Chaitra Navratri Puja Vidhi: 7 स्टेप्स में समझें चैत्र नवरात्रि की पूजा विधि, पहले दिन ऐसे करें कलश की स्थापना
Chaitra Navratri 9 Day Puja Vidhi: 19 मार्च 2026 से चैत्र नवरात्रि शुरु होने वाले हैं। आसान तरीके से जानें कि कुल 9 दिन तक मां दुर्गा की पूजा कैसे करनी है। साथ ही जानें कि कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त क्या है?

Chaitra Navratri 2026: सनातन धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्त है। साल भर में चार बार आने वाली नवरात्रि में से दो ही सिर्फ गृहस्थ वालों के लिए होती है। बाकी दो गुप्त होती हैं जिसमें साधक उपासना करते हैं। गृहस्थों के लिए चैत्र और शारदीय नवरात्रि बेहद ही मायने रखती हैं। इस दौरान 9 दिन तक मां दुर्गा के सारे नौ स्वरूपों को पूजा जाता है। हर एक दिन उनके अलग-अलग स्वरूप की पूजा होती है। चैत्र का महीना चल रहा है और कल यानी 19 मार्च से नवरात्रि शुरु होने जा रही है। चैत्र नवरात्रि में घटस्थापना यानी कलश की स्थापना की जाती है। अगर आप सोच रहे हैं कि ये पूजा शारदीय वाली जैसी है या फिर अलग है तो आपको कन्फ्यूज होने की जरूरत नहीं है। नीचे आसान तरीके से समझें कि चैत्र नवरात्रि की पूजा विधि क्या है?
नोट करें चैत्र नवरात्रि की संपूर्ण पूजा विधि
1. चैत्र नवरात्रि के पहले दिन सुबह स्नान करके साफ-सुथरे कपड़े पहन लें। इसके बाद अपने घर के मंदिर की सफाई कर लें। सफाई के बाद मंदिर में गंगाजल छिड़क दें।
2. एक चौकी लेकर उस पर लाल रंग के कपड़े को बिछा लें। इस चौकी पर अब मां दुर्गा की मूर्ति या फिर तस्वीर को रख दें।
3. कलश की स्थापना के लिए उसमें जल भर दें। थोड़ा सा गंगाजल लें। इसमें सिक्का, सुपारी और आम के पत्ते रख दें। इसे चौकी पर रख दें। चौकी के पास ही कलश को रख दें और यहीं पास में ही जौ को भी बो दें। अब अखंड ज्योति जला लें। ये ज्योति पहले दिन से नौ दिनों तक जलती रहनी चाहिए।
4. पूरे नौ दिन तक अब मां दुर्गा की पूजा करें। रोज लाल फूल चढ़ाएं और इसी के साथ धूप और छोटा दीया जलाएं
5. रोज दुर्गा सप्तशती के एक-एक चैप्टर का पाठ करें। कोशिश करें कि पाठ के वक्त किसी भी तरह की बाधा ना आए। इसे इस तरह से पढ़ें कि आखिरी दिन तक सारे पाठ खत्म हो जाएं।
6. पाठ खत्म होते ही मां दुर्गा को भोग लगाएं। भोग में फल और मिश्री चढ़ाएं। साथ ही सात्विक भोजन का भी भोग लगाएं। आखिरी में दुर्गा चलीसा का पाठ करें।
7. अष्टमी की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दिन विधि-विधान के साथ सच्चे मन से पूजा करें। आप चाहें तो इस दिन या फिर नवमी पर कन्या पूजन कर सकते हैं।
कब शुरु होती है चैत्र नवरात्रि
हर साल चैत्र नवरात्रि की शुरुआत चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली प्रतिपदा तिथि से होती है। इसी दिन हिंदू नव वर्ष भी मनाई जाती है। साथ ही इसी दिन गुड़ी पड़वा का भी त्योहार होता है। चैत्र नवरात्रि में कलश यानी घटस्थापना के साथ ही 9 दिन का अनुष्ठान शुरू हो जाता है।
इतने बजे से प्रतिपदा तिथि की शुरुआत
पंचांग के हिसाब से प्रतिपदा तिथि कि शुरुआत 19 मार्च की सुबह 6 बजकर 52 मिनट से हो जाएगी। प्रतिपदा तिथि का समापन 20 मार्च को होगा। 20 मार्च को इस तिथि के समापन का समय सुबह 4 बजकर 52 मिनट है। ऐसे में 19 मार्च को चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो जाएगी।
हर दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरुपों की पूजा
| पहला दिन | मां शैलपुत्री की पूजा |
| दूसरा दिन | मां ब्रह्मचारिणी की पूजा |
| तीसरा दिन | मां चंद्रघंटा की पूजा |
| चौथा दिन | मां कुष्मांडा की पूजा |
| पांचवा दिन | मां स्कंदमाता की पूजा |
| छठा दिन | मां कात्यायनी की पूजा |
| सातवां दिन | मां कालरात्रि की पूजा |
| आठवां दिन | मां महागौरी की पूजा |
| नवां दिन | मां सिद्धिदात्री की पूजा |
घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त
चैत्र नवरात्रि में सबसे जरूरी चीज कलश यानी घटस्थापना की होती है। अगर कलश की स्थापना पूजा के समय सही मुहूर्त पर हो जाए तो ये काफी फलदायी माना जाता है। कल सुबह पूजा आप इस तरह से शुरु करें कि घट स्थापना 6 बजकर 52 मिनट से लेकर 7 बजकर 43 मिनट के बीच हो जाए। अगर आप इस समय पर कलश की स्थापना ना कर पाएं तो घबराने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं है। आप अभिजीत मुहूर्त में भी ये कर सकते हैं। पंचांग के हिसाब से 19 मार्च को अभिजीत मुहूर्त दोपहर में 12 बजकर 5 मिनट से लेकर 12 बजकर 53 मिनट तक होगा।
डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)




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