मां ने बेटे का हत्यारा ढूंढा तो SI पर कार्रवाई के आदेश, फाइनल रिपोर्ट खारिज; कोर्ट ने दोबारा जांच करने को कहा
उत्तराखंड में एक बेबस मां के संघर्ष की जीत हुई है। बेटे की मौत के मामले में पुलिस की लगाई गई फाइनल रिपोर्ट (एफआर) को अदालत ने खारिज कर दिया है। अदालत ने न सिर्फ मामले की दोबारा जांच के आदेश दिए हैं, बल्कि लापरवाही से जांच में सब इंस्पेक्टर के खिलाफ कार्रवाई के लिए एसएसपी को निर्देशित किया है।

उत्तराखंड में एक बेबस मां के संघर्ष की जीत हुई है। सड़क हादसे में 18 साल के बेटे क्षितिज चौधरी की मौत के मामले में प्रेमनगर पुलिस की लगाई गई फाइनल रिपोर्ट (एफआर) को अदालत ने खारिज कर दिया है। चतुर्थ अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट साहिस्ता बानों की अदालत ने न सिर्फ मामले की दोबारा जांच के आदेश दिए हैं, लापरवाही से जांच में विवेचक (सब इंस्पेक्टर) के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए एसएसपी को भी निर्देशित किया है।
अदालत ने एफआर की पत्रावली का अवलोकन करने के बाद पाया कि ललिता चौधरी ने अपनी आपत्ति में दुर्घटना करने वाले डंपर का नंबर और उसके मालिक का नाम स्पष्ट रूप से बताया था। इसके बावजूद एफआर लगाने वाले विवेचक अमित कुमार शर्मा ने इस दिशा में कोई जांच नहीं की। अदालत ने अपने आदेश में इसे अत्यंत आपत्तिजनक और कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही माना है।
महत्वपूर्ण तथ्यों को दरकिनार कर दिया
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि विवेचक ने महत्वपूर्ण तथ्यों को दरकिनार कर मात्र औपचारिकताओं के सहारे अंतिम रिपोर्ट पेश कर दी। ललिता चौधरी की ओर से अदालत में अधिवक्ता अमित तोमर ने मजबूती से पैरवी की। उन्होंने कोर्ट को बताया कि 16 फरवरी 2024 को हुए इस हादसे के बाद जब पुलिस ने जादू की छड़ी न होने का ताना देकर हाथ खड़े कर दिए थे, तब मृत क्षितिज की मां ने खुद सीसीटीवी फुटेज निकाले, आरटीओ कार्यालय के चक्कर काटे और डेढ़ साल की कड़ी मशक्कत के बाद उस अज्ञात वाहन को ढूंढ निकाला। इसके बावजूद विवेचक ने साक्ष्यों को नजरअंदाज करते हुए मामले में एफआर लगा दी थी।
विवेचक पर भी कार्रवाई
न्याय की गुहार लगा रही मां की अनदेखी करना पुलिस महकमे को भारी पड़ा है। कोर्ट ने आदेश की एक प्रति वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून को प्रेषित करते हुए विवेचक उपनिरीक्षक अमित कुमार शर्मा के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। हालांकि उनसे पहले इस मामले की जांच अन्य दरोगा भी कर चुके हैं। अंतिम रिपोर्ट अमित कुमार ने दाखिल की।
एसएचओ की निगरानी में नये सिरे से जांच होगी
कोर्ट ने प्रेमनगर थाना प्रभारी को आदेशित किया है कि वह इस मामले में स्वयं अथवा अपने अधीनस्थ किसी अन्य सक्षम अधिकारी से दोबारा जांच कराएं। महिला की ओर से सौंपे गए डंपर के नंबर को अब इस जांच का प्रमुख हिस्सा बनाया जाएगा।
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