Khamenei Death Sparks Outrage Shia muslims protest in Haridwar and Dehradun US and Israel Effigies Burnt खामेनेई की मौत पर देहरादून से हरिद्वार तक मातम और गुस्सा, सड़कों पर उतरे शिया मुसलमान, Uttarakhand Hindi News - Hindustan
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खामेनेई की मौत पर देहरादून से हरिद्वार तक मातम और गुस्सा, सड़कों पर उतरे शिया मुसलमान

खामेनेई की मौत पर उत्तराखंड के शिया मुसलमानों में मातम और गुस्सा देखने को मिला। देहरादून और विकासनगर में प्रदर्शन हुआ तो हरिद्वार में मदरसे में अमन की दुआ मांगी गई।

Mon, 2 March 2026 07:58 AMGaurav Kala देहरादून/हरिद्वार
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खामेनेई की मौत पर देहरादून से हरिद्वार तक मातम और गुस्सा, सड़कों पर उतरे शिया मुसलमान

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की इजरायली हमले में मौत की खबर ने उत्तराखंड के शिया समुदाय और मुस्लिम संगठनों को गहरे शोक और आक्रोश में ला दिया है। देहरादून से लेकर मंगलौर और विकासनगर तक, इस घटना को लेकर रविवार के दिन जबरदस्त विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। शिया समुदाय ने खामेनेई को 'शहीद' करार देते हुए अमेरिका और इजरायल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जगह-जगह आयोजित मजलिसों में गमगीन माहौल के बीच लोगों की आंखें नम दिखीं, तो वहीं सड़कों पर उमड़ी भीड़ ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों की हत्या बताया। इस विरोध की सबसे बड़ी झलक मंगलौर में दिखी, जहां महिलाएं हाथों में पोस्टर लेकर सड़क पर जुलूस लेकर निकलीं। मदरसों में शांति की दुआ भी मांगी गई।

देहरादून में मजलिस का आयोजन

राजधानी देहरादून के ईसी रोड स्थित इमामबारगाह और मस्जिद में रविवार को अंजुमन मोईनुल मोमिनीन की ओर से एक विशेष शोकसभा (मजलिस) का आयोजन किया गया। इमाम मौलाना शहंशाह हुसैन जैदी ने कहा कि अयातुल्लाह खामेनेई ने जीवनभर मजलूमों की आवाज उठाई और उनकी शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी।

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इंदर रोड स्थित इमामबारगाह में भी भारी भीड़ उमड़ी। मौलाना रजा शाह कुम्मी ने खामेनेई की तुलना ऐतिहासिक बलिदानों से करते हुए कहा कि उन्होंने 'वक्त के यजीद' (अत्याचारियों) के सामने कभी घुटने नहीं टेके। समुदाय के लोगों का कहना है कि यह दुख इतना गहरा है कि उन्हें मुहर्रम के 'आशूरा' जैसे दिन का अहसास हो रहा है। कार्यक्रम में अंजुमन सदर कल्बे हैदर और सचिव सिकंदर अली नकवी समेत समाज के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

मातमी जुलूस में गूंजे अमेरिका-इजरायल विरोधी नारे

विकासनगर के अंबाड़ी क्षेत्र में शिया समुदाय ने विशाल मातमी जुलूस निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया। दोपहर की नमाज के बाद शुरू हुआ यह जुलूस नेशनल हाईवे से होते हुए ईदगाह तक पहुंचा। प्रदर्शनकारियों ने इजरायल और अमेरिका को 'इंसानियत का दुश्मन' करार दिया। स्थानीय धर्मगुरुओं ने कहा कि खामेनेई केवल ईरान के नहीं, बल्कि दुनिया भर के कमजोर और गरीब लोगों के रहनुमा थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल ने मिलकर एक नेक बंदे की हत्या की है जो दुनिया में अमन का पैगाम दे रहे थे।

मंगलौर में सड़कों पर उतरी महिलाएं

मंगलौर के मोहल्ला पठानपुरा और हल्का में विरोध प्रदर्शन का एक अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला। आमतौर पर सार्वजनिक प्रदर्शनों से दूर रहने वाली सैकड़ों महिलाएं काली पट्टियां बांधकर और हाथों में खामेनेई की तस्वीरें लेकर सड़कों पर उतर आईं। मौलाना इस्तखार हुसैन के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में युवाओं और बुजुर्गों ने 'अमेरिका-इजरायल मुर्दाबाद' के नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना था कि यह एक सोची-समझी साजिश है, जिसे मुस्लिम जगत कभी स्वीकार नहीं करेगा।

हरिद्वार में युद्ध विराम के लिए दुआ

हरिद्वार के ज्वालापुर में मदरसा अरबिया दारुल उलूम रशीदिया में मानवता के पक्ष में दुआ मांगी गई। मदरसा प्रबंधक मौलवी आरिफ और मुस्लिम स्कॉलर नईम कुरैशी के नेतृत्व में ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव को समाप्त करने की प्रार्थना की गई। उन्होंने कहा कि रमजान के पाक महीने में निर्दोष नागरिकों का खून नहीं बहना चाहिए और दुनिया के किसी भी कोने में जंग नहीं होनी चाहिए।

अयातुल्लाह खामेनेई की मौत के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी पुलिस सतर्क है। शिया समुदाय के इस आक्रोश और शोक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि खामेनेई का प्रभाव सीमाओं से परे एक आध्यात्मिक और राजनीतिक मार्गदर्शक के रूप में था। फिलहाल, पूरे प्रदेश में शोकसभाओं और विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है।

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