डीजल-पेट्रोल के बाद खाद्य पदार्थ महंगे होने की चिंता
डीजल और पेट्रोल की कीमतों में तीन-तीन रुपये का इजाफा होने से स्थानीय लोगों में महंगाई का डर बढ़ गया है। फल-सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने की आशंका है, जिससे गृहिणियों को घर के बजट को लेकर चिंता है। हालांकि, युद्ध के बाद स्थितियों में सुधार की उम्मीद भी जताई जा रही है।

डीजल-पेट्रोल के दाम में तीन-तीन रुपये का इजाफा होते ही स्थानीय लोगों को एक बार फिर महंगाई बढ़ने का डर सता रहा है। पहले ही हाथों से बाहर जा चुकी फल-सब्जी और अन्य खाद्य पदार्थ खरीदना उन्हें मुश्किल लग रहा है। सवारी वाहनों के किराये में भी बढ़ोतरी की आशंका के बीच रोजाना सफर करने वाले नौकरी-पेशा लोगों के चेहरों पर भी सिकन नजर आ रही है। स्थानीय लोगों की मानें तो डीजल-पेट्रोल की दर बढ़ने का सीधा असर खाद्य पदार्थों पर होता है। मालवाहक वाहनों की ढुलाई महंगी होने से फल-सब्जी आदि खाद्य पदार्थों के दाम में भी अक्सर उछाल आया है।
खासक गृहिणी महिलाएं ज्यादा परेशान हैं। उन्हें घर की रसोई का बजट भी बिगड़ने की आशंका सता रही है। हालांकि, खाड़ी देशों युद्ध के बाद उपजे इन हालातों में सुधार की उम्मीद भी स्थानीय लोगों को है। महिलाओं का कहना है कि युद्ध जैसे हालात शांत होने के साथ ही डीजल-पेट्रोल आयात के रास्ते पूरी तरह से खुलने पर सरकार डीजल-पेट्रोल के दामों में रियायत भी दे सकती है, लेकिन फिलहाल एकाएक बढ़े डीजल-पेट्रोल के दरों ने मुश्किलों को जरूर बढ़ा दिया है।
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