Justice for Ankita bhandari Two Sisters from Uttarakhand Send Letter Written in Blood to President अंकिता दीदी को न्याय दीजिए, उत्तराखंड की दो बहनों ने राष्ट्रपति को अपने खून से लिखा पत्र भेजा, Uttarakhand Hindi News - Hindustan
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अंकिता दीदी को न्याय दीजिए, उत्तराखंड की दो बहनों ने राष्ट्रपति को अपने खून से लिखा पत्र भेजा

Justice for Ankita bhandari: अंकिता भंडारी हत्याकांड में बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। उत्तराखंड की दो बहनों ने अपने खून से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर भेजा है। पत्र में लिखा है- अंकिता दीदी को न्याय दिलाइए।

Tue, 6 Jan 2026 01:08 PMGaurav Kala लाइव हिन्दुस्तान, अल्मोड़ा
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अंकिता दीदी को न्याय दीजिए, उत्तराखंड की दो बहनों ने राष्ट्रपति को अपने खून से लिखा पत्र भेजा

Justice for Ankita bhandari: अंकिता भंडारी हत्याकांड को लोगों में गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। 2022 में हुए इस सनसनीखेज हत्याकांड को लेकर वायरल ऑडियो-वीडियो प्रकरण पर उग्र प्रदर्शन चल रहा है। वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है कि अंकिता भंडारी ने किसी वीवीआईपी को एक्स्ट्रा सर्विस देने से इनकार कर दिया था। जिसके बाद उसकी हत्या कर दी गई। मामले में अब उत्तराखंड के अल्मोड़ा में दो नाबालिग बहनों ने अपने खून से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखा है। पत्र में बहनों ने राष्ट्रपति को लिखा है- अंकिता दीदी को न्याय दिलाइए।

अंकिता भंडारी केस में नए खुलासों के बाद लोगों का आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है। अब अल्मोड़ा जिले की सल्ट की दो नाबालिग बहनों ने खून से राष्ट्रपति को खत भेजा है। अंकिता के हत्यारों को सजा दिलाने की मांग की है। साथ ही यह भी पूछा है कि क्या वीआईपी लोगों को अपराध करने छूट है?

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राष्ट्रपति से पूछा- क्या वीआईपी को अपराध की छूट?

पत्र भेजने वाली कुसुमलता बौड़ाई व उनकी बहन सल्ट विधानसभा के भिकियासैंण तहसील निवासी हैं। दो माह पूर्व भिकियासैंण में हुए ऑपरेशन स्वास्थ्य आंदोलन में वह संयोजिका की भूमिका निभा चुकी हैं। उनकी बहन संजना हाईस्कूल की छात्रा हैं। इस समय वह काशीपुर में रह रही हैं। दोनों ने खून से लिखे दो अलग-अलग पत्र काशीपुर एसडीएम के माध्यम से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजे हैं। पत्र में राष्ट्रपति से सवाल पूछा है कि क्या वीआईपी लोगों को अपराध करने की छूट है?

पत्र में मांग- देश की बेटी को न्याय चाहिए

दोनों बहनों ने सीधा सवाल पूछा है कि जब देश की एक बेटी को न्याय नहीं मिलता, तो बाकी बेटियां खुद को सुरक्षित कैसे महसूस करें? आरोप लगाया है कि अंकिता भंडारी केस में सबूतों को नष्ट करने की कोशिशें और प्रभावशाली लोगों को संरक्षण देने की आशंकाएं न्याय की राह में रोड़ा बन रही हैं। उन्होंने कहा कि ‘जांच चल रही है’ जैसे जुमलों से अब जनता को और अधिक नहीं बहलाया जा सकता। यह पत्र उस हताशा और आक्रोश का प्रतीक है, जो उत्तराखंड के लोगों में अंकिता केस के बाद से लगातार गहराता जा रहा है। दोनों बहनों ने यह पत्र उप जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजा है।

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