adhik maas 2026 why lord vishnu created extra month story of narasimha avatar hiranyakashyap vadh in malmas Adhik Maas 2026: हिरणकश्यप के वध के लिए भगवान विष्णु ने बनाना पड़ा था अधिकमास, जानिए पुरुषोत्तम मास का महत्व, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
More

Adhik Maas 2026: हिरणकश्यप के वध के लिए भगवान विष्णु ने बनाना पड़ा था अधिकमास, जानिए पुरुषोत्तम मास का महत्व

17 मई से 15 जून 2026 तक ज्येष्ठ माह का अधिक मास रहेगा। हिंदू पंचांग में करीब हर तीन साल में एक बार एक अतिरिक्त महीना आता है, जिसे अधिक मास या मलमास कहते हैं। इस महीने की पौराणिक कथा भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार और हिरण्यकश्यप के वध से जुड़ी है। आइए जानते हैं इनके बारे में।

Sun, 3 May 2026 01:46 PMNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
share
Adhik Maas 2026: हिरणकश्यप के वध के लिए भगवान विष्णु ने बनाना पड़ा था अधिकमास, जानिए पुरुषोत्तम मास का महत्व

हिंदू पंचांग में करीब हर तीन साल में एक बार एक अतिरिक्त महीना आता है, जिसे अधिक मास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। इस बार ज्येष्ठ मास में अधिक मास लग रहा है, जो 17 मई से 15 जून 2026 तक रहेगा। इस 13वें महीने की उत्पत्ति की पौराणिक कथा भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार और दैत्यराज हिरण्यकश्यप के वध से जुड़ी है।

हिरण्यकश्यप को मिला वरदान

महर्षि कश्यप और अदिति के पुत्र हिरण्यकश्यप ने ब्रह्मा जी की कठोर तपस्या से प्रसन्न कर लिया। उसने एक ऐसा वरदान मांगा जिससे वह लगभग अमर हो जाए। वरदान में उसने कहा कि उसकी मृत्यु ना किसी मनुष्य से हो, ना पशु से, ना देवता से, ना दैत्य से। ना दिन में, ना रात में। ना घर के अंदर, ना बाहर। ना पृथ्वी पर, ना आकाश में। ना किसी अस्त्र-शस्त्र से और ना ही ब्रह्मा जी द्वारा रचे 12 महीनों में से किसी में। ब्रह्मा जी ने 'तथास्तु' कह दिया।

वरदान मिलते ही हिरण्यकश्यप अहंकारी हो गया। उसने स्वर्ग पर कब्जा कर लिया और खुद को भगवान घोषित कर दिया।

प्रह्लाद की अटूट भक्ति

हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। पिता को यह बिल्कुल स्वीकार नहीं था। उसने प्रह्लाद को मारने के लिए कई क्रूर यातनाएं दीं - पहाड़ से नीचे गिराना, जहर पिलाना, पागल हाथी से कुचलवाना और होलिका के साथ आग में जलाना। लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद को कुछ भी नहीं हुआ।

नरसिंह अवतार और अधिक मास की उत्पत्ति

जब हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने की कोशिश की, तब भगवान विष्णु ने आधा इंसान और आधा सिंह का नरसिंह अवतार लिया। उन्होंने हिरण्यकश्यप को अपनी जांघ पर रखकर, संध्या काल में, घर के द्वार पर यानी ना अंदर ना बाहर, नखों से (यानी कोई अस्त्र-शस्त्र नहीं) उसका वध कर दिया।

लेकिन हिरण्यकश्यप का वरदान इतना मजबूत था कि उसका वध 12 महीनों में नहीं हो सकता था। इसलिए भगवान विष्णु ने साल का एक अतिरिक्त 13वां महीना रचा, जिसे अधिक मास कहा गया। इसी महीने नरसिंह अवतार ने हिरण्यकश्यप का वध किया। चूंकि यह मास भगवान विष्णु द्वारा अपने भक्त की रक्षा के लिए बनाया गया था, इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:वट सावित्री व्रत कब है? नोट कर लें डेट, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
ये भी पढ़ें:पुराना सामान घर ला रहे हैं, तो इस्तेमाल करने से पहले कर लें ये वास्तु उपाय

पुरुषोत्तम मास का महत्व

पुराणों के अनुसार, अधिक मास अत्यंत पवित्र होता है। इस मास में किए गए व्रत, दान, जप और सत्कर्म का लाख गुना फल मिलता है। इस बार ज्येष्ठ अधिक मास 17 मई से 15 जून 2026 तक चल रहा है, जो विशेष रूप से शुभ है।

इस मास में भगवान विष्णु और नरसिंह की पूजा का विशेष महत्व है। तुलसी, शालिग्राम और श्रीमद्भागवत कथा का पाठ बहुत फलदायी होता है। दान-पुण्य, तीर्थ यात्रा और सत्संग से पापों का नाश होता है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:कैसे होते हैं मूलांक 3 के लोग? गुरु है स्वामी ग्रह, जरूर करें ये उपाय

अधिक मास का संदेश

अधिक मास की कथा हमें सिखाती है कि जब अधर्म चरम पर पहुंचता है, तो भगवान स्वयं रक्षा के लिए अवतरित होते हैं। यह मास हमें याद दिलाता है कि सच्ची भक्ति और समर्पण हर बाधा को पार कर सकता है। इस पवित्र मास में की गई साधना ना सिर्फ इस जन्म में, बल्कि आने वाले जन्मों में भी शुभ फल देती है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

जानें लेटेस्ट Dharm News, Aaj ka Rashifal और सटीक Panchang की जानकारी। अपनी डेली पूजा के लिए यहाँ पढ़ें Shiv Chalisa, Hanuman Chalisa और Bajrang Baanहिंदू कैलेंडर 2026 की शुभ तिथियों के साथ अपने हर दिन को खास बनाएं!