एंजेल चकमा मौत मामले में नया मोड़, पुलिस बोली- नस्लीय भेदभाव का मामला ही नहीं
उत्तराखंड के देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा पर हुए हमले को नस्लीय नहीं माना जा सकता। पुलिस के अनुसार, मजाक में की गई अपमानजनक टिप्पणियों से यह गलत धारणा बनी कि छात्र को निशाना बनाया जा रहा है। देहरादून के एसएसपी ने कहा कि यह नस्लीय टिप्पणी की श्रेणी में नहीं आता है।

उत्तराखंड के देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा पर हुए हमले को नस्लीय नहीं माना जा सकता। पुलिस के अनुसार, मजाक में की गई अपमानजनक टिप्पणियों से यह गलत धारणा बनी कि छात्र को निशाना बनाया जा रहा है। देहरादून के एसएसपी ने कहा कि यह नस्लीय टिप्पणी की श्रेणी में नहीं आता, क्योंकि घटना में शामिल युवक भी उसी राज्य का निवासी है।
देहरादून के एसएसपी अजय सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि मामले की गहन जांच के लिए एक विशेष पुलिस टीम गठित की गई है। उन्होंने मृतक के भाई माइकल के इस दावे को खारिज कर दिया कि हमला नस्लीय मकसद से किया गया था।
गिरफ्तार पांच लोगों में से एक मणिपुर का निवासी
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए पांच लोगों में से एक मणिपुर का निवासी है। अधिकारी ने यह भी बताया कि अब तक की जांच में जानबूझकर नस्लीय भेदभाव के दावों का समर्थन करने वाले कोई सबूत नहीं मिले हैं। उत्तराखंड पुलिस ने देहरादून में नस्लीय टिप्पणी के बाद कथित तौर पर हमले का शिकार हुए त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की मौत के सिलसिले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है।
एंजेल और उसके भाई को गलतफहमी हुई
पुलिस ने आगे बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने जांचकर्ताओं को बताया कि घटनास्थल पर की गई कुछ टिप्पणियां उनके समूह के ही किसी सदस्य के लिए थीं। उन्होंने दावा किया कि ये टिप्पणियां माइकल या उसके भाई के लिए नहीं थीं। उन दोनों को गलतफहमी हुईं।
एसएसपी ने बताया कि पूछताछ के दौरान कई तरह की जानकारियां जुटाई गईं। पता चला कि आरोपियों में से एक मणिपुर का निवासी है। उसने बताया कि वह अपने दोस्तों के साथ एक छोटी सी पार्टी कर रहा था। पार्टी के दौरान उनके बीच कुछ हंसी-मजाक वाली बातें हुईं। इन टिप्पणियों को कुछ गलत तरीके से समझा गया और पीड़ित पक्ष ने इसमें हस्तक्षेप करने की कोशिश की। उनसे ऐसा नहीं करने को कहा गया तो बात बढ़ गई।
झड़प के दौरान चाकू से हमला
बता दें कि 9 दिसंबर को एंजेल चकमा और उनके भाई मिशेल का कुछ स्थानीय लोगों और पूर्वोत्तर के एक युवक से झगड़ा हो गया, जिन्होंने कथित तौर पर नस्लीय टिप्पणी की थीं। जब दोनों भाइयों ने इसका विरोध किया तो उनके बीच झड़प शुरू गई। इसी दौरान उन पर चाकू और कड़े से हमला किया गया। माइकल के सिर पर पर वार किया गया, जबकि एंजेल को गर्दन और पेट पर चाकू से वार किया गया। 24 साल के एंजेल चकमा की 26 दिसंबर को मौत हो गई।
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