आसमान में चमकेगा साल का सबसे छोटा पूर्णिमा का चांद, आज इतने बजे से दिखेगा ब्लू माइक्रोमून
Blue Moon 2026, Blue Micromoon 2026 Timing in India: आज के दिन न केवल आप ब्लू मून की अद्भुत घटना का आनंद ले सलते हैं बल्कि यह एक माइक्रोमून भी होगा। चंद्रमा रोज की स्थिति से एकदम अलग नजर आने वाला है, जो आम पूर्णिमा या फुल मून से हटकर होगा।

Blue Moon 2026, Blue Micromoon 2026 : आज आसमान में बेहद ही दुर्लभ और अनोखा नजारा देखा जा सकेगा। आज के दिन न केवल आप ब्लू मून की अद्भुत घटना का आनंद ले सलते हैं बल्कि यह एक माइक्रोमून भी होगा। चंद्रमा रोज की स्थिति से एकदम अलग नजर आने वाला है, जो आम पूर्णिमा या फुल मून से हटकर होगा। इसकी चांदनी थोड़ी फीकी होगी और आकार भी थोड़ा हैरान करने वाला होगा। ज्योतिष शास्त्र में एक ही समय पर ब्लू मून और माइक्रोमून की खगोलीय घटना बेहद ही दुर्लभ मानी जाती है। इस बार का ब्लू मून माइक्रोमून भी होगा, क्योंकि चांद धरती से दूर रहेगा, जिससे यह आकार में थोड़ा छोटा और कम चमकीला दिखाई देगा। भारत में इसकी चमक 31 मई की दोपहर को चरम पर होगी। असली नजारा 31 मई की रात को दिखेगा। ऐसे में आइए जानते हैं आज के दिन ब्लू मून कब और कैसे देख सकते हैं-
आसमान में चमकेगा साल का सबसे छोटा पूर्णिमा का चांद, आज इतने बजे से दिखेगा ब्लू माइक्रोमून
आज 31 मई को भारतीय समय के अनुसार, दोपहर में 2 बजकर 15 मिनट पर ब्लू मून अपने चरम पर होगा। अगर आप चांद को सबसे चमकीली अवस्था में देखना चाहते हैं, तो सही समय है जब चंद्रोदय होगा।
सूर्यास्त होने के बाद जब चंद्रोदय होगा, तब यह नजारा और भी अद्भुत नजर आएगा। इस दौरान चंद्रमा आकार में बड़ा और चमकीला नजर आएगा।
क्या नीले रंग का दिखेगा चांद?
नहीं, आज आसमान में ब्लू मून नजर आएगा लेकिन इसका मतलब यह नहीं की चांद नीले रंग का दिखाई देगा।
कब होगा चंद्रोदय?
हिंदू पंचांग के अनुसार, आज 31 मई को शाम में 07 बजकर 36 मिनट पर चंद्रोदय होगा।
क्या है ब्लू मून?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, एक ही महीने में होने वाली दूसरी पूर्णिमा को ब्लू मून के नाम से जाना जाता है। जब एक ही महीने में दो बार पूर्णिमा पड़ती है तो दूसरी पूर्णिमा के चांद को ब्लू मून कहा जाता है।
कैसा नजर आएगा माइक्रोमून?
अक्सर पूर्णिमा पर चांद अपनी पूरी चमक और विशाल आकार के साथ दिखाई देता है, लेकिन माइक्रोमून इसका बिल्कुल उल्टा है। ज्योतिष की भाषा में समझें तो चंद्रमा पृथ्वी के चक्कर एक दम गोल सर्कल में नहीं, बल्कि एक अंडाकार कोर्स पर करता है। इस यात्रा के दौरान एक समय ऐसा आता है जब चांद पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी पर होता है, जिसे ‘अपोजी’ कहा जाता है। आज होने वाली पूर्णिमा इसी अपोजी बिंदु पर होगी, जिसके कारण यह माइक्रोमून कहलाएगा।
जब पूर्णिमा अपोजी के दौरान होती है तो ये औसत पूर्णिमा की तुलना में लगभग 5 से 6 प्रतिशत छोटा और करीब 10 प्रतिशत कम चमकदार दिखाई देता है। अगर इसकी तुलना सुपरमून से करें तो यह आसमान में लगभग 14 प्रतिशत छोटा नजर आता है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




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