Two senior IPS officers in Uttarakhand oppose lower-rank central deputation in High Court ‘मी लॉर्ड हमने अप्लाई भी नहीं किया’; डेपुटेशन के खिलाफ उत्तराखंड HC पहुंचे 2 IPS अफसर, Uttarakhand Hindi News - Hindustan
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‘मी लॉर्ड हमने अप्लाई भी नहीं किया’; डेपुटेशन के खिलाफ उत्तराखंड HC पहुंचे 2 IPS अफसर

उत्तराखंड कैडर के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के दो वरिष्ठ अफसरों नीरू गर्ग और अरुण मोहन जोशी ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में अपने वर्तमान रैंक से निचले पद पर डेपुटेशन को चुनौती देते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।

Sat, 14 March 2026 12:05 PMPraveen Sharma नैनीताल, पीटीआई
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‘मी लॉर्ड हमने अप्लाई भी नहीं किया’; डेपुटेशन के खिलाफ उत्तराखंड HC पहुंचे 2 IPS अफसर

उत्तराखंड कैडर के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के दो सीनियर अफसरों नीरू गर्ग और अरुण मोहन जोशी ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में अपने वर्तमान रैंक से निचले रैंक पर डेपुटेशन को चुनौती देते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। दोनों ही अधिकारी वर्तमान में उत्तराखंड पुलिस में पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) के पद पर कार्यरत हैं।

चीफ जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की डिवीजन बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से इस मामले में जवाब तलब किया है। याचिका के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक आदेश के तहत 2005 बैच की आईपीएस अफसर नीरू गर्ग को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) के रूप में तैनात किया गया है, जबकि 2006 बैच के आईपीएस अधिकारी अरुण मोहन जोशी को सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में डीआईजी के पद पर नियुक्त किया गया है।

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निचले रैंक पर ट्रांसफर सेवा नियमों के विरुद्ध

याचिकाकर्ताओं ने यह कहते हुए डेपुटेशन को चुनौती दी कि उन्होंने कभी सेंट्रल डेपुटेशन के लिए आवेदन नहीं किया और ना ही इसके लिए अपनी सहमति दी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि डीआईजी जैसे निचले रैंक पर ट्रांसफर या डेपुटेशन सेवा नियमों के भी विरुद्ध है।

राज्य सरकार ने इच्छा विरुद्ध केंद्र सरकार को भेजे नाम

याचिका में कहा गया कि अधिकारियों ने पहले ही सेंट्रल डेपुटेशन के लिए अनिच्छा व्यक्त की थी और इसकी वजह से उन्हें पांच वर्ष के लिए सेंट्रल डेपुटेशन से वंचित भी कर दिया गया था। इसके बावजूद, राज्य सरकार ने 16 फरवरी 2026 को उनके नाम केंद्र सरकार को भेज दिए, जिसके बाद उनके डेपुटेशन के ऑर्डर जारी किए गए।

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राज्य सरकार ने दी ये दलील

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि अगर अधिकारियों को इस फैसले पर आपत्ति है तो उन्हें सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) का रुख करना चाहिए था। हालांकि, याचिकाकर्ताओं के वकील ने यह दलील दी कि चूंकि डेपुटेशन का प्रस्ताव राज्य सरकार की ओर से भेजा गया था इसलिए इस मामले को हाईकोर्ट के समक्ष लाना उचित है।बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद राज्य सरकार को इस मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

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