हरतालिका तीज पर सुबह या शाम कब होगी पूजा, दोपहर से ही लग जाएगी चतुर्थी तिथि
Hartalika Teej 2025 Muhurat Pooja: हरतालिका तीज व्रत को सर्वप्रथम पार्वती मां ने शिव जी को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए किया था। गौर फरमाने वाली बात है की इस दिन दोपहर में ही चतुर्थी तिथि लग रही है।

Hartalika Teej 2025 Muhurat: हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर हरतालिका तीज का व्रत रखा जाता है। उदया तिथि अनुसार 26 अगस्त को हरतालिका तीज व्रत रखा जाएगा। अपने सुहाग की लंबी उम्र व अच्छी सेहत की कामना कर इस दिन महिलाएं शिव-पार्वती पूजन करती हैं। हरतालिका तीज व्रत बेहद कठिन माना जाता है, जो अन्न व जल ग्रहण किए बिना निर्जल रखा जाता है। इस व्रत को सर्वप्रथम पार्वती मां ने शिव जी को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए घनघोर जंगल में कठिन तपस्या कर शिवलिंग की बालू की प्रतिमा बनाकर पूजा-अर्चना नदी के किनारे की थी। हरतालिका तीज की पूजा तृतीया तिथि व पूजा प्रदोष काल में करने का विधान है लेकिन इस साल दोपहर में ही चतुर्थी लग रही है। ऐसे में आइए जानते हैं हरतालिका तीज की पूजा कब करना उत्तम रहेगा-
हरतालिका तीज पर सुबह या शाम कब होगी पूजा, दोपहर से ही लग जाएगी चतुर्थी तिथि
पंचांग के अनुसार, 26 अगस्त को 01:54 पी एम तक तृतीया तिथि रहेगी, जिसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी। शास्त्रों के अनुसार, हरतालिका तीज की पूजा तृतीया तिथि में करना शुभ होता है। ऐसे में चतुर्थी तिथि लगने से पहले यानि दोपहर 01:54 मिनट तक पूजा समाप्त कर लेना अति उत्तम रहेगा। इसलिए इस साल 26 अगस्त को विधि- विधान के साथ हरतालिका तीज पूजन सुबह की जाएगी।
इस तरह करें हरतालिका तीज पूजा: सबसे पहले चौकी सजाएं। गंगाजल से घर व पूजा स्थल को शुद्ध कर दें। चौकी के चारों-ओर केले के पत्तों को कलावे से बांध दें। चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर कलश की स्थापना करें। गणेश जी को प्रणाम करें। इस पूजन में मिट्टी या रेत से शिव परिवार बनाकर पूजा करें। प्रभु का जलाभिषेक करें। 16 श्रृंगार का सामान, अगरबत्ती, धूप, दीप, शुद्ध घी, पान, कपूर, सुपारी, नारियल, चंदन, फल, फूल के साथ आम, केला, बेल व शमी के पत्ते से पूजा करें। हरतालिका तीज व्रत की कथा का पाठ करें। फिर आरती के बाद श्रद्धा के साथ भोग लगाकर क्षमा-याचना करें।
मंत्र
- ऊं उमायै नम:
- ॐ नमः शिवाय
- पार्वत्यै नम:,
- जगद्धात्रयै नम:
- शिवायै नम:
- ब्रह्मरूपिण्यै नम:




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