Panchayats Revived 10 Hectares Forest in Pauri Uttarakhand 12 Dried Water Springs Come Back to Life उत्तराखंड के पौड़ी में पंचायतों का कमाल; पसीने से सींचा 10 हेक्टेयर जंगल, 12 सूखे जलस्रोत फिर जीवित, Uttarakhand Hindi News - Hindustan
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उत्तराखंड के पौड़ी में पंचायतों का कमाल; पसीने से सींचा 10 हेक्टेयर जंगल, 12 सूखे जलस्रोत फिर जीवित

उत्तराखंड के पौड़ी में वन पंचायतों ने कमाल कर दिया। कड़ी मेहनत के बल पर सात पंचायतों ने 10 हेक्टेयर जंगल को सींचकर हरा-भरा कर दिया। इस मेहनत का नतीजा यह है कि वर्षों से सूखे 12 जलस्रोत भी जीवित हो उठे हैं।

Mon, 16 Feb 2026 08:11 AMGaurav Kala राजू वर्मा, रामनगर
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उत्तराखंड के पौड़ी में पंचायतों का कमाल; पसीने से सींचा 10 हेक्टेयर जंगल, 12 सूखे जलस्रोत फिर जीवित

उत्तराखंड के पौड़ी जिले में सात वन पंचायतों ने सामुदायिक सहभागिता की मिसाल पेश की। इससे न केवल पर्यावरण की सूरत बदली, बल्कि पलायन और सूखे की मार झेल रहे गांव-जंगलों की जान लौट आई। ग्रामीणों और वन प्रभाग रामनगर के संयुक्त प्रयासों से विकसित 10 हेक्टेयर का घना जंगल पारिस्थितिक संरक्षण का उत्कृष्ट मॉडल बन गया है।

रामनगर के नैनीडांडा रेंज के अंतर्गत सात वन पंचायतों जोगीड़ा पल्ला, जोगीड़ा वला, केलधार, टेटगांव, मोक्षण, गुनिया मोक्षण और उनियाल मोक्षण के ग्रामीणों ने सहभागिता से वन संरक्षण और संसाधन प्रबंधन का कार्य किया है। डीएफओ मनीष जोशी ने बताया कि वर्षों पहले इन पंचायतों में अत्यधिक दबाव और सीमित वनस्पति के कारण वन क्षेत्र का क्षरण हो रहा था। इस समस्या को दूर करने के लिए वर्ष 2011-2012 में 10 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बांज, बुरांश, काफल, तेजपात, पद्म आदि प्रजातियों के पौधे लगाए गए थे।

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जंगल का सबसे बड़ा चमत्कार

इस जंगल का सबसे बड़ा चमत्कार जल संरक्षण के रूप में सामने आया है। डीएफओ मनीष जोशी के अनुसार, जंगल में नमी बढ़ने से वर्षों से सूखे पड़े 12 से अधिक प्राकृतिक जलस्रोत फिर से जीवित हो उठे हैं। नैनीडांडा रेंज के रेंजर तपन अधिकारी ने बताया कि 10 हेक्टेयर में विकसित जंगल वन्य जीवों के लिए अनुकूल बन गया है। इससे आसपास के प्राकृतिक वनों पर पड़ने वाला दबाव भी कम हुआ है। इस क्षेत्र में बढ़ी वनस्पति ने वन्य जीवों को बेहतर आवास उपलब्ध कराया है।

पौड़ी में पंचायतों का कमाल

वर्षों से सूखे 12 जलस्रोत फिर से जीवित

इस जंगल का सबसे बड़ा चमत्कार जल संरक्षण के रूप में सामने आया है। डीएफओ मनीष जोशी के अनुसार, जंगल में नमी बढ़ने से वर्षों से सूखे पड़े 12 से अधिक प्राकृतिक जलस्रोत फिर से जीवित हो उठे हैं। नैनीडांडा रेंज के रेंजर तपन अधिकारी ने बताया कि 10 हेक्टेयर में विकसित जंगल वन्य जीवों के लिए अनुकूल बन गया है। इससे आसपास के प्राकृतिक वनों पर पड़ने वाला दबाव भी कम हुआ है। इस क्षेत्र में बढ़ी वनस्पति ने वन्यजीवों को बेहतर आवास उपलब्ध कराया है।

इन इलाकों में भी हरियाली बढ़ाने की तैयारी

इस सफल प्रयोग को देखते हुए अब धूमकोट, नैनीडांडा, रिंगलान, कुमाऊं की सल्ट आदि रेंजों की 540 वन पंचायतों में भी इसी तरह जंगल विकसित करने का काम जल्द शुरू किया जाएगा। इससे इन क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाई जाएगी।

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