गंगा एक्सप्रेसवे से पास आया प्रयागराज, अब हरिद्वार तक विस्तार; इन दो रूट पर हो रहा विचार
Ganga Expressway: गंगा एक्सप्रेसवे को मेरठ से आगे बढ़ाकर हरिद्वार तक ले जाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। उत्तराखंड मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने बताया कि दो संभावित रूट्स पर विचार किया जा रहा है।

Ganga Expressway: उत्तर प्रदेश में देश के सबसे महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के साथ अब इसकी अगली बड़ी दिशा हरिद्वार विस्तार पर फोकस बढ़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरदोई के मल्लावां में इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करते हुए साफ संकेत दिया कि इसे मेरठ से आगे बढ़ाकर हरिद्वार तक ले जाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। यह विस्तार न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि उत्तराखंड के लिए भी गेमचेंजर साबित हो सकता है।
करीब 36,230 करोड़ रुपये की लागत से तैयार गंगा एक्सप्रेसवे ने फिलहाल मेरठ से प्रयागराज के बीच यात्रा को बेहद आसान बना दिया है। जहां पहले इस दूरी को तय करने में 10 से 12 घंटे लगते थे, वहीं अब यह सफर करीब 6 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। यह एक्सप्रेसवे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जैसे 12 प्रमुख जिलों को जोड़ता है। लेकिन इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसका प्रस्तावित हरिद्वार विस्तार है, जो इसे और अधिक रणनीतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण बना देगा।
हरिद्वार तक एक्सप्रेसवे के लिए दो संभावित रूट्स
उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने बताया कि हरिद्वार तक एक्सप्रेसवे ले जाने के लिए दो संभावित रूट्स पर विचार किया जा रहा है। पहला रूट मेरठ से तिगरी होते हुए सीधे हरिद्वार तक पहुंचने का है, जबकि दूसरा विकल्प अपर गंगा कैनाल के समानांतर एक्सप्रेसवे विकसित करने का है। उत्तराखंड सरकार ने भी इस परियोजना को प्राथमिकता देते हुए मुख्य सचिव स्तर पर अधिकारियों को सर्वे कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। जैसे ही अंतिम एलाइनमेंट तय होगा, इस विस्तार को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
गंगा एक्सप्रेसवे विस्तार के बड़े फायदे
इस विस्तार के कई बड़े फायदे सामने आ सकते हैं। सबसे अहम फायदा धार्मिक पर्यटन को मिलेगा। हर साल लाखों श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचते हैं, लेकिन ट्रैफिक और लंबी यात्रा समय एक बड़ी चुनौती रहता है। एक्सप्रेसवे बनने के बाद दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी यूपी से हरिद्वार का सफर काफी तेज और सुगम हो जाएगा। इससे न सिर्फ श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी, बल्कि होटल, ट्रांसपोर्ट और स्थानीय कारोबार को भी नई गति मिलेगी।
उद्योग और कृषि दोनों के लिए लाभकारी
इसके अलावा, यह एक्सप्रेसवे कृषि और उद्योग दोनों के लिए लाभकारी साबित होगा। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि इस परियोजना को संभव बनाने में किसानों की बड़ी भूमिका रही है, जिन्होंने जमीन उपलब्ध कराई। बेहतर कनेक्टिविटी के चलते किसानों की उपज बड़े बाजारों तक तेजी से पहुंचेगी, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी। साथ ही, एक्सप्रेसवे के किनारे नए औद्योगिक और लॉजिस्टिक हब विकसित होने की संभावना भी बढ़ेगी।
यूपी के 12 जिलों की कनेक्टिविटी और मजबूत
गंगा एक्सप्रेसवे को आगे फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे के जरिए अन्य प्रमुख एक्सप्रेसवे से भी जोड़ा जाएगा, जिससे इटावा, कन्नौज और फर्रुखाबाद जैसे जिलों की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। यह पूरा नेटवर्क उत्तर भारत में एक मजबूत ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर तैयार करेगा।
कितना होगा टोल
टोल की बात करें तो मेरठ से प्रयागराज तक पूरे सफर के लिए कार चालकों को करीब 1800 रुपये चुकाने होंगे, जबकि दोपहिया, तिपहिया और ट्रैक्टर के लिए यह शुल्क लगभग 905 रुपये तय किया गया है। हालांकि, जब यह एक्सप्रेसवे हरिद्वार तक विस्तारित होगा, तो इसकी उपयोगिता और भी बढ़ जाएगी।
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