बंगाल की इन सीटों पर SIR ने पलट दी बाजी? जीत के अंतर से कहीं ज्यादा वोटर लिस्ट से हटाए गए नाम
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार बड़ा उलटफेर हो गया है। वहीं आंकड़ों पर गौर करें तो 50 सीटें ऐसी हैं जिनपर जीत हार के अंतर से ज्यादा नाम एसआईआर के दौरान वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे। ऐसी 25 सीटों पर बीजेपी और 25 पर टीएमसी की जीत हुई है।
पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जबरदस्त जीत और टीएमसी की करारी हार ने राजनीति के कई समीकरम ही हिलाकर रख दिए हैं। बंगाल की कई मुस्लिम बहुल सीटों पर भी बीजेपी के उम्मीदवारों ने बाजी मार ली है। टीएमसी नेताओं का कहना है कि पश्चिम बंगाल में इस जीत के पीछे एसआईआर भी बड़ी वजह है। आंकड़ों पर गौर करें तो ऐसी लगभग 50 सीटें हैं जहां वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों की संख्या जीत के अंतर से कहीं ज्यादा है। इनमें कुछ ऐसे भी नाम हैं जिनको वोटर लिस्ट में शामिल करने पर फैसला नहीं हुआ है और आवेदन ट्राइबन्यूनल में पेंडिंग हैं। वहीं 25 सीटों पर बीजेपी की जीत हुई है। पोल पैनल के डेटा के मुताबिक ऐसी 25 सीटों पर टीएमसी की भी जीत हुई है। ऐसे में बंगाल में ममता बनर्जी का किला ढहने के पीछे स्पष्ट तौर पर एसआईआर को वजह नहीं कहा जा सकता।
इस सीट पर केवल 179 वोटों से जीत गई बीजेपी
कई ऐसी भी विधानसभी सीटें हैं जहां जीत के अंतर से दो या तीन गुना ज्यादा नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं या फिर अभी शामिल नहीं हो पाए हैं। ऐसे में परिणामो को लेकर एसआईआर की भूमिका को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। चंपदानी विधानसभा सीट पर भदोही के रहन वाले दिलीप सिंह मात्र 179 वोटों से जीत गए। जबकि इस सीट पर एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान 7600 नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए थे।
करनदिघी विधानसभा सीट पर जीत का अंतर महज 19800 वोट था जबकि इस सीट पर 31,562 नाम काट गए थे। इसी तरह जंगीपुर सीट पर 36 हजार से ज्यादा नाम कटे थे जबकि जीत का अंतर 10,542 वोट ही था। मोंटेस्वर सीट पर जीत का अंतर 14 वोट है जबकि यहां 23 हजार से ज्यादा नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए थे। हेमटाबाद में 12,300 वोटों से हार जीत का फैसला हुआ है जबकि एसआईआर के दौरान 18 हजार से ज्यादा लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काटे गए थे।
इन सीटों पर हुई टीएमसी की जीत
दीनहाटा, उत्तर बंगाल के दार्जीलिंग सीट पर भी आंकड़े ऐसी ही स्थिति बता रहे है। कम कम ऐसी 25 सीटें टीएमसी के खाते में भी गई हैं जिनमें समशेरगंज, लालगोला, राघुनाथगंज, मानिकचक और सूती शामिल हैं। लालगोला में एसआईआर के दौरान 55 हजार से ज्यादा नाम काटे गए जबकि जीत-हार का अंतर 19 हजार वोट ही है।
वोट शेयर में केवल 5 फीसदी का अंतर
2021 के चुनावों में तृणमूल को 213 तथा भाजपा को 77 सीटों पर सफलता मिली थीं। इस बार राज्य में 6.8 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में से 92.93 प्रतिशत ने वोट डाले जो अब तक का रिकार्ड है। भाजपा का वोट करीब सात प्रतिशत बढ कर पिछले चुनाव के 38.15 प्रतिशत से बढ़ कर करीब 45.85 प्रतिशत के दायरे में आ गया है जबकि तृणमूल 48.02 का मत प्रतिशत से घट कर 40.79 प्रतिशत के आस पास आ गया है। इस तरह से बीजेपी और टीएमसी के वोट शेयर में केवल पांच फीसदी का अंतर है लेकिन बीजेपी की सीटे टीएमसी से ढाई गुना ज्यादा हैं।




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