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ऋषिकेश के रघु ने 5 लोगों को दिया नया जीवन, ग्रीन कॉरिडोर से दिल्ली-चंडीगढ़ भेजे गए अंग

सड़क हादसे में ब्रेन डेड घोषित हुए 42 वर्षीय रघु पासवान के परिजनों ने अंगदान कर मिसाल पेश की है। ग्रीन कॉरिडोर के जरिए उनके अंगों को दिल्ली और चंडीगढ़ भेजकर पांच गंभीर मरीजों को नई जिंदगी दी गई।

Sat, 24 Jan 2026 08:24 AMAnubhav Shakya हिन्दुस्तान, ऋषिकेश
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ऋषिकेश के रघु ने 5 लोगों को दिया नया जीवन, ग्रीन कॉरिडोर से दिल्ली-चंडीगढ़ भेजे गए अंग

सड़क हादसे का शिकार हुए ऋषिकेश निवासी 42 वर्षीय रघु पासवान पांच लोगों को नया जीवन दे गए। ब्रेन डेड घोषित होने के बाद परिवार ने उनके अंगों को दान करने का फैसला किया। इन अंगों को एम्स ऋषिकेश से ग्रीन कॉरिडोर के जरिये से शुक्रवार को दिल्ली और चंडीगढ़ पहुंचाया गया।

एम्स ऋषिकेश के प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. भारत भूषण के मुताबिक शुक्रवार को रघु के अंगों को निर्धारित समय में जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाने के लिए उत्तराखंड, यूपी और दिल्ली के नौ जिलों की पुलिस की मदद से ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया गया। पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती तीन मरीजों को किडनी, लीवर और पैन्क्रियाज ग्रीन कॉरिडोर से भेजे गए। वहीं, एम्स दिल्ली में भर्ती मरीज को किडनी और आर्मी हॉस्पिटल आरआर दिल्ली में भर्ती मरीज को हार्ट जौलीग्रांट से सेना के विमान से भेजे गए। डॉ. भारत ने बताया कि रघु ने अपनी आंखें भी दान की हैं। उनकी दोनों कॉर्निया को एम्स के आई बैंक में सुरक्षित रखवा दिया गया है। एम्स के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. श्रीलॉय मोहंती ने बताया कि एक हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के बाद रघु काएम्स में भर्ती किया गया था। सर्जरी से पहले ही रघु नॉन रिवर्सिवल कोमा में चले गए।

न्यूरो सर्जरी के विभागाध्यक्ष प्रो. रजनीश अरोड़ा ने बताया कि प्रयासों के बावजूद जब वे कोमा से बाहर नहीं आए, तो विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमेटी ने उन्हें गुरुवार को ब्रेन डेड घोषित कर दिया था। मूल रूप से बिहार निवासी रघु राजमिस्त्री का काम करते थे।

ग्रीन कॉरिडोर से भेजे अंग

ग्रीन कॉरिडोर एक विशेष रूप से तैयार अस्थायी मार्ग है, जिसका उपयोग चिकित्सा आपात स्थिति, खासकर प्रत्यारोपण के लिए मानव अंगों को एक से दूसरे अस्पताल तक भेजने में किया जाता है।

  • यातायात प्रबंधन: पुलिस और यातायात विभाग तय मार्ग को यातायात मुक्त कराते हैं। सिग्नलों को नियंत्रित कर एंबुलेंस को बिना रुके गुजरने की सुविधा दी जाती है।
  • समय की बचत: इस व्यवस्था से यात्रा समय में कमी आती है। कई मामलों में यात्रा 60 से 70 प्रतिशत तक कम समय में पूरी हो गई।
  • समन्वय: अस्पताल, पुलिस, यातायात पुलिस और जरूरत पड़ने पर एयरपोर्ट प्रशासन का सहयोग लिया जाता है।

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एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने बताया कि एम्स ऋषिकेश में केडवरिक ऑर्गन डोनेशन का यह दूसरा मामला है। इससे पहले दो अगस्त 2024 को हरियाणा निवासी 25 वर्षीय कांवड़िये के अंगदान की प्रक्रिया भी सकुशल संपन्न हुई थी।

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