हनुमान-मकरध्वज कथा: क्या आप जानते हैं भगवान हनुमान के बेटे का नाम? इन 2 मंदिरों में होती है पूजा, मंगल दोष होता है शांत
Hanuman Son Katha: जानें हनुमान जी के बेटे का नाम क्या है और देश के किन 2 मंदिरों में उनकी पूजा होती है? साथ ही पढ़ें हनुमान-मकरध्वज की वो कथा जिसका जिक्र पुराणों में है।

आज साल 2026 का पहला बड़ा मंगल है। आज के दिन खास रूप से भगवान हनुमान को पूजा जाता है। भगवान हनुमान से जुड़ी कई कहानियां हैं जिनका जिक्र पुराणों में हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले हनुमान जी का भी एक बेटा था। शायद कई लोगों को यकीन ना हो लेकिन इसका इसका जिक्र वेद-पुराणों में भी है। बता दें कि हनुमान जी के बेटे का ना्म मकरध्वज था। जयपुर के परकोटे में स्थित एक मंदिर भी है जहां पर भगवान हनुमा के साथ-साथ मकरध्वज की भी पूजा होती है। आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में। साथ में जानेंगे मकरध्वज की कथा के भी बारे में।
जयपुर में है मकरध्वज का मंदिर
जयपुर शहर के परकोटे में स्थित पूर्वमुखी हनुमान मंदिर में लोगों की खूब भीड़ लगती है।। यहां भगवान हनुमान जी के साथ उनके बेटे मकरध्वज की पूजा होती है। इस मंदिर को लेकर लोगों में खूब मान्यता है। माना जाता है कि अगर इस मंदिर में आकर पूजा की जाए और मकरध्वज के दर्शन किया जाए तो मंगल दोष शाांत हो जाता है और जिंदगी के बाकी कष्ट दूर हो जाते हैं। खासकर मंगलवार के दिन यहां भक्तों की खूब भीड़ होती है। साल के पहले बड़े मंगल पर भी यहां लोगों का तांता लगने वाला है।
गुजरात का हनुमान-मकरध्वज मंदिर
वहीं माना जाता है कि गुजराज के द्वारका में मकरध्वज का पहला मंदिर है। इस मंदिर का नाम दांडी हनुमान मंदिर है। ये देश का एकमात्र ऐसा पहला मंदिर है जहां पर भगवान हनुमान के बेटे मकरध्वज की पूजा होती है। ये जगह मेन द्वारका से तकरीबन 2 किमी दूर है। इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहीं पर भगवान हनुमान और मकरध्वज की पहली मुलाकात हुई थी। इस मंदिर में प्रवेश करते ही सामने की ओर मकरध्वज की मूर्ति दिखाई देती है और पास में हनुमान जी की मूर्ति की भी स्थापना की गई है। इस मंदिर में दोनों की एक साथ पूजा की जाती है और बहुत ही खास माना जाता है।
मकरध्वन और भगवान हनुमान की कथा
अब जान लेते हैं कि आखिर जब भगवान हनुमान ब्रह्मचारी थे तो उनके बेटे का जन्म कैसे हुआ? बता दें कथा रामायण के समय की है। अहिरावण नाम का एक राक्षस भगवान राम और लक्ष्मण को पाताल लोक ले गया। इस दौरान पाताललोक के दरवाजे पर मकरध्वज नाम का योद्धा पहरेदारी कर रहा था। हनुमान जी के कहने पर भी उसने सभी को अंदर जाने से मना कर दिया। ऐसे में मकरध्वज और हनुमान जी में लड़ाई हुई। हनुमान जी को एहसास हुआ कि मकरध्वज में भी उनके जैसी ही ताकत है। ऐसे में उन्होंने पूछ ही लिया कि आखिर वो कौन है। इस पर मकरध्वज ने बताया कि वो हनुमान का बेटा है। हनुमान जी ने हैरानी से बताया कि हनुमान तो वहीं हैं लेकिन वो उनका बेटा कैसे हुआ?
इस पर मकरध्वज ने बताया कि जब हनुमान जी समुद्र पार कर रहे थे तब उनके पसीने की एक बूंद समुद्र में गिरी जिसे एक मछली ने निगल लिया और उससे उसका जन्म हुआ। इसे लेकर एक कथा ऐसी भी है कि लंका दहन के बाद जब हनुमान जी समुद्र में अपनी पूंछ की आग बुझा रहे थे तब उनके शरीर से पसीने की बूंद गिरी थी तो उसी से मकरध्वज का जन्म हुआ था।
डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)




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