केंद्र ने SC में ऐसा क्या कहा, उत्तराखंड की 21 बिजली परियोजनाओं पर छा गया संकट
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया है कि अलकनंदा और भागीरथी नदी पर बांध नहीं बनाए जाएंगे। इसके बाद अब उत्तराखंड की 21 बिजली परियोजनाओं पर संकट छा गया है।

जल विद्युत परियोजनाओं पर केंद्र सरकार के ताजा रुख से उत्तराखंड में प्रस्तावित 21 प्रोजेक्ट को झटका लग सकता है। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दिए गए हलफनामे में कहा है कि अलकनंदा और भागीरथी पर अब नई परियोजनाएं नहीं बनाई जाएंगी। ये प्रस्तावित 21 प्रोजेक्ट धरातल पर उतरते तो 2,134 मेगावाट बिजली उत्पादन होता जो प्रदेश के साथ देश की ऊर्जा जरूरतों को भी पूरा करते।
अलकनंदा-भागीरथी पर बनने वाली 21 परियोजनाओं की प्रक्रिया करीब डेढ़ दशक से चल रही थी और केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय में लंबित थीं। इन सभी परियोजनाओं की डीपीआर और फॉरेस्ट क्लीयरेंस समेत अन्य प्रक्रियाओं में अब तक कुल 300 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इसमें 100 करोड़ उत्तराखंड सरकार ने खर्च किए हैं, जबकि शेष 200 करोड़ के करीब प्राइवेट प्लेयर्स के साथ ही केंद्र सरकार के उपक्रम खर्च कर चुके हैं।
केंद्र को 1066 मेगावाट बिजली का नुकसान: नई परियोजनाओं पर रोक से खुद केंद्र को 1066 मेगावाट बिजली की क्षति होगी। एनएचपीसी-एनटीपीसी को पांच बिजली प्रोजेक्ट पर काम करना था। वहीं, यूजेवीएनएल के सात प्रोजेक्ट से 666.5 मेगावाट बिजली उत्तराखंड को मिलनी थी। नौ हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट प्राइवेट कंपनियों को बनाने थे। इससे 402.10 मेगावाट बिजली मिलनी थी। केंद्र और निजी कंपनियों के बनाए जाने वाले प्रोजेक्ट से उत्तराखंड को अलग से 12 प्रतिशत फ्री बिजली मिलनी थी।
मांग और उत्पादन में अंतर: प्रदेश की मांग और उत्पादन में बड़ा अंतर है। मौजूदा मांग 60 मिलियन यूनिट पहुंच गई है। राज्य का अपना उत्पादन करीब 15 मिलियन यूनिट ही है। शेष मांग पूरी करने के लिए उत्तराखंड को सेंटर पूल, एनर्जी बैंकिंग और एक्सचेंज की बिजली पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
इन परियोजनाओं से होना था बिजली का उत्पादन
भिलंगना 2सी 21 मेगावाट, बावला-नंद प्रयाग से 300, देवसारी से 252, नंदप्रयाग लंगासू-100, भिलंगना 2ए से 24, भिलंगना 2बी से 24, मलखेत से 24.3, देवली-13, काली गंगा-5, कोट बूढ़ा केदार से 6, लता तपोवन से 171, भ्यूंदार गंगा से 24.3, खिराओगंगा-4, अलकनंदा-300, कोटलीभेल वन ए से 195, कोटलीभेल 1बी से 320, तमकलता से 190, झलककोटी-12.5, उर्गम-2 से 7.5, झेलम तमक-128, स्वारीगाड़-2
प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम का कहना है कि केंद्र के ताजा रुख के बाद आगे की योजना उसी हिसाब से होगी। नए सिरे से अध्ययन किया जाएगा। उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए अब नए विकल्पों पर विचार करेंगे। गंगा के अलावा दूसरी नदियों, जहां पर किसी भी प्रकार का व्यवधान नहीं होना है, उन पर विचार किया जाएगा।
आर्थिक नुकसान
अलकनंदा-भागीरथी पर नई बिजली परियोजनाएं नहीं बनाए जाने के इस फैसले को विशेषज्ञों ने उत्तराखंड ही नहीं, देश के लिहाज से भी दुर्भाग्यपूर्ण बताया। पूर्व जीएम-ऊर्जा निगम राजेंद्र प्रसाद जमलोकी ने बताया कि ऊर्जा प्रदेश अपनी ही बिजली की मांग पूरी नहीं कर पा रहा। इससे केंद्र सरकार पर ही अतिरिक्त भार बढ़ रहा है।
आपूर्ति का संकट
इलेक्ट्रिक वाहन-उपकरणों की बढ़ती मांग के बीच बढ़ती खपत से राज्य की बिजली की मांग बढ़ रही है। इसे पूरा करने के लिए हर साल आठ हजार करोड़ से अधिक बिजली खरीद पर खर्च हो रहे। नई परियोजनाओं से प्रदेश न केवल अपनी मांग पूरी करता, देशभर की जरूरतों को पूरा करता। सरकार को अब सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करनी चाहिए।
रिपोर्ट- रवि बीएस नेगी
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