उत्तराखंड में 210 स्थानों पर एक साथ लोक अदालतें, जानें- ऑनलाइन केस कैसे दर्ज होगा
उत्तराखंड में अब एक साथ 210 स्थानों पर लोक अदालतों का आयोजन होगा। जमीन की लड़ाई अब घर बैठे लड़ी जा सकेगी। जानें- ऑनलाइन केस कैसे दर्ज कर सकते हैं

उत्तराखंड में आम जनता को त्वरित और सुलभ न्याय दिलाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल ‘न्याय आपके द्वार’ अब जमीनी स्तर पर असर दिखाने लगी है। इसी कड़ी में प्रदेश के सभी 13 जनपदों में एक साथ 210 स्थानों पर राजस्व लोक अदालतों का आयोजन किया जा रहा है। पहले दिन पांच हजार से अधिक वाद निपटाए गए।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य लोगों को अदालतों के चक्कर से राहत दिलाना और न्याय प्रक्रिया को सरल बनाना है। इन लोक अदालतों में भूमि विवाद, आबकारी, खाद्य, स्टांप, सरफेसी एक्ट, गुंडा एक्ट, सीआरपीसी, विद्युत अधिनियम, वरिष्ठ नागरिक अधिनियम और रेंट कंट्रोल एक्ट से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जा रहा है। सरकार का दावा है कि इस पहल से न केवल लंबित मामलों का बोझ कम होगा, बल्कि आम जनता का समय और संसाधन भी बचेंगे।
पहले दिन पांच हजार से ज्यादा वाद निपटाए
प्रदेश के सभी 13 जिलों में 210 स्थानों पर एक साथ राजस्व लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिसमें लगभग 6,933 वादों की सुनवाई हुई और 5322 वादों का निस्तारण किया गया।
ऑनलाइन केस कैसे दर्ज होगा
राजस्व विभाग के आरसीसीएमएस पोर्टल ऑनलाइन केस दर्ज कराया जा सकेगा। पोर्टल पर इसके लिए अलग विंडो होगी। संबंधित व्यक्ति को आवेदन को खसरा, खतौनी के विवरण के साथ संबंधित कोर्ट चुनते हुए अपलोड करना होगा। कोर्ट के पेशकार इसकी जांच करेंगे। दस्तावेज पूरे होने पर आवेदक को सूचना और वाद फीस के भुगतान का लिंक भेजा जाएगा। दस्तावेज पूरे न होने पर यदि केस स्वीकृत नहीं होता है तो आवेदन को उसे अपडेट करने के लिए भी सूचित किया जाएगा।
घर बैठे जमीन की लड़ाई
उत्तराखंड में भूमि संबंधी विवादों में जल्द ही घर बैठे आसानी से केस दर्ज कराया जा सकेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली (आरसीसीएमएस) को आम लोगों के लिए और सुविधाजनक बनाने के निर्देश दिए। उम्मीद की जा रही है एक महीने के भीतर ऑनलाइन केस दर्ज करने की सुविधा शुरू हो जाएगी।
विरासत पर तुरंत मिलेगा वारिसाना हक
अविवादित विरासत के मामलों में भू-स्वामी की मृत्यु के बाद परिवार को तेरहवीं, पीपलपानी पर ही नई खतौनी मिल जाएगी। तय समय पर म्यूटेशन केस निस्तारित करने होंगे। मुख्यमंत्री ने अफसरों को निर्देश दिए कि अविवादित विरासत के मामलों में भू-स्वामी की मृत्यु के बाद ही तय समय पर कार्रवाई की जाए। निर्धारित समयसीमा के भीतर नामांतरण सुनिश्चित किया जाए। मृतक की तेहरवीं, पीपलपानी तक वारिसों के नाम नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कर नई खतौनी परिवार को उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही उन्होंने विवादित भूमि की पैमाइश और कब्जों से संबंधित मामलों को एक माह के भीतर निस्तारित करने के निर्देश दिए। मालूम हो कि डीएम नैनीताल ललित मोहन रयाल मॉडल ने नैनीताल में यह प्रयोग शुरू किया था।
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