40 डिग्री पारे में सुलग रहा उत्तराखंड, 240 हेक्टेयर से ज्यादा जंगल जले; 1 की मौत
40 डिग्री से ज्यादा पारे के बीच उत्तराखंड के जंगल धधक रहे हैं। उत्तराखंड में एक ही दिन के भीतर 500 से ज्यादा फायर अलर्ट फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया ने जारी किए। अग्निकांड में एक की मौत हो गई।

Uttarakhand Forest Fire: पारा 40 डिग्री तक पहुंचने के साथ ही उत्तराखंड के जंगल धधकने लगे हैं। चमोली में जंगल की आग की चपेट में आने से एक फायर वाचर की मौत हो गई। गुरुवार को एक ही दिन में पांच सौ से ज्यादा फायर अलर्ट फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया ने जारी किए। प्रदेश में अब तक 240 हेक्टेयर से ज्यादा जंगल जल चुके हैं।
पिछले तीन-चार दिनों से तापमान बढ़ने के साथ गढ़वाल और कुमाऊं में जंगल जलने लगे हैं। गुरुवार सुबह छह बजे तक 310 फायर अलर्ट मिले। जबकि दोपहर में 172 अलर्ट दोबारा जारी हुए। प्रदेश में 31 जगह बड़ी वनाग्नि की घटनाओं के भी अलर्ट आए। अलर्ट के हिसाब से टिहरी और बागेश्वर में सबसे ज्यादा घटनाएं हुईं। वन विभाग सभी अलर्ट को मौके पर जाकर वेरिफाई कर रहा है।
आग बुझाने में गई फायर वाचर की जान
जंगल में आग बुझाने गए एक फायर वाचर की गहरी खाई में गिरने से मौत हो गई। पूरी रात चले सर्च अभियान के बाद एसडीआरएफ ने गुरुवार सुबह शव खाई से बरामद किया। बदरीनाथ के प्रभागीय वनाधिकारी सर्वेश दुबे ने बताया कि चमोली जिले के बेडूबगड़ बिरही क्षेत्र में बदरीनाथ हाईवे के समीप चीड़ के जंगल में आग लगी थी। आग बुझाने गए पाखी जलग्वाड़ निवासी फायर वाचर राजेंद्र सिंह नेगी पुत्र नंदन सिंह नेगी (42 वर्ष) झुलसकर गहरी खाई में जा गिरा।
आपात बैठक बुलाई
कुछ जिलों में वनाग्नि की बड़ी घटनाओं और फायर वाचर की मौत के बाद पीसीसीएफ रंजन मिश्रा ने सभी डीएफओ सहित तमाम अधिकारियों की आपात बैठक बुलाई। जिसमें सभी डीएफओ को फील्ड में उतरने और हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए। सभी उपकरण, कर्मचारी और फायर वाचरों को भी चौबीस घंटे तैयार रहने को कहा गया है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी वनाग्नि प्रबंधन के उपायों और घटनाओं की समीक्षा करेंगे।
आपदा प्रबंधन ने भी किया अलर्ट
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण यानी एनडीएमए ने भी फॉरेस्ट फायर को लेकर हाई अलर्ट जारी किया है। इसमें कहा गया है कि अगले कुछ घंटों में तापमान और बढ़ने की संभावना है। आपके आसपास जंगलों में आग की घटनाएं हो सकती हैं। ऐसे में सभी लोग अलर्ट रहें। ये मैसेज राज्य भर में लोगों के मोबाइलों पर भेजे गए हैं। साथ ही वन विभाग ने भी लोगों को सतर्क किया है।
चमोली में ग्रामीणों ने डीएफओ को घेरा
चमोली में जंगल में आग बुझाने गए फायर वाचर की मौत के बाद गुरुवार को स्थानीय लोगों के साथ ही जनप्रतिनिधियों ने डीएफओ का घेराव किया। लोगों ने प्रभावित परिवार को 50 लाख रुपये की मुआवजा राशि देने और मृतक की पत्नी को नौकरी देने की मांग को लेकर शव को उठाने से इनकार कर दिया।
गुरुवार को प्रदर्शनकारियों ने मौके पर मौजूद बदरीनाथ वन प्रभाग के डीएफओ का घेराव कर विरोध जताया। इसके बाद वन विभाग ने मृतक की पत्नी को आउट सोर्सिंग पर कुशल श्रमिक के रुप में नौकरी देने और विभिन्न माध्यमों से परिजनों को 30 लाख रुपये देने का लिखित आश्वासन दिया। इसके बाद परिजनों ने शव को उठाया। गुरुवार को सर्च ऑपरेशन के दौरान सुबह करीब सात बजे राजेंद्र सिंह का शव खाई में मिला। एसडीआरएफ की टीम शव को लेकर बिरही में बदरीनाथ हाईवे पर पहुंची। यहां पहले से मौजूद पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र भंडारी, राज्य आंदोलनकारी केके डिमरी व स्थानीय ग्रामीण एकत्रित हो गए। उन्होंने मुआवजा और नौकरी की मांग को लेकर डीएफओ को घेरा।
परिजनों को मिलेगी आर्थिक सहायता
डीएफओ दुबे ने बताया कि वनाग्नि घटना में मृत राजेंद्र सिंह के परिजनों को वनाग्नि बीमा योजना के तहत 10 लाख रुपये का बीमा मुआवजा दिया जाएगा। इसके अलावा नियमानुसार चार लाख रुपये आपदा राहत राशि से दिए जाएंगे। वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अपने एक दिन का वेतन भी आर्थिक सहायता के रूप में देंगे, जिसकी अनुमानित राशि करीब 15 लाख रुपये होगी। मृतक की पत्नी को वन विभाग में आउटसोर्सिंग से नौकरी भी दी जाएगी।
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