chaitra navratri 2026 ghatasthapana during panchak and kharmas muhurat puja vidhi Chaitra Navratri 2026: पंचक और खरमास के बीच कैसे करें कलश स्थापना? पूजा की सही विधि और मुहूर्त, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Chaitra Navratri 2026: पंचक और खरमास के बीच कैसे करें कलश स्थापना? पूजा की सही विधि और मुहूर्त

खरमास 15 मार्च से शुरू होकर 14 अप्रैल तक रहेगा और पंचक 16 मार्च शाम से 20 मार्च रात तक चलेगा। ऐसे में श्रद्धालुओं के मन में सवाल उठ रहा है कि पंचक और खरमास में कलश स्थापना यानी घटस्थापना कैसे करें? आइए जानते हैं सही नियम।

Sat, 14 March 2026 01:10 PMNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
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Chaitra Navratri 2026: पंचक और खरमास के बीच कैसे करें कलश स्थापना? पूजा की सही विधि और मुहूर्त

चैत्र नवरात्रि 2026 में 19 मार्च से शुरू हो रही है। इस बार नवरात्रि की शुरुआत पंचक और खरमास के बीच पड़ रही है। खरमास 15 मार्च से शुरू होकर 14 अप्रैल तक रहेगा और पंचक 16 मार्च शाम से 20 मार्च रात तक चलेगा। ऐसे में श्रद्धालुओं के मन में सवाल उठ रहा है कि पंचक और खरमास में कलश स्थापना यानी घटस्थापना कैसे करें? ज्योतिष शास्त्र और धार्मिक परंपराओं के अनुसार, देवी पूजन इन दोषों से मुक्त रहता है। आइए जानते हैं इस बार की तिथियां, मुहूर्त और पूजा विधि।

चैत्र नवरात्रि 2026 की तिथियां और मुहूर्त

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च 2026, दिन - गुरुवार को सुबह 6:52 बजे शुरू होगी और 20 मार्च सुबह 4:52 बजे समाप्त होगी। उदय तिथि के आधार पर नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से मानी जाएगी। घटस्थापना का मुख्य मुहूर्त सुबह 6:52 से 7:43 बजे तक रहेगा। अगर इस समय में पूजा ना हो पाए, तो अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 बजे तक उपलब्ध है। प्रतिपदा तिथि अमावस्या से मिलने के कारण थोड़ी टूटन का योग है, लेकिन नवरात्रि पूरे 9 दिन ही रहेंगे।

खरमास और पंचक का समय

खरमास सूर्य के कुंभ से मीन राशि में प्रवेश के साथ शुरू होता है। सूर्य 14 मार्च 2026 की रात 12:41 बजे कुंभ से मीन में प्रवेश करेंगे। इसलिए खरमास 15 मार्च से शुरू होकर 14 अप्रैल तक चलेगा। पंचक 16 मार्च शाम 6:15 से 20 मार्च रात 2:28 तक रहेगा। इस बार पंचक सोमवार से शुरू हो रहा है, इसलिए इसे राज पंचक कहा जाएगा, जो अन्य पंचकों से कम कष्टदायक है। नवरात्रि के पहले दो दिन 19 और 20 मार्च पंचक में पड़ रहे हैं।

कलश स्थापना में पंचक और खरमास का प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, खरमास और पंचक में मांगलिक कार्य जैसे - विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि वर्जित रहते हैं। लेकिन देवी पूजन और घटस्थापना इन दोषों से मुक्त है। चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना सर्वोच्च होती है, इसलिए 19 मार्च को घटस्थापना पूरी तरह निर्विघ्न और शुभ रहेगी। पंचक में भी देवी पूजन पर कोई प्रतिबंध नहीं है। मां का आगमन इस बार डोली पर होने का संकेत है, जो समाज में अस्थिरता, भय या स्वास्थ्य समस्याओं का प्रतीक माना जाता है। फिर भी भक्ति और श्रद्धा से पूजा करने से मां प्रसन्न होती हैं।

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घटस्थापना की सही विधि

घटस्थापना के लिए ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) सबसे शुभ दिशा है।

  1. ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थल पर लाल वस्त्र बिछाकर मां दुर्गा की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  3. मिट्टी के पात्र में मिट्टी भरकर जौ बोएं (समृद्धि का प्रतीक)।
  4. तांबे के कलश में जल, सुपारी, सिक्का, अक्षत और आम के पत्ते डालें।
  5. कलश के मुख पर नारियल लाल वस्त्र में लपेटकर रखें।
  6. अखंड ज्योति जलाएं और 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' मंत्र का जाप करें।
  7. दुर्गा सप्तशती का पाठ और आरती से पूजा संपन्न करें।

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पंचक और खरमास में क्या करें और क्या ना करें

पंचक में वर्जित कार्यों से बचें: नया निर्माण, दक्षिण यात्रा, लकड़ी संचय, नया बिस्तर बनवाना और शुभ वस्तु खरीदना।

खरमास में विवाह, मुंडन, यज्ञोपवीत जैसे मांगलिक कार्य वर्जित हैं। लेकिन देवी पूजन, कलश स्थापना, दुर्गा सप्तशती पाठ, हवन और कन्या पूजन पूरी तरह शुभ हैं। पंचक दोष कम करने के लिए विष्णु-शिव पूजा, दुर्गा आराधना और दान-पुण्य करें। संयम रखें, सात्विक भोजन करें और सकारात्मक रहें।

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चैत्र नवरात्रि 2026 में पंचक और खरमास के बीच भी घटस्थापना निर्विघ्न होगी। श्रद्धा और विधि से पूजा करने से मां दुर्गा की कृपा बनी रहेगी।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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