Purushottam maas: 27 सालों बाद ज्येष्ठ मास में अधिकमास, किस देवता की पूजा करें और क्या काम करें
Purushottam maas: इस साल ज्येष्ठ (जेठ) के मास में अधिक मास पड़ रहा है। ये बहुत ही शुभ संयोग है, इससे पहले 1999 में ऐसा संयोग पड़ा था, जब इस मास में अधिकमास पड़ा था। आपको बता दें कि अधिकमास को ही पुरुषोत्तम मास कहते हैं।

इस साल ज्येष्ठ (जेठ) के मास में अधिक मास पड़ रहा है। ये बहुत ही शुभ संयोग है, इससे पहले 1999 में ऐसा संयोग पड़ा था, जब इस मास में अधिकमास पड़ा था। आपको बता दें कि अधिकमास को ही पुरुषोत्तम मास कहते हैं। इसमें साल में एक महीना अधिक होता है। जिस साल यह मास होता है, उस साल सभी त्योहार 15-20 दिन लेट होते हैं। इस साल ज्येष्ठ मास आधा मांगलिक कार्यों के लिए शुभ है लेकिन आधे में मांगलिक कार्य नहीं होंगे। साल 2026 के 11 वर्षों बाद 2037 में फिर से ज्येष्ठ अधिक मास होने का संयोग पड़ेगा। इसके पहले वर्ष 1999 में मई-जून माह में ज्येष्ठ अधिकमास पड़ा था।
कब से लगेगा पुरुषोत्म मास, इस मास में क्या कार्य करें
इस साल पुरुषोत्म मास 17 मई से लगेगा। इस मास में भगवान विष्णु की पूजा का खास महत्व है, इसके साथ ही इस दिन सूर्य की भी पूजा करनी चाहिए। मास में रोज भागवत पुराण का पाठ करना चाहिए और विष्णु पुराण को सुनना चाहिए। इस मास में भगवान विष्णु की अराधना अधिक फल देती है। तीन काम इस मास में बहुत जरूरी है। सुबह सवेरे उठकर विष्णु जी की पूजा, भगवान विष्णु के अवतार बालगोपाल को अभिषेक कराएं, उन्हें माखन मि्श्री अर्पित करें। तुलसी जी की सेवा करें, सुबह शाम खास पूजा करें , उन्हें सुहाग का सामान अर्पित करें, शुबह शाम दीप जलाएं। तुलसी की अराधना इस मास में अधिक फल देने वाली बताई गई है। इस मास में सुबह उठकर सूर्य को जल अर्पित करें और शाम के समय पीपल के पेड़ में दीपक जलाएं। इससे विष्णु भगवान प्रसन्न होते हैं। पवित्र नदियों में स्नान भी इस मास में अधिक फल देता है। स्नान के बाद पितरों के लिए दान करें। इसके अलावा भगवान शिव का भी पंचामृत से अभिषेक करना उत्तम होता है। उनको चंदन का लेप लगाएं। दान के लिए इस मास में जूते, छाता, घड़ा, तिल, गुड़ अनाज और कपड़ों का दान उत्तम माना गया है। गाय की सेवा भी इस मास में अधिक फल देती है।
क्या है पुरुषोत्तम मास
ज्योतिषाचार्य पीके युग बताते हैं कि सौर वर्ष (लगभग 365 दिन और 5 घंटे) और चंद्र वर्ष (लगभग 358 दिन) के बीच लगभग 8 दिनों के अंतर को पूरा करने के लिए अधिकमास की व्यवस्था भारतीय पंचांगों में है। प्रत्येक तीन साल में हिन्दी माह का कोई एक माह अधिकमास या पुरुषोत्तम मास होता है। अधिक मास में मांगलिक कार्य भले नहीं हो, लेकिन इस महीने में पूजा-पाठ, तीर्थ यात्रा, कथा आदि का विशेष महत्व माना जाता है।




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