Bada Mangal 5 May 2026: भीम को जब हो गया अपने ताकत का घमंड, बुढ़ा वानर बन हनुमान जी ने तोड़ा था अहंकार, पढ़ें पूरी कहानी
बड़ा मंगल 5 मई 2026: जब भीम को अपने बल का घमंड हो गया, तब बूढ़े वानर के रूप में हनुमान जी ने उनका अहंकार कैसे तोड़ा? महाभारत वनवास काल की यह प्रसिद्ध लीला और हनुमान जी का दिव्य संदेश इस लेख में विस्तार से पढ़ें।

हिंदू धर्म में ज्येष्ठ मास का विशेष महत्व है। इस महीने में हर मंगलवार को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल के रूप में हनुमान जी की भक्ति बड़े उत्साह से मनाई जाती है। साल 2026 में ज्येष्ठ मास की शुरुआत 2 मई से हो गई है। ऐसे में आज हम आपको एक पौराणिक कथा के बारे में बताएंगे, जिसमें हनुमान जी ने महाबली भीम के घमंड को तोड़ा था।
वनवास काल में शुरू हुई कहानी
महाभारत काल में जब पांडव वनवास काट रहे थे, एक दिन हवा के साथ एक सुगंधित दिव्य पुष्प द्रौपदी के पास आया। पुष्प देखकर द्रौपदी ने भीम से कहा कि वे भी वैसा ही फूल लाकर दें। भीम, जो अपनी अपार शक्ति के लिए प्रसिद्ध थे, तुरंत उस पुष्प की खोज में निकल पड़े। रास्ते में जो भी वृक्ष या शिला आती, भीम उसे अपनी गदा और बाहुबल से उखाड़कर फेंक देते। वे यह साबित करना चाहते थे कि उनके रास्ते में कोई टिक नहीं सकता।
बूढ़े वानर के रूप में हनुमान जी का आगमन
भीम जब आगे बढ़ रहे थे, तो रास्ते में एक बूढ़ा वानर पूंछ फैलाकर लेटा मिला। भीम ने गरजकर कहा, 'हे वानर! अपनी पूंछ हटा, मुझे आगे जाना है।' लेकिन वह वानर (जो असल में हनुमान जी थे) ने कहा, 'मैं बूढ़ा हो चुका हूं, खुद हिलने की शक्ति नहीं है। अगर जाना है तो तुम खुद मेरी पूंछ हटा लो।' भीम को क्रोध आ गया। उन्होंने सोचा कि एक वानर की पूंछ हटाना उनके लिए कौन सी बड़ी बात है।
भीम का टूटा घमंड
भीम ने अपनी पूरी शक्ति लगाकर वानर की पूंछ उठाने की कोशिश की, लेकिन पूंछ टस से मस नहीं हुई। 10 हजार हाथियों के बराबर बल रखने वाले भीम पसीने से तरबतर हो गए। उनका चेहरा उतर गया। तभी उन्हें एहसास हुआ कि यह कोई साधारण वानर नहीं है। भीम ने हाथ जोड़कर क्षमा मांगी और वानर से अपना परिचय पूछा।
हनुमान जी का असली रूप और आशीर्वाद
भीम के क्षमा मांगने पर हनुमान जी ने अपना विशाल रूप दिखाया। उन्होंने बताया कि वे भीम के बड़े भाई हैं, क्योंकि दोनों पवन पुत्र हैं। हनुमान जी ने भीम को समझाया कि शक्ति का उपयोग घमंड दिखाने या दूसरों को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि धर्म की रक्षा के लिए करना चाहिए। हनुमान जी ने भीम को अपना वह दिव्य रूप दिखाया, जो उन्होंने समुद्र लांघते समय धारण किया था। अंत में उन्होंने भीम को आशीर्वाद दिया कि महाभारत के युद्ध में वे अर्जुन के रथ पर ध्वजा के रूप में विराजमान रहेंगे और पांडवों की मदद करेंगे।
बुढ़वा मंगल का महत्व
मान्यता है कि हनुमान जी ने बुढ़े वानर का रूप धारण कर भीम के घमंड को दूर किया, वह दिन ज्येष्ठ माह का मंगलवार का था। इसके बाद से ही ज्येष्ठ मास के हर मंगलवार को बुढ़वा मंगल कहा जाने लगा। ज्येष्ठ मास के मंगलवार को मनाया जाने वाला बड़ा मंगल हनुमान भक्ति का विशेष पर्व है। इस दिन व्रत, पूजा और कीर्तन से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और संकटों से मुक्ति मिलती है। 5 मई 2026 को मनाया जाने वाला यह पहला बड़ा मंगल विशेष रूप से शुभ है।
यह कथा हमें सिखाती है कि चाहे कितनी भी शक्ति हो, घमंड कभी नहीं करना चाहिए। सच्ची शक्ति विनम्रता और धर्म में होती है। बड़ा मंगल के दिन हनुमान जी की पूजा करने से घमंड, अहंकार और बाधाएं दूर होती हैं। इस दिन भक्तों को विशेष रूप से हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए।




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