2027 mein kin rashi par sade sati aur dhaiya rahegi shani ka kaisa rahega prabhav shani gochar effect 2027 में किन-किन राशियों पर रहेगी साढ़ेसाती और ढैय्या? जानें शनि का कैसा रहेगा प्रभाव और उपाय, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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2027 में किन-किन राशियों पर रहेगी साढ़ेसाती और ढैय्या? जानें शनि का कैसा रहेगा प्रभाव और उपाय

Shani sade sati and dhaiya: इस साल शनि गुरु (बृहस्पति) की मीन राशि में विराजमान रहेंगे। अगले साल यानी 2027 में शनि अपनी राशि में बदलाव करेंगे। शनि के राशि परिवर्तन से कुछ राशियों पर शनि की साढ़ेसाती शुरू होगी और कुछ पर ढैय्या का प्रभाव रहेगा। जानें 2027 में किस राशि पर साढ़ेसाती और ढैय्या रहेगी।

Mon, 15 June 2026 01:05 PMSaumya Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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2027 में किन-किन राशियों पर रहेगी साढ़ेसाती और ढैय्या? जानें शनि का कैसा रहेगा प्रभाव और उपाय

2027 mein kis rashi par sade sati and dhaiya: वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का समय कष्टकारक के साथ जीवन सुधारने वाला समय माना जाता है। कहा जाता है कि इस समय जातक को उसके कर्मों का वास्तविक फल प्राप्त होता है। इस समय शनि मीन राशि के गोचर में हैं। साल 2027 में शनि अपनी राशि में बदलाव करेंगे। पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, शनि गोचर से सीधे तौर पर पांच राशियां प्रभावित होंगी। शनि जब अपना स्थान या राशि बदलेंगे तो कुछ राशियों पर शनि की साढ़ेसाती प्रारंभ होगी और कुछ पर ढैय्या का प्रभाव रहेगा। जानें 2027 में किस राशि पर साढ़ेसाती का असर रहेगा और कौन-सी राशियां ढैय्या से प्रभावित होंगी। पंडित जी से जानें इन राशियों पर शनि का प्रभाव कैसा रहेगा।

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2027 में शनि का राशि परिवर्तन कब होगा:

पंचांग के अनुसार, शनि 03 जून 2027 को मीन राशि से निकलकर मेष राशि में आएंगे। शनि की अतिचारी चाल होने के कारण वह फिर से 20 अक्टूबर 2027 को मीन राशि में लौटेंगे। इसके बाद 23 फरवरी 2028 को पूर्णतया मेष राशि में गोचर कर जाएंगे।

क्या होती है शनि की साढ़ेसाती:

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि की साढ़े साती 7.5 वर्ष तक के लिए चलने वाली गोचर अवस्था है। जब शनि व्यक्ति की चंद्र राशि से 12वें भाव में प्रवेश करता है, तब शनि की साढ़ेसाती प्रारंभ होती है। शनि की साढ़ेसाती के तीन चरण (प्रथम, मध्य और अंतिम) होते हैं। प्रत्येक चरण 2.5 वर्ष का होता है।

2027 में किन राशियों पर साढ़ेसाती रहेगी:

पंडित उपाध्याय के अनुसार, कर्म फलदाता शनि 3 जून 2027 को मेष राशि में आएंगे। इसलिए 2 जून 2027 तक मेष, कुंभ और मीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव रहेगा। वर्तमान में मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है, मीन राशि पर दूसरा (मध्य चरण) और कुंभ राशि पर अंतिम (तीसरा) चरण चल रहा है।

03 जून 2027 को शनि जब मीन राशि से निकलकर मेष राशि में आएंगे, तब कुंभ राशि वालों को साढ़ेसाती से छुटकारा मिल जाएगा। शनि के मेष गोचर से वृषभ राशि साढ़ेसाती की चपेट में आ जाएगी। वृषभ राशि पर साढ़ेसाती का पहला चरण प्रारंभ होगा। इस तरह से 2027 में कुछ समय के लिए शनि की साढ़ेसाती मेष, कुंभ और मीन राशि पर रहेगी। जून 2027 से मेष, वृषभ और मीन राशि पर साढ़ेसाती का प्रभाव रहेगा।

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2027 में किस राशि पर शनि ढैय्या रहेगी:

इस समय सिंह और धनु राशि पर शनि ढैय्या का प्रभाव है। शनि जब मेष राशि में आएंगे, तब सिंह और धनु राशि को ढैय्या से मुक्ति मिल जाएगी और कन्या और मकर राशि पर शनि की साढ़ेसाती प्रारंभ होगी।

शनि ढैय्या क्या होती है:

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब शनि जातक की चंद्र राशि से चौथे या आठवें भाव में गोचर करते है, तब शनि ढैय्या प्रारंभ होती है। शनि ढैय्या को छोटी साढ़ेसाती भी कहा जाता है। ढैय्या की अवधि 2.5 वर्ष की होती है। इस दौरान व्यक्ति को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक तौर पर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

साढ़ेसाती और ढैय्या से पीड़ित राशियों पर शनि का प्रभाव:

पंडित उपाध्याय के अनुसार, 2027 में शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से पीड़ित राशियों को स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। मानसिक तौर पर दबाव बना रहेगा। खर्च की अधिकता मन को परेशान करेगी। अज्ञात भय सताएगा। वाहन प्रयोग में सावधानी बरतने की आवश्यकता है, चोट-चपेट लग सकती है। आय में कमी और खर्च में वृद्धि होने से कर्ज की स्थिति आ सकती है। कामकाज की अधिकता रहेगी। कार्यक्षेत्र में बाधाएं आ सकती हैं, तरक्की प्रभावित हो सकती है। रिश्तों में तनाव का सामना करना पड़ सकता है।

शनि के अशुभ प्रभाव कम करने के उपाय-

1. प्रत्येक शनिवार को शनि मंदिर जाकर दर्शन करें।

2. शनिवार को सरसों के तेल का दीपक पीपल के पेड़ की जड़ पर जलाएं और उसकी परिक्रमा करें।

3. शनिवार को काले वस्त्र, काले तिल, उड़द की दाल, लोहा और जूते आदि का दान करना चाहिए।

4. हनुमान जी की आराधना करें और प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए।

5. भगवान शिव की पूजा करें और शिवलिंग का जलाभिषेक करें।

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डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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