Navratri Day 3: नवरात्रि का तीसरा दिन कल, इस मुहूर्त में करें मां चन्द्रघंटा की पूजा, पढ़ें मंत्र, कथा व भोग
Chaitra Navratri Day 3 Navratri 3rd day 2026 : इस साल की चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन 21 मार्च 2026 के दिन पड़ रहा है। इस दिन देवी दुर्गा के तीसरे स्वरूप माता चंद्रघंटा की विधिवत आराधना करने से व्यक्ति का कल्याण होता है।

Chaitra Navratri Day 3 Navratri 3rd day 2026: हर साल चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन देवी चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। इस साल की चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन 21 मार्च 2026 के दिन पड़ रहा है। इस दिन देवी दुर्गा के तीसरे स्वरूप माता चंद्रघंटा की विधिवत आराधना करने से व्यक्ति का कल्याण होता है। माता चंद्रघंटा का रूप अलौकिक है। माता के मस्तक पर अर्ध चंद्रमा विराजमान है, जिस कारण ही इन्हें चंद्रघंटा के नाम से पुकारा जाता है। आइए जानते हैं चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन का मुहूर्त, चंद्रघंटा माता की विधि, मंत्र, रंग, फूल, भोग, स्वरूप, और कथा-
नवरात्रि का तीसरा दिन कल, इस मुहूर्त में करें मां चन्द्रघंटा की पूजा, पढ़ें मंत्र, कथा व भोग
- ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:49 मिनट से सुबह में 05:37 मिनट तक
- अभिजित मुहूर्त- दोपहर में 12:04 मिनट से दोपहर में 12:53 मिनट तक
- विजय मुहूर्त- दोपहर में 02:30 मिनट से दोपहर में 03:18 मिनट तक
- गोधूलि मुहूर्त- शाम में 06:32 बजे से शाम में 06:55 मिनट तक
- अमृत काल- शाम में 05:58 बजे से 07:27 बजे तक
- निशिता मुहूर्त- रात में 12:04 बजे से, मार्च 22 से रात में 12:52 बजे तक, मार्च 22
- रवि योग- रात 12:37 बजे, मार्च 22 से सुबह 06:23 बजे, मार्च 22
चंद्रघंटा मां का पसंदीदा भोग- दूध की खीर, दूध से बनी मिठाई
चंद्रघंटा मां का पसंदीदा फूल- गुलाब और कमल
चंद्रघंटा मां का पसंदीदा रंग- लाल
क्या उपाय करें?
चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन श्री दुर्गा चालीसा का पाठ विधिवत करें।
चंद्रघंटा मां का मंत्र क्या है?
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:
कैसा होता है चंद्रघंटा माता का स्वरूप
माता चंद्रघंटा का शरीर स्वर्ण की भांति चमकीला और 10 भुजाओं वाला है। अस्त्र शस्त्र से सुशोभित मैया सिंह पर सवारी करती हैं। पूरी विधि-विधान से चंद्रघंटा माता की पूजा करने और कथा का पाठ करने से शरीर के सभी रोग दुख कष्ट आदि दूर हो सकते हैं।
चंद्रघंटा माता की कथा या कहानी क्या है?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, स्वर्ग पर राक्षसों का उपद्रव बढ़ने पर दुर्गा मैया ने चंद्रघंटा माता का रूप धारण किया था। महिषासुर नमक दैत्य ने सभी देवताओं को परेशान कर रखा था। महिषासुर स्वर्ग लोक पर अपना अधिकार जमाना चाहता था और सभी देवताओं से युद्ध कर रहा था। महिषासुर के आतंक से परेशान सभी देवता भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश के पास जा पहुंचे। सभी देवताओं ने खुद पर आई विपदा का वर्णन त्रिदेवों से किया और मदद मांगी। देवताओं की विनती और असुरों का आतंक देख त्रिदेव को बहुत गुस्सा आया। त्रिदेवों के क्रोध से एक ऊर्जा निकली। इसी ऊर्जा से माता चंद्रघंटा देवी अवतरित हुई। माता के अवतरित होने पर सभी देवताओं ने माता को उपहार दिया। माता चंद्रघंटा को भगवान शिव ने अपना त्रिशूल, श्री हरि विष्णु जी ने अपना चक्र, सूर्य ने अपना तेज, तलवार, सिंह और इंद्र ने अपना घंटा माता को भेंट के रूप में दिया। अस्त्र शास्त्र शिशु शोभित मां चंद्रघंटा ने महिषासुर का मर्दन कर स्वर्ग लोक और सभी देवताओं को रक्षा प्रदान की।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




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