अंकिता भंडारी केस पर बवाल के बीच खुलकर बोले CM पुष्कर धामी, दुष्यंत गौतम पर भी दिया जवाब
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सीएम पुष्कर धामी ने पहली बार खुलकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि वायरल ऑडियो-वीडियो की सत्यता की जांच जरूरी है। सीएम धामी ने भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री दुष्यंत गौतम पर भी जवाब दिया।

अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर गुस्सा उत्तराखंड से देश तक फैल रहा है। दिल्ली में प्रवासियों ने अंकिता को इंसाफ के लिए मार्च निकाला तो पूरे उत्तराखंड में मामले की सीबीआई जांच की मांग हो रही है। यह पूरा मामला तीन साल बाद इसलिए उठा है, क्योंकि पिछले दिनों इस हत्याकांड से जुड़ा एक ऑडियो-वीडियो वायरल हुआ था। ऑडियो में दावा किया गया कि यह बातचीत पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर उनकी कथित पत्नी उर्मिला सनावर के बीच थी। अब इस प्रकरण पर उत्तराखंड सीएम पुष्कर सिंह धामी खुलकर सामने आए हैं। उन्होंने हत्याकांड पर दुख जताया और कहा कि इसके दोषियों को आजीवन कारावास की सजा मिल चुकी है। अब इस वायरल ऑडियो-वीडियो के बाद यह मामला फिर उठाया जा रहा है। उन्होंने ऑडियो-वीडियो की सत्यता पर सवाल उठाते हुए प्रश्न किया कि वे दोनों बातचीत में कभी हत्या बताते हैं तो कभी आत्महत्या...।
सीएम पुष्कर सिंह धामी मंगलवार को देहरादून में भारत सरकार की जीरामजी योजना के बारे में बात कर रहे थे। पत्रकारवार्ता के दौरान उनसे अंकिता भंडारी केस को लेकर सवाल उठाया गया। जवाब में धामी ने कहा कि मुझसे मेरे मीडिया मित्रों ने कहा था कि इस प्रकरण पर बोलना चाहिए। अंकिता हत्याकांड की जांच उस समय एसआईटी में आईपीएस रेणुका के नेतृत्व में की गई थी। आईपीएस रेणुका वहीं हैं, जो हाल ही में सीबीआई में शामिल हुई हैं। उन्होंने कहा कि उस समय भी हमने इस केस पर अखबार में विज्ञापन निकाला था और कहा था कि इस केस की कोई भी जानकारी किसी के पास हो तो वह हमें या न्यायालय में जमा सकता है। एसआईटी ने उस समय इस केस की पूरी तत्परता से जांच की और तीनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दिलाई।
अगर हमारे महामंत्री जेल जा रहे हैं... तो क्या नाम नहीं बताएंगे
सीएम धामी ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि अंकिता भंडारी को इंसाफ दिलाने के लिए हमने पूरा संघर्ष किया। दोषियों को एक दिन भी जेल से बाहर नहीं आने दिया। उन्हें उम्रकैद की सजा दिलाई। उन्होंने आगे कहा, “सोचकर देखिए, मेरे बगल में प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट बैठे हैं, दूसरी तरफ महामंत्री। अगर किसी मामले में इन्हें सजा हो रही है। अगर हमारे महामंत्री जेल जा रहे हैं... तो क्या नाम नहीं बताएंगे? उन आरोपियों को नाम बताने चाहिए थे। इसके बावजूद भी यह प्रकरण आया है और यह बेहद गंभीर मामला है। आपको क्या लगता है कि एक नाम बोल दिया ऑडियो में... ऐसा ही मामला पेपर लीक में भी हुआ था। हमें क्या लगता है कि पेपर लीक में भी इसी तरह का ऑडियो आता है, नाम बताया जाता है। हंगामा किया जाता है। हमें क्या लगता है कि अंकिता की आत्मा को इस तरह से... प्रदेश में हंगामा किया जाता है। ऐसा तो नहीं कि जमीन तलाशी जा रही है? मुझे लगता है कि राजनीति करने के और भी रास्ते हैं।”
हमारे प्रभारी जी ने सब वेरिफाई कर दिया हैः धामी
सीएम धामी ने आगे कहा, "हमारे प्रभारी जी (दुष्यंत गौतम) ने पुलिस में सब वेरिफाई कर दिया। उन्होंने सबूत के साथ बता दिया कि वे 10 तारीख से लेकर 20 तारीख तक उत्तराखंड में ही नहीं थे। अगर आरोप लगाने वालों के पास कुछ है तो वे भागे क्यों हैं? हम इसी मामले की जांच कर रहे हैं कि आखिर मामला क्या है? हमने जांच शुरू कर दी है। वे फोन बंद करके चुप बैठे हैं। मैं सुरेश राठौर से कहता हूं कि वे आएं और सबूत पेश करें।"
ऑडियो-वीडियो की सत्यता की जांच जरूरी
धामी ने आगे कहा कि उस समय भी हाई कोर्ट, सुप्रीमकोर्ट में सीबीआई जांच की मांग उठी थी, लेकिन अगर न्यायालय को अगर ऐसा लगता कि एसआईटी जांच में कुछ भी रह गया है तो सीबीआई जांच के आदेश तब ही दे दिए जाते। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण को लेकर हाल ही में ऑडियो-वीडियो वायरल हुए हैं। इनकी सत्यता जरूरी है, क्योंकि कोई भी कभी भी किसी का भी नाम घसीट सकता है। बिना सत्यता के इन्हें माना नहीं जा सकता। हमने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत एसआईटी गठित की और जांच शुरू कर दी है। हम लगातार आग्रह कर रहे हैं कि अगर इस तरह का कोई भी सबूत है तो एसआईटी को सौंपा जाए ताकि मामले की गहनता से जांच हो सके।
कभी हत्या तो कभी आत्महत्या बताते हैंः धामी
धामी ने आगे कहा कि अगर उनकी बातों में जरा भी सच्चाई है तो वे सामने आएं और भागे नहीं। सबूत दें। हम निश्चित तौर पर जांच करेंगे और दोषी कोई भी हो, उसके खिलाफ ऐक्शन लेंगे। आरोप लगाया कि उत्तराखंड में भ्रम की स्थिति पैदा करके वे दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं। यह कैसी सच्चाई है? ऑडियो मैंने भी सुना है... कभी कहते हैं कि मैं प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में था। कभी कहते हैं कि उसकी हत्या हुई तो कभी आत्महत्या बताते हैं... अगर इस तरह का भ्रम न्यायालय में पेश किया जाए तो संभव है कि इससे दोषियों को ही लाभ होगा।
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