परीक्षा केंद्र के नीचे तहखाना, वाईफाई कनेक्ट और गैंग ऐक्टिव; SSC एग्जाम में हाईटेक नकल
देहरादून में एसएससी एग्जाम के दौरान हाईटेक नकल का भंडाफोड़ हुआ है। परीक्षा केंद्र में तहखाना बनाया था। वाई-फाई कनेक्ट के साथ ही गैंग एक्टिव हो जाता था। हर उम्मीदवार को पास कराने के लिए 10-10 लाख फिक्स थे।

SSC Exam Cheating Expose: देहरादून में स्टाफ सलेक्शन कमीशन (एसएससी) की ऑनलाइन परीक्षा में हाईटेक तरीके से नकल कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। दून के एमकेपी इंटर कॉलेज स्थित सेंटर महादेव डिजिटल जोन में दो फीट गहरा गड्ढा खोदकर वाईफाई प्रॉक्सी सर्वर बनाया गया था। इसके जरिये कहीं और बैठे सॉल्वर अभ्यर्थियों के पेपर सॉल्व कर रहे थे। पूछताछ में पता चला कि यह गिरोह परीक्षा में पास कराने के बदले 10-10 लाख रुपये में सौदा तय करता था।
एसटीएफ ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर सेंटर को सील कर दिया है। शनिवार को आईजी एसटीएफ एवं साइबर नीलेश भरणे ने उत्तराखंड एवं यूपी एसटीएफ की ओर से की गई संयुक्त कार्रवाई की जानकारी पत्रकारों को दी। उन्होंने बताया कि 13 फरवरी को एसएससी की मल्टी टॉस्किंग स्टाफ व कस्टम और नार्कोटिक्स ब्यूरो में हवलदार भर्ती की परीक्षा चल रही थी। एसटीएफ को सूचना मिली थी कि कुछ लोग परीक्षा पास कराने का ठेका ले रहे हैं। इस सूचना पर दोनों प्रदेशों की एसटीएफ टीम ने एमकेपी इंटर कॉलेज स्थित महादेव डिजिटल जोन पर छापा मारा।
परीक्षा केंद्र के भीतर तहखाना
एमकेपी इंटर कॉलेज के परिसर में जिस महादेव डिजिटल सेंटर में हाईटेक तरीके से पेपर सॉल्व कराने का भंडाफोड़ एसटीएफ ने किया, वह बेहद ही हैरान करने वाला है। गिरोह ने परीक्षा केंद्र के भीतर तहखाना बनाया था। जो अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र में पेपर देने आता था, वह केवल कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठ जाता था और चैंबर में रखे लैपटॉप से वाईफाई के जरिए इंटरनेट कनेक्शन ले लेता। परीक्षा में इंटरनेट पूरी तरह बंद रहता है। तहखाने में रखे दो लैपटॉप में अभ्यर्थियों के कंप्यूटरों के आईपी एड्रेस का पूरा ब्योरा होता था। उसी से कनेक्ट कर आईपी एड्रेस दूसरे शहरों में बैठे सॉल्वरों को उपलब्ध करा दिए जाते थे। जिस पर पेपर सॉल्व कर सबमिट कर दिया जाता था।
इंटरनेट बंद, गड्ढे से सिस्टम सपोर्ट
नियमों के तहत 15 मिनट पहले ही पेपर ऑनलाइन संबंधित संस्था एजेंसी को उपलब्ध कराती है। इसके बाद सेंटर में इंटरनेट बंद कर दिया जाता है ताकि नकल ना हो सके। गड्ढे में रखे लैपटॉपों से अभ्यर्थियों के लैपटॉप को कनेक्ट कर इंटरनेट सपोर्ट दिया जाता था।
भास्कर, नीतीश ने उलझाया, कंपनी अफसर तलब
चैंबर कब बनाया गया? कब से यह धंधा चल रहा था? मैनेजर भास्कर नैथानी और तकनीशियन नीतिश से पूछताछ में यह स्पष्ट नहीं हो पाया है। इंस्पेक्टर एनके भट्ट के मुताबिक भास्कर ने बताया कि उसे किसी भटनागर ने नौकरी पर रखा था लेकिन जो कागजात मिले हैं, उनमें भास्कर को ही ऑनर दिखाया गया है। नीतिश ने भी कहा कि वह ढाई तीन महीने पहले यहां आया था। उससे पहले ही गड्ढा यहां बना हुआ था। अब एडुकेटी कंपनी के नोडल अधिकारी को दिल्ली से बुलाया गया है, इनका मुख्यालय बेंगलुरू में है। सोमवार को पूछताछ में ही सब स्पष्ट होगा।
सौ अभ्यर्थी एसटीएफ की जांच के घेरे में फंसे
सेंटर में 100-100 अभ्यर्थियों की परीक्षा के लिए चार लैब बनी है। एक लैब खराब पड़ी है। शुक्रवार को यहां पर 100 अभ्यर्थियों की परीक्षा थी। कितने अभ्यर्थियों से पेपर सॉल्व करने का सौदा हुआ था, यह फिलहाल जांच का विषय है। सभी सौ अभ्यर्थी एसटीएफ की जांच के घेरे में आ रहे हैं। आईजी भरणे के मुताबिक अभ्यर्थियों से पूछताछ की जा रही है।
उम्मीदवार और सॉल्वर की भूमिका
सेंटर में इंटरनेट बंद होता है लेकिन अभ्यर्थी चैंबर वाले वाईफाई से कंप्यूटर को कनेक्ट कर लेता था। इससे उसके सिस्टम का कंट्रोल दूर बैठे सॉल्वर को मिल जाता था। इसके बाद वह स्क्रीन देखता था, खुद कुछ नहीं करता था। जमीन के नीचे बने गड्ढे में लैपटॉप और राउटर के जरिये गुप्त इंटरनेट नेटवर्क तैयार किया गया। उसी से अभ्यर्थी के कंप्यूटर को इंटरनेट और रिमोट एक्सेस मिलता था। यहीं से पूरे कनेक्शन और डेटा का कंट्रोल होता था। दूसरे स्थान (दूसरे शहर/कमरे) में बैठकर गड्ढे में बने वाईफाई सिस्टम के जरिये अभ्यर्थी के कंप्यूटर का एक्सेस अपने लैपटॉप पर लेकर पेपर को सॉल्व करता था।
सीएम और डीजीपी ने सराहा
नकल माफिया के खिलाफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त आदेशों और पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ के निर्देशन में एसटीएफ लगातार कार्रवाई कर रही है। सीएम एवं डीजीपी ने टीम को सराहा है। आरोपियों के खिलाफ कोतवाली दून में आईटी एक्ट, उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (नकल विरोधी) अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
ऐसे पकड़े गए आरोपी
सीओ आरबी चमोला और इंस्पेक्टर नंदकिशोर भट्ट की अगुवाई में पुलिस टीम ने एमकेपी इंटर कॉलेज स्थित महादेव डिजिटल जोन पर छापा मारा। तलाशी में टीम यूपीएस रूम के एक कोने में पहुंची। वहां दो फीट गहरा एवं दो फीट चौड़ा एक अंडरग्राउंड चैंबर (गड्ढा) बना मिला। गड्ढे में दो लैपटॉप और राउटर ऑटोमैटिक चल रहे थे। इन्हीं लैपटॉप के जरिए अभ्यर्थियों के कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस लेकर बाहर से पेपर हल किया जा रहा था। पुलिस ने आरोपी मैनेजर भास्कर नैथानी निवासी नथुवावाला देहरादून, तकनीकी कार्य कर रहे नीतीश निवासी भाटपार रानी देवरिया (यूपी) हाल निवासी नांगलोई दिल्ली को गिरफ्तार किया। यह सेंटर बेंगलरू की कंपनी एडुकेटी द्वारा सेंटर संचालित किया जा रहा था।
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