bhalchandra sankashti chaturthi vrat katha must read this to get lord ganesha belessings भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का रखे हैं व्रत, तो जरूर पढ़ें ये कथा मिलेगा भगवान गणेश का आशीर्वाद, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
More

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का रखे हैं व्रत, तो जरूर पढ़ें ये कथा मिलेगा भगवान गणेश का आशीर्वाद

चैत्र मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित है और संकटों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है।

Fri, 6 March 2026 10:20 AMNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
share
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का रखे हैं व्रत, तो जरूर पढ़ें ये कथा मिलेगा भगवान गणेश का आशीर्वाद

6 मार्च 2026, शुक्रवार को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जा रहा है। चैत्र मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित है और संकटों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से व्रत रखने, पूजा करने और कथा सुनने से जीवन के कष्ट, बाधाएं, आर्थिक तंगी और ग्रह-दोष दूर होते हैं। विशेष रूप से इस व्रत में कथा सुनना या पढ़ना अनिवार्य माना गया है। कथा के बिना व्रत अधूरा रहता है। आइए जानते हैं भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का महत्व और व्रत कथा।

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का महत्व

हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। चैत्र मास की इस चतुर्थी को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है क्योंकि इस दिन भगवान गणेश का भाल (माथा) चंद्रमा से सुशोभित होता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से सभी प्रकार के संकट, रोग, शत्रु भय और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं। भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं, इसलिए इस व्रत से जीवन के सभी विघ्न दूर हो जाते हैं। संतान प्राप्ति, संतान की उन्नति और पारिवारिक सुख के लिए भी यह व्रत बहुत फलदायी माना जाता है।

संकष्टी चतुर्थी व्रत की विधि

संकष्टी चतुर्थी का व्रत सूर्योदय से शुरू होता है। व्रती सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र के सामने घी का दीपक जलाएं। लाल फूल, दुर्वा, मोदक, लड्डू और फल अर्पित करें। 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जप करें। शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोलें। अगर चंद्रमा दिखाई ना दे, तो व्रत अगले दिन खोल सकते हैं। व्रत के दौरान सात्विक भोजन करें और क्रोध, झूठ से दूर रहें। पूजा के बाद कथा सुनना या पढ़ना अनिवार्य है।

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार सभी देवता किसी बड़े संकट में फंस गए थे। अपनी परेशानी का समाधान ढूंढने के लिए वे भगवान शिव के पास पहुंचे। उस समय भगवान शिव माता पार्वती और अपने दोनों पुत्रों—कार्तिकेय और गणेश के साथ बैठे हुए थे। देवताओं ने उनसे अपनी समस्या बताई और सहायता की प्रार्थना की।

भगवान शिव ने अपने दोनों पुत्रों से पूछा कि इस समस्या का समाधान कौन करेगा। दोनों ही देवताओं की मदद के लिए तैयार हो गए। तब भगवान शिव ने एक परीक्षा लेने का निर्णय किया। उन्होंने कहा कि जो भी पहले पूरी पृथ्वी का चक्कर लगाकर वापस आएगा, वही देवताओं की सहायता करने जाएगा।

यह सुनते ही भगवान कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर बैठकर तुरंत पृथ्वी की परिक्रमा के लिए निकल पड़े। दूसरी ओर भगवान गणेश अपने वाहन मूषक को देखकर सोच में पड़ गए कि वे इतनी जल्दी पूरी पृथ्वी का चक्कर कैसे लगा पाएंगे। कुछ देर विचार करने के बाद उन्होंने एक अलग उपाय निकाला।

गणेश जी उठे और अपने माता-पिता भगवान शिव और माता पार्वती की सात बार परिक्रमा की। इसके बाद वे शांत होकर वहीं बैठ गए और कार्तिकेय के लौटने का इंतजार करने लगे। जब भगवान शिव ने उनसे ऐसा करने का कारण पूछा, तो गणेश जी ने कहा कि माता-पिता के चरणों में ही पूरा संसार बसता है, इसलिए उनकी परिक्रमा करना ही पूरी पृथ्वी की परिक्रमा के समान है।

गणेश जी की बुद्धिमानी और भक्ति से भगवान शिव बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने गणेश जी को देवताओं की सहायता करने का कार्य सौंप दिया। साथ ही यह आशीर्वाद भी दिया कि जो भी भक्त चतुर्थी के दिन उनकी पूजा करेगा और यह कथा सुनेगा, उसके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाएंगे।

व्रत कथा सुनने के लाभ

इस कथा को सुनने से भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है। कथा सुनने से बुद्धि तेज होती है, निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है और जीवन के संकट दूर होते हैं। निःसंतान दंपत्ति को संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। कथा सुनने से मन की शांति मिलती है और नकारात्मक विचार दूर होते हैं। पूजा के बाद कथा सुनना व्रत को पूर्ण करता है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:Vastu Tips: शुक्रवार के दिन ना खरीदें यह 1 चीज, मां लक्ष्मी हो जाती हैं नाराज
ये भी पढ़ें:संकष्टी चतुर्थी 2026 मुहूर्त: आज शाम इस विधि से करें गणेश पूजा
ये भी पढ़ें:Quote of the day: इन लोगों से नहीं करनी चाहिए दोस्ती, जानें चाणक्य की 10 बातें

पूजा और व्रत के नियम

व्रत के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करें। पूजा में लड्डू, मोदक, दुर्वा और लाल फूल अर्पित करें। “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जप करें। शाम को चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलें। यदि चंद्रमा न दिखे तो अगले दिन खोल सकते हैं। व्रत में सात्विक भोजन करें। क्रोध और झूठ से दूर रहें। इस दिन दान-पुण्य करने से विशेष पुण्य मिलता है।

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत और कथा सुनने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं। 6 मार्च 2026 को विधि-विधान से व्रत रखें और कथा पढ़ें। इससे जीवन के सभी संकट दूर होंगे।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

जानें लेटेस्ट Dharm News, Aaj ka Rashifal और सटीक Panchang की जानकारी। अपनी डेली पूजा के लिए यहाँ पढ़ें Shiv Chalisa, Hanuman Chalisa और Bajrang Baanहिंदू कैलेंडर 2026 की शुभ तिथियों के साथ अपने हर दिन को खास बनाएं!