया। होलिका को वरदान था कि आग उसे नहीं जलेगी। उसने प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठने का निश्चय किया। लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका जलकर भस्म हो गई। इस घटना से होलिका दहन की प्रथा शुरू हुई। प्रह्लाद की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार में हिरण्यकश्यप का वध किया। यह कथा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
फाल्गुन पूर्णिमा पर संतान सुख के लिए पूजा-विधि
फाल्गुन पूर्णिमा पर संतान प्राप्ति के लिए लक्ष्मी-नारायण और सत्यनारायण पूजा की जाती है। व्रत रखने वाले सुबह स्नान कर लक्ष्मी-नारायण की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। घी का दीपक जलाएं, फल, मिठाई और फूल अर्पित करें। संतान गोपाल स्तोत्र का पाठ करें। स्तोत्र में भगवान कृष्ण से पुत्र प्राप्ति की प्रार्थना की जाती है। व्रत रखने वाले शाम को कथा सुनें और प्रसाद ग्रहण करें। रात में सत्यनारायण कथा का पाठ भी फलदायी होता है। इस विधि से निःसंतान दंपत्ति को संतान सुख मिलता है।
फाल्गुन पूर्णिमा पर स्नान-दान और व्रत के लाभ
फाल्गुन पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से पापों से मुक्ति मिलती है। गंगा स्नान विशेष फलदायी है। दान में चावल, दूध, चीनी, घी, वस्त्र या धन दें। व्रत रखने से जीवन की परेशानियां खत्म होती हैं। सत्यनारायण पूजा से सुख-समृद्धि आती है। संतान गोपाल स्तोत्र से संतान प्राप्ति और संतान की उन्नति होती है। इस दिन की पूजा से वंश वृद्धि और पारिवारिक सुख मिलता है।
फाल्गुन पूर्णिमा पर व्रत, कथा और पूजा से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। यह दिन सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति का है। 3 मार्च 2026 को विधि-विधान से व्रत रखें और स्तोत्र पाठ करें।




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