Nurse Pooja Honoured by President served 15 Years as a Life Guardian on Uttarakhand Mountain Trails राष्ट्रपति से सम्मान पाने वाली पूजा, 15 वर्षों तक पहाड़ की पगडंडियों पर ‘प्राण प्रहरी’, Uttarakhand Hindi News - Hindustan
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राष्ट्रपति से सम्मान पाने वाली पूजा, 15 वर्षों तक पहाड़ की पगडंडियों पर ‘प्राण प्रहरी’

उत्तराखंड की दुर्गम और खड़ी पहाड़ियों में 15 वर्षों तक लोगों के लिए प्राण प्रहरी रही नर्स पूजा को राष्ट्रपति सम्मान मिला है। उन्होंने अपने कर्तव्य के आगे कभी हिम्मत नहीं हारी। 

Wed, 13 May 2026 08:05 AMGaurav Kala अरविंद थपलियाल, उत्तरकाशी, हिन्दुस्तान
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राष्ट्रपति से सम्मान पाने वाली पूजा, 15 वर्षों तक पहाड़ की पगडंडियों पर ‘प्राण प्रहरी’

उत्तराखंड में उत्तरकाशी के दुर्गम नौगांव क्षेत्र में तैनात एएनएम पूजा परमार राणा ने 15 वर्षों तक पहाड़ की कठिन राहों को कर्मभूमि बनाकर मातृ-शिशु स्वास्थ्य की मिसाल गढ़ी। सात किलोमीटर तक की खड़ी चढ़ाई चढ़कर टीकाकरण और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने वाली पूजा को वर्ष 2026 का राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार मिला है। उन्होंने कोरोना काल में गर्भवती होने और पूरे परिवार के कोविड पॉजिटिव होने के बावजूद अपना कर्तव्य नहीं छोड़ा और अपने इलाके में 100 फीसदी कोरोना वैक्सीनेशन पूरा किया।

राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार

उत्तराखंड में जहां पहाड़ों से पलायन की कहानियां आम हैं, वहीं नौगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की एएनएम पूजा ने विपरीत परिस्थितियों में डटे रहकर सेवा की नई परिभाषा लिखी। बच्चों और गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा को अपना मिशन बनाकर उन्होंने पगडंडियों और जंगल के रास्तों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं की लौ जलाए रखी। मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस पर दिल्ली में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें वर्ष 2026 का राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार प्रदान किया।

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हिन्दुस्तान से खास बातचीत

यह सम्मान उनके वर्षों के समर्पण, साहस और सेवा का राष्ट्रीय स्वीकार है। अपने आयुर्वेद फार्मासिस्ट पति आनंद राणा एवं बच्चों संग दिल्ली पहुंची पूजा ने ‘हिन्दुस्तान’ से फोन पर विशेष बातचीत की। पूजा ने अपनी 15 वर्ष की नौकरी में पूरे सेवाभाव से बच्चों और गर्भवतियों की देखभाल की। टीकाकरण के साथ सुरक्षित प्रसव के लिए बेहतर काम किया। पहाड़ के दूरस्थ इलाकों व ऊंची चढ़ाई चढ़कर हजारों जिंदगियां बचाईं।

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दुर्गम पहाड़ों में नौकरी

पूजा बताती हैं कि कंडाऊ, रस्टाडी जैसे दुर्गम क्षेत्र में दो वर्ष पहले तक सड़क नहीं थी। तब आशाओं के साथ सात किमी की खड़ी चढ़ाई चढ़कर जाना होता था। जाने में 5-6 घंटे लग जाते थे, पर कभी थकान नहीं मानी। भौंती का रास्ता खतरों से भरा व जंगल के बीच से था, वहां भी जाते। उनकी उपलब्धि पर सीएमओ डॉ.बीएस रावत, सीएमएस डॉ.रोहित भंडारी ने उन्हें बधाई दी।

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100 फीसदी लोगों को लगाई कोरोना की वैक्सीन

कोरोनाकाल में जनवरी 2021 में जब वैक्सीनेशन शुरू हुआ तब पूजा गर्भवती थीं। इसके बावजूद उन्होंने टीकाकरण की कमान संभाली और क्षेत्र की हजारों की आबादी को टीका लगाकर सुरक्षित किया। पूजा का परिवार मूलत: खान्सी बड़कोट में रहता है। उनके पति आरोग्य मंदिर कुआँ बड़कोट में तैनात हैं। कोरोनाकाल में उन्हें पति का पूरा सहयोग मिला। उस वक्त उनका पूरा परिवार कोविड पॉजिटिव हो गया था। पूजा का एक बेटा उर्वक्ष और बेटी अनाघा हैं। उनके पिता कृषक गिरबीर सिंह परमार और मां शकुंतला देवी ने पांच बहनों को पढ़ाया। पूजा ने रानीपोखरी से 2008 बैच में एएनएम किया। पूजा गर्भवती महिलाओं के पोषण के लिए खुद अपने स्तर से मदद करती हैं।

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