शुभेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण के दौरान ही आया ममता बनर्जी का पोस्ट, 'उग्र राष्ट्रवाद' का किया जिक्र
शुभेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण के दौरान ही ममता बनर्जी ने गुरुदेव रवीेंद्रनाथ टैगोर को श्रद्धांजलि देते हुए एक ट्वीट किया। उन्होंने कहा कि टैगोर 'उग्र राष्ट्रवाद की उत्तेजना से ऊपर उठकर' संपूर्ण विश्व को एकता का संदेश देने वाले महामानव थे।

पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी की शपथ के साथ ही पहली बार राज्य में बीजेपी युग की शुरुआत हो गई है। जानकारी के मुताबिक कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित किए गए शपथ ग्रहण समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी आमंत्रित किया गया था। हालांकि ना तो वह खुद शपथ ग्रहण में पहुंचीं और ना ही टीएमसी का कोई अन्य नेता वहां मौजूद था। शपथ ग्रहण के दौरान ही उन्होंने ट्वीट करके गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर को श्रद्धांजलि दी।
ममता बनर्जी ने शनिवार को नोबेल पुरस्कार विजेता रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वह मानवता के लिए एकता का संदेश देने वाले और सदैव मार्गदर्शन करने वाले प्रकाशस्तंभ हैं। सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में बनर्जी ने कहा कि टैगोर का दर्शन बांग्ला भाषा, संस्कृति और विरासत के पुनर्जन्म का प्रतीक है।
उन्होंने लिखा, 'उनका गहन जीवन-दर्शन हमारी दैनिक यात्रा के लिए सदैव मार्गदर्शक प्रकाश बना हुआ है। उन्होंने हमें सिखाया कि विभाजन सत्य नहीं है, सत्य तो एकता है। टीएमसी सुप्रीमो ने कहा कि टैगोर 'उग्र राष्ट्रवाद की उत्तेजना से ऊपर उठकर' संपूर्ण विश्व को एकता का संदेश देने वाले महामानव थे। बनर्जी ने आशा व्यक्त की कि इस महाकवि के चिरंतन आदर्श, उनकी दूरगामी विचारधारा, जागृत चेतना और सृजनशील प्रतिभा विश्वभर के लोगों के मन में और भी प्रखर रूप से चमकती रहेगी।
बता दें कि ममता बनर्जी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने को तैयार ही नहीं थीं। इसके बाद राज्यपाल ने विधानसभा ही भंग कर दी। वहीं शुभेंदु कई वजहों से मुख्यमंत्री पद के हकदार माने जाते हैं। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी को पांच साल के अंतराल में दो बड़े चुनावी झटके दिए। पहला, 2021 के विधानसभा चुनाव में उनका गढ़ कहलाने वाले नंदीग्राम में। दूसरा, 2026 के विधानसभा चुनावों में ममता का "अभेद्य" गढ़ माने जाने वाले भवानीपुर में।
शुभेंदु की चुनावी जीत और बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक सफलता सुनिश्चित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका ने उन्हें राज्य में पार्टी के उल्लेखनीय उभार के प्रमुख वास्तुकारों में से एक के रूप में मजबूती से स्थापित किया।
विपक्ष के नेता के रूप में विधानसभा परिसर के भीतर तीखी विधायी लड़ाइयों से लेकर उग्र प्रदर्शनों तक, शुभेंदु ने ममता सरकार की नीतियों और कानूनों के खिलाफ भाजपा के अभियान में खुद को अग्रिम मोर्चे पर रखा। वह सदन में आक्रामक भाषणों और जोरदार हस्तक्षेपों के साथ अक्सर कार्यवाही के केंद्र में रहे।
हालांकि, उस उथल-पुथल भरे दौर में उन्हें विपरीत परिणाम भी भुगतने पड़े। तत्कालीन तृणमूल नेतृत्व के साथ बार-बार टकराव के चलते शुभेंदु और कई भाजपा विधायकों को विधानसभा से कई बार निलंबित किया गया।
कुछ निलंबन तत्कालीन सत्र की पूरी अवधि तक बरकरार रहे, जबकि अन्य भी अपने आप में लगभग उतने ही कठोर थे। फरवरी 2025 में ऐसा ही एक उदाहरण देखने को मिला, जब शुभेंदु को 30 दिन के लिए विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया, जो राज्य के विधायी इतिहास में उस अवधि को परिभाषित करने वाले राजनीतिक टकरावों की असाधारण तीव्रता को रेखांकित करता है।
सदन के बाहर सड़क पर भी शुभेंदु पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ भाजपा के विरोध-प्रदर्शनों में सबसे आगे रहे। साल 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद कथित हिंसा के खिलाफ प्रदर्शनों की कमान संभालने से लेकर राज्य सचिवालय 'नबान्न' की ओर मार्च का नेतृत्व करने और भ्रष्टाचार, बेरोजगारी तथा कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर कार्यकर्ताओं को लामबंद करने तक, शुभेंदु ने लगातार खुद को पार्टी के राजनीतिक अभियानों के केंद्र में रखा।




साइन इन