Chaitra Navratri 2026 Date: When Will Navratri Begin? Check Kalash Sthapana Muhurat and Shubh Yog Chaitra Navratri 2026: 19 मार्च से शुरू हो रहे चैत्र नवरात्र, जानें घटस्थापना का शुभ समय और बन रहे विशेष योग, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Chaitra Navratri 2026: 19 मार्च से शुरू हो रहे चैत्र नवरात्र, जानें घटस्थापना का शुभ समय और बन रहे विशेष योग

Chaitra Navratri 2026 Date: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्र को साल के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक पर्वों में गिना जाता है। यह पर्व चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है और नौ दिनों तक चलता है। साल 2026 में चैत्र नवरात्र की शुरुआत 19 मार्च, गुरुवार से होने जा रही है। 

Thu, 12 March 2026 02:45 PMYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Chaitra Navratri 2026: 19 मार्च से शुरू हो रहे चैत्र नवरात्र, जानें घटस्थापना का शुभ समय और बन रहे विशेष योग

Chaitra Navratri 2026 Date: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्र को साल के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक पर्वों में गिना जाता है। यह पर्व चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है और नौ दिनों तक चलता है। साल 2026 में चैत्र नवरात्र की शुरुआत 19 मार्च, गुरुवार से होने जा रही है। इसी दिन विधि-विधान से कलश स्थापना के साथ नवरात्र व्रत का संकल्प लिया जाता है और मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा आरंभ होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चैत्र नवरात्र का संबंध हिंदू नववर्ष से भी माना जाता है। कई क्षेत्रों में इसी दिन से नया संवत्सर भी शुरू होता है। नवरात्र के नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करते हैं और घरों तथा मंदिरों में विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं।

नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की होती है पूजा-

नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मान्यता है कि देवी के इस रूप की आराधना करने से जीवन में स्थिरता, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस साल चैत्र नवरात्र की शुरुआत ज्योतिषीय दृष्टि से भी खास मानी जा रही है, क्योंकि पहले दिन कई शुभ योग बन रहे हैं।

19 मार्च 2026 से शुरू होंगे चैत्र नवरात्र 2026- द्रिक पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च 2026 को सुबह 6 बजकर 52 मिनट पर शुरू होगी। यह तिथि अगले दिन यानी 20 मार्च को सुबह 4 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। धार्मिक परंपराओं में व्रत और त्योहारों के निर्धारण में उदयातिथि को अधिक महत्व दिया जाता है। इसलिए इस साल चैत्र नवरात्र की शुरुआत 19 मार्च से मानी जाएगी। इसी दिन भक्तजन कलश स्थापना कर नवरात्र व्रत का संकल्प लेते हैं और मां दुर्गा की पूजा आरंभ करते हैं।

चैत्र नवरात्र की धार्मिक मान्यता- चैत्र नवरात्र को देवी शक्ति की आराधना का विशेष पर्व माना जाता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों- शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री- की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि नवरात्र के दौरान व्रत रखने, मंत्र जाप करने और देवी की आराधना करने से जीवन की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। कई लोग इन दिनों में घरों में अखंड ज्योति भी जलाते हैं और विशेष पूजा-पाठ करते हैं।

नवरात्र के पहले दिन बन रहे हैं तीन शुभ योग- ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस साल चैत्र नवरात्र की शुरुआत तीन महत्वपूर्ण शुभ योगों में हो रही है। इनमें शुक्ल योग, ब्रह्म योग और सर्वार्थ सिद्धि योग शामिल हैं। ज्योतिषशास्त्र में इन योगों को बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इन योगों में किए गए धार्मिक कार्य, पूजा-पाठ और व्रत विशेष फलदायी होते हैं। इस वजह से इस बार नवरात्र का महत्व और अधिक बढ़ गया है।

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कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त- नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना यानी कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 19 मार्च को इसके लिए दो प्रमुख शुभ समय बताए गए हैं।

पहला शुभ समय – सुबह 6 बजकर 52 मिनट से 7 बजकर 43 मिनट तक

दूसरा शुभ समय (अभिजीत मुहूर्त) – दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सुबह का मुहूर्त सबसे उत्तम माना जाता है। अगर किसी कारण से उस समय कलश स्थापना संभव न हो तो अभिजीत मुहूर्त में भी पूजा की जा सकती है।

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नवरात्र के पहले दिन के अन्य शुभ मुहूर्त

चैत्र नवरात्र के पहले दिन कई अन्य महत्वपूर्ण मुहूर्त भी बन रहे हैं, जिनका धार्मिक कार्यों में विशेष महत्व होता है।

ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 4:51 बजे से 5:39 बजे तक

प्रातः संध्या – सुबह 5:15 बजे से 6:26 बजे तक

विजय मुहूर्त – दोपहर 2:30 बजे से 3:18 बजे तक

गोधूलि मुहूर्त – शाम 6:29 बजे से 6:53 बजे तक

सायं संध्या – शाम 6:32 बजे से 7:43 बजे तक

अमृत काल – रात 11:32 बजे से 1:03 बजे तक

निशिता मुहूर्त – रात 12:05 बजे से 12:52 बजे तक

इन मुहूर्तों में पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान करना शुभ माना जाता है।

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डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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