Rampur Tiraha Firing Case Uttarakhand High Court Slams CBI Seeks Status Report in 15 days रामपुर तिराहा गोलीकांड की जांच पर HC सीबीआई से क्यों हुआ नाराज, 15 दिन की मोहलत दी, Uttarakhand Hindi News - Hindustan
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रामपुर तिराहा गोलीकांड की जांच पर HC सीबीआई से क्यों हुआ नाराज, 15 दिन की मोहलत दी

Rampur Tiraha Firing Case: उत्तराखंड आंदोलन के लिए 2 अक्टूबर 1994 को हुए रामपुर तिराहा गोलीकांड को लेकर हाई कोर्ट सीबीआई से नाराज नजर आया। सुनवाई के दौरान अदालत ने सीबीआई से केस की रिपोर्ट तलब की।

Wed, 6 May 2026 08:54 AMGaurav Kala नैनीताल
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रामपुर तिराहा गोलीकांड की जांच पर HC सीबीआई से क्यों हुआ नाराज, 15 दिन की मोहलत दी

Rampur Tiraha Firing Case: उत्तराखंड हाई कोर्ट ने राज्य आंदोलन के दौरान हुए बहुचर्चित रामपुर तिराहा कांड से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए जांच की मौजूदा स्थिति पर सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वह 15 दिनों के भीतर मुजफ्फरनगर के तत्कालीन जिलाधिकारी अनंत कुमार से जुड़े मामले की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करे।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता और उत्तराखंड आंदोलनकारी अधिवक्ता मंच के अध्यक्ष रमन शाह ने अदालत को बताया कि पूर्व में भी सीबीआई को इस मामले की स्थिति बताने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब तक न तो उत्तर प्रदेश सरकार और न ही सीबीआई की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई गई है। सीबीआई की ओर से अदालत से इस संबंध में समय की मांग की गयी जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया और 15 दिन की मोहलत दे दी।

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सुनवाई के दौरान सीबीआई ने बताया कि उत्तराखंड राज्य गठन से पहले यह मामला सुप्रीम कोर्ट में गया था, जहां से इसे इलाहाबाद हाई कोर्ट को ट्रांसफर किया गया। बाद में उत्तराखंड हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार के माध्यम से फाइलें देहरादून से मुजफ्फरनगर स्थानांतरित कर दी गईं। एजेंसी ने मौजूदा स्थिति स्पष्ट करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की।

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ट्रांसफर आदेश को चुनौती

इस मामले में रमन शाह ने देहरादून की सीबीआई अदालत द्वारा केस को मुजफ्फरनगर ट्रांसफर करने के आदेश को चुनौती दी है। उनका कहना है कि इस तरह के स्थानांतरण से न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। गौरतलब है कि सीबीआई ने इस मामले में पहले धारा 304 (गैर-इरादतन हत्या) के तहत चार्जशीट दाखिल की थी, लेकिन अदालत ने इसे गंभीर मानते हुए धारा 302 (हत्या) में संज्ञान लिया था।

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सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था मामला

याचिकाकर्ता ने पहले इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन शीर्ष अदालत ने उन्हें हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की अनुमति दी। इसके बाद यह मामला उत्तराखंड हाईकोर्ट में लंबित है।

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