Hartalika Teej: हरतालिका तीज पर इन 3 उत्तम मुहूर्त में करें पूजा, 11:57 बजे से अभिजीत मुहूर्त शुरू
Hartalika Teej Timing Pooja: इस बार हरतालिका तीज की पूजा तृतीया को ध्यान में रखकर शाम से पहले ही समाप्त कर ली जाएगी। ऐसे में सुबह से लेकर चतुर्थी तिथि शुरू होने तक पूजन के लिए 3 शुभ मुहूर्त मिल रहे हैं।

Hartalika Teej Timing: 16 अगस्त, मंगलवार के दिन हरतालिका तीज व्रत है। अखंड सुख, सौभाग्य फल प्राप्ति के लिए स्त्री एवं कन्याएं सुखी दांपत्य जीवन के लिए यह निर्जल कठिन तीज व्रत करती हैं। शिवपुराण के अनुसार, सबसे पहले माता पार्वती ने हरतालिका तीज व्रत भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए किया था। हरतालिका तीज व्रत तृतीया तिथि से शुरू होता है और सूर्योदय से लेकर अगले दिन चतुर्थी के सूर्योदय तक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को विधिपूर्वक करने वाले की रक्षा स्वयं भगवान शिव करते हैं। इस बार हरतालिका तीज की पूजा तृतीया को ध्यान में रखकर दोपहर से पहले समाप्त कर ली जाएगी। ऐसे में सुबह से लेकर चतुर्थी तिथि शुरू होने तक पूजन के लिए 3 शुभ मुहूर्त मिल रहे हैं।
हरतालिका तीज पर 3 उत्तम मुहूर्त में करें पूजा
- चर मुहूर्त- (सामान्य) 09:09 ए एम से 10:46 ए एम
- लाभ मुहूर्त- (उन्नति) 10:46 ए एम से 12:23 पी एम
- अमृत मुहूर्त- (सर्वोत्तम) 12:23 पी एम से 01:59 पी एम
11:57 बजे से अभिजित मुहूर्त शुरू
- अभिजित मुहूर्त: 11:57 ए एम से 12:48 पी एम
- विजय मुहूर्त: 02:31 पी एम से 03:23 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त: 06:49 पी एम से 07:11 पी एम
- अमृत काल: 11:30 पी एम से 01:15 ए एम, अगस्त 27
- रवि योग: पूरे दिन
कब तक रहेगा पूजा का शुभ समय
पंचांग के अनुसार, दोपहर में चतुर्थी लग रही है। ऐसे में चतुर्थी तिथि लगने से पूर्व पूजन समाप्त कर लेना उत्तम रहेगा।
न करें इन अशुभ मुहूर्त में पूजा
राहुकाल- 03:36 पी एम से 05:13 पी एम
रोग - अमंगल 05:56 ए एम से 07:33 ए एम
उद्वेग - अशुभ 07:33 ए एम से 09:09 ए एम वार वेला
काल - हानि 01:59 पी एम से 03:36 पी एम काल वेला
रोग - अमंगल 05:13 पी एम से 06:49 पी एम
काल - हानि 06:49 पी एम से 08:13 पी एम
उद्वेग - अशुभ 09:36 पी एम से 10:59 पी एम
पूजन-विधि
- हरितालिका तीज में श्रीगणेश, भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है।
- सबसे पहले मिट्टी से तीनों की प्रतिमा बनाएं और भगवान गणेश को तिलक करके दूर्वा अर्पित करें।
- भगवान शिव को फूल, बेलपत्र, भांग, कच्चा दूध, दही, शहद, गंगाजल और धतूरा अर्पित करें और माता पार्वती को श्रृंगार का सामान अर्पित करें।
- सभी देवी-देवताओं को वस्त्र अर्पित करने के बाद हरितालिका तीज व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
- श्रीगणेश की आरती करने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की आरती उतारें। फिर भोग लगाकर क्षमा मांगे।
भोग: पंचामृत, सात्विक खीर, सूखे मेवे, मिश्री, फल, मिठाई, हलवा, पंजीरी, आदि




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